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एनओसी नहीं ले पाए:रोडवेज को ओवरब्रिज के नीचे से बस स्टैंड के सीधे रास्ते के लिए नहीं मिल पाई एनओसी

घरौंडा9 दिन पहले
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बस स्टैंड को शुरू हुए तीन सप्ताह से ज्यादा का समय बीत चुका है। रोडवेज अधिकारी आज तक एनएचएआई से ओवरब्रिज के नीचे से रास्ता निकालने की एनओसी नहीं ले पाए हैं। लिहाजा चंडीगढ़ की तरफ से आने वाली बसों को रॉन्ग साइड से आकर बस स्टैंड में एंट्री करनी पड़ रही है।

इससे हादसा होने का अंदेशा बना रहता है। रोडवेज विभाग अभी तक रास्ते के लिए लेआउट की तैयार नहीं करवा पाया है। लेआउट तैयार होने के बाद फाइल एनएचएआई को जाएगी और उसके बाद एनओसी मिल पाएगी। जिससे कई माह का समय लग सकता है। ऐसे में बसों को मौजूदा रास्ते से ही बस स्टैंड में एंट्री करनी होगी। बस स्टैंड का उद्घाटन सीएम मनोहर लाल ने फरवरी माह के पहले सप्ताह में कर दिया और बस स्टैंड 19 अगस्त को शुरू हुआ। सात माह महीने का समय बस स्टैंड का निर्माण कार्य पूरा करने, बस स्टैंड में एंट्री के लिए एनएचएआई से एनओसी और एनओसी मिलने के बाद एंट्री गेट के रास्तों का निर्माण करने में गुजर गए। किसी तरह से बस स्टैंड शुरू हुआ लेकिन करनाल की तरफ से आने वाली रोडवेज बसों के लिए ओवरब्रिज के नीचे से रास्ते की समस्या ज्यों की त्यों बन रही।

सर्विस रोड का बरसाती नाला बना बाधा
बस स्टैंड के ठीक सामने ओवरब्रिज के नीचे से बस स्टैंड में बसों की एंट्री होनी है। ओवरब्रिज के साथ-साथ सर्विस रोड पर बरसाती नाला बनाया गया है। चूंकि नाला कमजोर है और बसों का वजन सहन नहीं कर सकता। लिहाजा, नाले के ऊपर मोटी परत की स्लैब डाली जानी है ताकि वह बसों के वजन को सहन कर सकें। रोडवेज अधिकारियों की मानें तो उन्होंने पीडब्ल्यूडी विभाग की सहायता से रास्ते का लेआउट बनवाने की कोशिश की। किसी प्राइवेट व्यक्ति की भी सहायता ली, लेकिन बात सिरे नहीं चढ़ पाई। अब दोबारा पीडब्ल्यूडी विभाग से बातचीत की जाएगी और लेआउट बनवाने का प्रयास किया जाएगा। जब तक लेआउट की फाइल एनएचएआई को नहीं जाएगी तब तक एनओसी नहीं मिलेगी और एनओसी नहीं मिलेगी तो बसों के लिए रास्ता नहीं बनेगा।

प्रतिदिन 500 से ज्यादा बसों की होती है एंट्री
घरौंडा बस स्टैंड में करनाल और पानीपत की तरफ से करीब 530 बसों की एंट्री होती है। जिसमें से 50 प्रतिशत बसें यानी 250 बसें करनाल साइड से बस स्टैंड में प्रवेश करती है। रोडवेज चालकों के लिए सबसे बड़ी समस्या यह है कि उन्हें बस स्टैंड में प्रवेश करने के लिए रॉन्ग साइड चलना पड़ता है। जिससे हादसे की संभावना भी बनी रहती है। यदि सीधा रास्ता हो तो बस चालको की बड़ी समस्या दूर होगी।

नाले की स्लैब कमजोर, बस का वजन नहीं सहेगा
बस स्टैंड के सामने सर्विस रोड पर ओवरब्रिज के साथ नाला बना हुआ है। नाले की स्लैब कमजोर है जो बस का वजन सह नहीं पाएगा। ओवरब्रिज के नीचे से पूरे रास्ते का लेआउट तैयार करके एनएचएआई को भेजा जाएगा। जिसके बाद एनओसी मिल पाएगी और बसों के लिए रास्ता खुल पाएगा।
-कुलदीप सिंह, जीएम रोडवेज करनाल।

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