बसताड़ा लाठीचार्ज मामला:जांच आयोग के सामने पेश हुए 3 किसान, लाठीचार्ज करने वाले पुलिसकर्मी, अधिकारी व एसडीएम की भूमिका बताई

करनाल6 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
रिटायर्ड जज सोमनाथ अग्रवाल के नेतृत्व में किया है जांच आयोग का गठन। - Dainik Bhaskar
रिटायर्ड जज सोमनाथ अग्रवाल के नेतृत्व में किया है जांच आयोग का गठन।

करनाल के बसताड़ा टोल लाठीचार्ज मामले की जांच कर रहे जस्टिस (रि.) एसएन अग्रवाल आयोग की बुधवार को करनाल के पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में कोर्ट लगी। बुधवार को आयोग के सामने किसान गुरजंट सिंह, रविंद्र व रणबीर पेश हुए। किसानों ने लाठीचार्ज की पूरी घटना का विवरण बताया। इस मामले में लाठीचार्ज करने वाले किसान और एसडीएम की भूमिका की भी जानकारी दी।

कोर्ट की सुनवाई का अभी पहला दौर चल रहा है। इसमें 34 किसानों को गवाह के तौर पर बयान दर्ज करवाने के लिए नोटिस देकर बुलाया गया है। जल्द ही दूसरा दौर भी शुरू किया जाएगा। इसमें एसडीएम आयुष सिन्हा, डीसी, एसपी समेत अन्य अधिकारियों को नोटिस देकर जांच में शामिल किया जाएगा।

बयान दर्ज करवाने पहुंचे किसान।
बयान दर्ज करवाने पहुंचे किसान।

मुख्यालय पंचकूला तो कोर्ट करनाल में

हरियाणा सरकार ने 25 सितंबर को आयोग को जांच रिपोर्ट सौंपने के लिए एक माह का समय दिया था। परंतु सरकार ने आयोग की सेवा-शर्त 11 अक्टूबर को तय की। इसलिए जांच 12 अक्टूबर से शुरू हो पाई, सरकार 24 अक्टूबर तक एक माह मान रही है। सरकार ने एचसीएस विवेक कालिया को आयोग सचिव लगाया है। आयोग का मुख्यालय पंचकूला तो कोर्ट करनाल में बनाई गई है।

एसडीएम ने दिए थे सिर फोड़ने के आदेश…

IAS आयुष सिन्हा का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वो यह कह रहे हैं कि बैरिकेड के आगे कोई किसान जाए तो उसका सिर फोड़ देना। वीडियो में आयुष सिन्हा पुलिसवालों से कह रहे हैं कि कोई यहां से निकलने की कोशिश करे तो लठ उठा के मारना बस। उन्होंने कहा था कि वह स्पष्ट ऑर्डर दे रहे हैं, उसका सिर फोड़ देना। कोई डाउट नहीं है, किसी डायरेक्शन की जरूरत नहीं है। ये नाका किसी हालत में तोड़ने नहीं देंगे। पीछे और फोर्स लगी है। यहां आपको लगा रखा है शुरू में। हेलमेट पहन लो। यहां से एक बंदा भी नहीं जाना चाहिए और अगर गया तो सिर फूटा होना चाहिए उसका।

क्या था पूरा मामला

28 अगस्त को करनाल में सीएम मनोहर लाल की अध्यक्षता में भाजपा की समीक्षा बैठक थी। इस दौरान बसताडा टोल पर बैठे किसानों ने प्रदेशाध्यक्ष ओपी धनखड को काले झंडे दिखाकर विरोध किया। कुछ समय के बाद किसान भाजपा की बैठक का विरोध जताने के लिए शहर के तरफ बढ़ने लगे। इस दौरान पुलिस के साथ तकरार हो गया। पुलिस ने किसानों पर लाठीचार्ज शुरू कर दिया। अगले दिन 29 को एक किसान रायपुर जाटान निवासी सुशील काजल की मौत हो गई। किसानों ने सुशील की मौत का कारण लाठीचार्ज की चोटों को बताया। घरौंडा की अनाज मंडी में महापंचायत का आयोजन कर निर्णय लिया कि वे 7 सितंबर से सचिवालय का घेराव करेंगे। 11 सितंबर को एसीएस के नेतृत्व में किसानों की बातचीत पर समझौता हुआ। मृतक के परिवार से दो सदस्याें को नाैकरी दी जाएगी। मामले की जांच रिटायर्ड जज से होगी। 22 सितंबर को दो नौकरी सुशील काजल के बेटे व पुत्रवधू को दी जा चुकी है। 25 सितंबर को रिटायर्ड जज सोमनाथ अग्रवाल की अध्यक्षता आयोग का गठन किया गया।

खबरें और भी हैं...