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निकासी की व्यवस्था:40 फीसदी अधूरी है नालों की सफाई, रेन वाटर ड्रेन पर खर्च 84.50 करोड़ फिर भी बारिश में डूब रहा स्मार्ट सिटी

करनाल20 दिन पहले
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मुगल कैनाल के नाले की सफाई करती जेसीबी। - Dainik Bhaskar
मुगल कैनाल के नाले की सफाई करती जेसीबी।

स्मार्ट सिटी बन रहे स्वच्छ सर्वेक्षण में उत्तर भारत में सर्वोच्च स्थान हासिल करने वाले शहर करनाल में जल निकासी की व्यवस्था की बारिश में पोल खुल गई। इस बार अगर इसी अंदाज में बारिश हुई तो शहर को जलभराव की समस्या से जूझना पड़ेगा। मंगलवार को हुई 190 एमएम बारिश के बाद बुधवार को हुई 73 एमएम बारिश ने इसकी झलक दिखा दी। करोड़ों की लागत से बनी जल निकासी की व्यवस्था अव्यवस्था का शिकार है। अधिकारी इसको लेकर कितने संवेदनशील हैं

इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 15 जून तक हर हाल में सफाई का काम पूरा हो जाना चाहिए, लेकिन यहां तो शहर के दो सबसे बड़े नालों की सफाई का वर्क ऑर्डर इसके बाद जारी किया है। लगभग 24 लाख रुपए के टेंडर के बाद भी यह नाले 60 फीसदी साफ नहीं हुए हैं। शहर में पहले ही 50 एमएम बारिश तक जल निकासी की व्यवस्था है। वह पूरी तरह से ठीक न होने से पानी निकलने में ज्यादा समय लगता है। इस बार तो नाले और ड्रेन भी साफ नहीं हुए हैं। इसलिए 50 एमएम बारिश में ही नाले ओवरफ्लो हो रहे हैं। सीवर साफ न होने से बैक मारने से घरों में पानी घुसता है।

ज्यादा बारिश होने से जल भराव की स्थिति : एसई

^शहर में एक साथ ज्यादा बारिश होने से जलभराव की दिक्कत आई है। इतनी बारिश आने पर तीन-चार घंटे पानी निकलने में लग जाते हैं। नालों की सफाई का कार्य थोड़ा बहुत बचा है, जोकि बारिश आने से रूक गया है। इसके अलावा मुगल कैनाल नाले में ब्लॉकेज आई थी, उसे खुलवाया जा रहा है। दीपक किंगर, एसई, नगर निगम करनाल।

ये लापरवाही शहर को करेगी परेशान

शहर में गंदे और बरसाती पानी की निकासी के लिए बने नाले और ड्रेन की सफाई नहीं हो सकी है। क्योंकि काम न तो समय से शुरू किया गया न ही समय से पूरा करने की संजीदगी दिखाई गई। अमूमन 15 जून से पहले इनकी सफाई पूरी होनी चाहिए थे क्योंकि जून के आखिर सप्ताह में यहां बारिश शुरू हो जाती है। हाल यह है कि लेट मानसून आने से बारिश अब शुरू हुई है, इसके बाद भी 40 फीसदी सफाई का काम अधूरा पड़ा है। ऐसे में जो पानी एक घंटे में निकलता है उसे निकलने में डेढ़ घंटे लगने की आशंका है।

सबसे बड़ा नाला ही साफ नहीं किया, इसके ओवरफ्लो से डूबा शहर

मुगल कैनाल नाला गंदे पानी की निकासी व बरसाती पानी की निकासी में शहर के लिए लाइफ लाइन का काम करता है। शहर के तमाम बड़े-छोटे नाले इसी में आकर पड़ते हैं। तीन किमी लंबे इस नाले की सफाई के लिए 14.42 लाख का टेंडर किया गया था। लेकिन इस बार इसका वर्क ऑर्डर ठेकेदार को 17 जून ठेकेदार को जारी किया गया। हाल यह है कि 60 फीसदी काम ही पूरा हो पाया। मंगलवार को इसके अोवर फ्लो होने से शहर डूबा था।

सबसे लंबे नाले की सफाई अधूरी, घरों में घुसा पानी

रामनगर काछवा पुल से जीटी नमस्ते चौक तक का नाला शहर में सबसे लंबा दूसरा सबसे बड़ा नाला है। मुगल कैनाल जब नहर के रूप में बहती थी तब यह सबसे बड़ा व मुख्य नाला था। हांसी रोड भगवाड़ियां गैस एजेंसी से जीटी रोड तक इसकी सफाई का टेंडर 9.41 लाख में हुआ था। लेकिन इसका 12 जून को वर्कआर्डर हुए। इससे नाला चांद सराए ही साफ हो पाया। यानी 40 प्रतिशत सफाई बाकी है। इन नाले की सफाई के लिए जुलाई का पूरा महीना भी ठेकेदार को दिया गया है। जबकि यह भारी बारिश का महीना है।

एसटीपी भी नहीं हुए तैयार

श्हार में गंदे पानी व बरसाती पानी की निकासी के लिए बनाए जा रहे 20 व 8 एमएलडी के दाे नए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट अभी तक तैयार नहीं हो सके है। जबकि इनकी डेड लाइन 31 मार्च 2020 थी, लेकिन 2021 की 31 मार्च भी निकल गई। इनका 30 प्रतिशत कार्य अभी अधूरा है।

शुगर मिल और सैदपुरा में तैयार आईपीएस सवा साल बाद भी अधूरे : इसके अलावा बरसाती पानी की निकासी के लिए शुगर मिल व सैदपुरा में तैयार कराए जा रहे दो आईपीएस भी अभी तक अधूरे पड़े हैं। इनका अभी तक 70 प्रतिशत कार्य ही पूरो पाया है। जबकि डेड लाइन से सवा साल अधिक बीत गया है।

84 कराेड़ रेन वाटर ड्रेन पर खर्च, निकासी नहीं

शुगर मिल और सैदपुरा में तैयार आईपीएस सवा साल बाद भी अधूरे : इसके अलावा बरसाती पानी की निकासी के लिए शुगर मिल व सैदपुरा में तैयार कराए जा रहे दो आईपीएस भी अभी तक अधूरे पड़े हैं। इनका अभी तक 70 प्रतिशत कार्य ही पूरो पाया है। जबकि डेड लाइन से सवा साल अधिक बीत गया है।

ये हालात: 50 एमएम से ज्यादा बारिश में होगा जलभराव, 100 एमएम बनेगी मुसीबत

शहर में 9 बूस्टिंग स्टेशन लगाए गए हैं। 50 एमएम बारिश होने तक शहर में जलभराव नहीं होगा। इससे ज्यादा एक साथ बारिश होने पर शहर में जलभराव होगा, क्योंकि डिस्पोजल पंप एक साथ इतने पानी को नहीं निकाल पाता है। 100 एमएम से अधिक बारिश होने पर पानी निकासी में 3 से 4 घंटे लगेंगे। इंजीनियर्स के अनुसार यह बारिश नाॅर्मल से कहीं अधिक हुई है। क्योंकि इस दौरान रोड गलियों में मलबा आदि अड़ जाने इत्यादि की भी समस्या रहती है। दूसरी ओर करनाल के डिस्पोजल की बात करें तो नौ में से तीन डिस्पोजल तकनीकी खराबी के कारण बंद पाए गए। इनमें सेक्टर-13 का एक और सेक्टर-14 में दो डिस्पोजल बंद मिले। मॉडल टाउन में बूस्टर पंप की मोटर खराब पाई गई, इस कारण भी जल भराव हुआ।

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