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नई महामारी:ब्लैक फंगस के 6 नए केस, शुगर पेशेंट को ज्यादा खतरा, 70 फीसदी मरीजों की उम्र 50 साल पार

करनाल20 दिन पहले
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  • कोरोना के इस माह पहली बार 100 से कम 80 संक्रमित मिले, 6 की मौत, रिकवरी रेट 95.11%

जिले में काेराेना संक्रमण का ग्राफ तेजी से नीचे गिर रहा है। जिले में रविवार को इस माह पहली बार केसों का आकड़ा 100 से कम रहा। कुल 80 केस मिले लेकिन 6 लोगों की जान गई। लेकिन, ब्लैक फंगस का खतरा बढ़ता जा रहा। 6 नए केस सामने, जिससे फरवरी से अब तक ब्लैक फंगस के केसों की संख्या का आंकड़ा 57 पर पहुंचा गया है।

इनमें से 42 अस्पताल में भर्ती हैं। कोरोना केसों के साथ संक्रमण दर में भी गिरावट आई है। रविवार को पॉजिटिविटी रेट घटकर 8.45 जबकि रिकवरी रेट 95.11 प्रतिशत पहुंच गई है। 253 मरीज ठीक हुए हैं। डेथ रेट 1.29 प्रतिशत पर है। जिले में अबतक मिले कुल 39085 संक्रमितों में से 37177 मरीज ठीक हो चुके हैं 1402 एक्टिव केस हैं। जबकि 506 लोगों की जान जा चुकी है।

आंखों की सभी बीमारी फंगस नहीं होती, घबराएं नहीं उपचार करवाएं

डीसी निशांत कुमार यादव ने कहा कि ब्लैक फंगस को रोकने के लिए प्रशासन सजग है, कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज में उपचार के लिए अलग से 20 बैड का वार्ड बनाया गया है। राज्य सरकार द्वारा ब्लैक फंगस की बीमारी को देखते हुए अनेक कदम उठाए जा रहे हैं, किसी को पैनिक होने की जरूरत नहीं, लक्षण होने पर केसीजीएमसी में डाक्टरों से परामर्श लें, सभी आंखों की बीमारी फंगस नहीं होती, घबराएं न बल्कि उपचार करवाएं।

50 साल से ज्यादा उम्र के लोगों पर ब्लैक फंगस का खतरा ज्यादा

कोरोना के बाद अब ब्लैक फंगस जीवन के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। 50 साल से अधिक आयु के लोगों पर ब्लैक फंगस अपना अधिक कहर ढाह रहा है। ब्लैक फंगस की चपेट में आने वाले लोगों में 70 प्रतिशत 50 साल या उससे अधिक आयु के लोग हैं।

ब्लैक फंगस पहले नाक और फिर आंखों पर अटैक करता है। सबसे कम आयु में अभी तक सिर्फ 24 साल के एक युवक को ब्लैक फंगस मिला है। ब्लैक फंगस के इलाज के लिए इंजेक्शन भी कठिनाई से मिल रहे हैं। हालांकि ऑक्सीजन का अब कोई ईश्यू नहीं रहा है।

फंगस शुगर मरीजों के लिए बन रहा सबसे ज्यादा खतरनाक

ब्लैक फंगस शुगर के मरीजों के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक साबित हो रहा है। डॉक्टरों के अनुसार जिन लोगों में ब्लैक फंगस मिल रहा है, उनमें 90 प्रतिशत से अधिक लोग शुगर के पेंशेंट मिलते हैं। ऐसे हालात में ब्लैक फंगस ऐसे मरीजों के लिए अधिक खतरनाक बन रहा है।

इसके अलावा जिन मरीजों को स्टेरॉयड दवाई दिए जाने से इम्युनिटी कमजोर हो गई हैं, उन पर भी यह अधिक प्रभाव दिखा रहा है। अभी तक जिले में 398 संदेहास्पद मरीजों में से 57 मरीज ब्लैक फंगस से पॉजिटिव मिल चुके हैं।

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