करनाल प्रशासन का जेल दौरा:कैदियों से खाने-रहने समेत अन्य सुविधाओं की जानकारी ली, प्रत्येक बुधवार चर्म रोग विशेषज्ञ करेगा जांच

करनाल2 महीने पहले
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जेल दौरे के दौरान डीसी निशांत व एसपी गंगाराम पुनिया। - Dainik Bhaskar
जेल दौरे के दौरान डीसी निशांत व एसपी गंगाराम पुनिया।

हरियाणा के करनाल जिले की जेल का शहरी प्रशासन ने दौरा किया। उपायुक्त निशांत कुमार यादव समेत अन्य अधिकारियों ने प्रबंधों, अनुशासन और कैदियों को दी जा रही सुविधाओं के बारे में जाना। साथ ही एक अतिरिक्त ओपन एयर जिम (महिला कैदियों के लिए), पुस्तकालय के लिए उपयुक्त फर्नीचर, बास्केट बाल कोर्ट में कोटा स्टोन लगवाने तथा प्रत्येक बुधवार को केसीजीएमसी से एक चर्म रोग विशेषज्ञ डॉक्टर भिजवाने की बात कही।

साथ ही बैडमिंटन कोर्ट की जगह पक्की करवाई जाएगी। अतिरिक्त कम्प्यूटर सिस्टम की जरूरत भी पूरी की जाएगी। जेल अधीक्षक अमित भादू की तरफ से इन सुविधाओं की मांग की गई थी, जाहिर है कि इनसे जेल सुविधाओं में और इजाफा होगा। निरीक्षण में पुलिस अधीक्षक गंगाराम पुनिया तथा एसीयूटी प्रदीप सिंह अतिरिक्त एसएमओ डॉ. महेश मेहरा मौजूद रहे। कैदियों के लिए बनाई गई बैरक में 10 जगहों का निरीक्षण किया गया।

वहां मौजूद कैदियों से, कोई दिक्कत हो तो बताओ- यह भी पूछा, खाना कैसा मिलता है इसकी भी जानकारी ली। निरीक्षण में उपायुक्त ने सबसे पहले मुलाकाती कक्ष में कैदियों द्वारा अपने परिजनों से फोन पर बात करने की सुविधा देखी। पहले यह 15 दिन के लिए थी। अब कोविड के बाद महीने में एक बार बात कर सकते हैं। वैसे रोजाना के लिए अलग जगह पर एक क्योस्क भी लगाया गया है, इस पर कैदी 5 मिनट बात कर सकते हैं।

जेल में जानकारी हासिल करते हुए प्रशासनिक अधिकारी।
जेल में जानकारी हासिल करते हुए प्रशासनिक अधिकारी।

घोघड़ीपुर गांव के एक कैदी की दरख्वास्त पर मौके पर ही पैरोल मंजूर कर दी। एक महिला कैदी, जो करनाल से सिरसा जेल स्थानांतरित होने की मांग कर रही थी, उसकी भी फरियाद सुनी। जेल अधीक्षक ने उपायुक्त को बताया कि करनाल जेल के पौष्टिक आहार या भोजन की अक्सर प्रदेश के दूसरे जिलों में चर्चा होती है। वैसे कैदी अपनी इच्छानुसार जेल में कैंटीन से भी रोजाना जरूरत के सामान के साथ-साथ फल, सब्जी और मिठाई आदि भी खरीद सकते हैं, जो प्रिंट रेट से ज्यादा दाम पर नहीं दी जाती। जेल को इससे जो लाभ होता है, वह एक वेलफेयर फंड में जमा हो जाता है, जो कैदियों की सुविधाओं पर ही खर्च होता है। इस फंड में अब डेढ़ करोड़ रुपए जमा हैं।

एफएम की जानकारी लेते डीसी।
एफएम की जानकारी लेते डीसी।

महिला व पुरूष कैदियों की अलग-अलग बैरक देखी

उपायुक्त ने इस दौरान महिला व पुरुषों के लिए बनाई गई अलग-अलग बैरक देखी। इनमें कठोर सजायाफ्ता, साधारण सजा वाले बैंकिंग से जुड़े सिविल कैदी, विचाराधीन कैदी, बाहर (बांग्लादेशी व कश्मीरी) से आए कैदी तथा किन्नर कैदियों के कक्षों का निरीक्षण किया। महिलाओं के बैरक में 3 छोटे बच्चे भी मिले। उनके लिए जेल में ही लर्निंग और मनोरजंन की सुविधा मौजूद रही। महिलाओं के लिए एक सिलाई केन्द्र भी मिला। इस दौरान उपायुक्त ने सुरक्षा वार्ड यानी चक्की जेल का निरीक्षण किया, इसमें बांग्लादेशी व कश्मीरी कैदी मिले, जो अनाधिकृत रूप से सीमा पार करने तथा पत्थर मारने के दोष में सजा काट रहे हैं।

जेल रेडियो कक्ष का किया निरीक्षण

उपायुक्त ने जेल में बनाए गए एफएम जेल रेडियो का निरीक्षण किया। कैदियों के लिए यहां से रोजाना फिल्मी गाने, भक्ति संगीत और फरमाइश के गाने प्रसारित किए जाते हैं। जेल अस्पताल के साथ मनोरोग विशेषज्ञ के विजिट की भी सुविधा जेल में मौजूद कराई गई है। मंदिर और गुरुद्वारा भी जेल में ही बनाए गए हैं।

48 एकड़ में है जेल की बाउंड्री

जेल अधीक्षक ने बताया कि बाउंड्री के अंदर 48 एकड़ में जेल स्थापित है। आवासीय स्थल मिलाकर यह 80 एकड़ जगह है। जिला जेल का उद्घाटन 2004 में हुआ था और 2005 में इसमें कैदियों के आने की शुरुआत हो गई थी। वर्तमान में जिला जेल में 1787 कैदी सजा काट रहे हैं। जिनमें 1730 पुरुष व 57 महिलाएं हैं। वैसे अधिकृत क्षमता 2434 की है। जेल स्टाफ की बात करें तो जेल अधीक्षक के अतिरिक्त 3 उपाधीक्षक, 3 सहायक उपाधीक्षक, 118 वार्डर निगरानी के लिए तैनात हैं। निरीक्षण से पहले उपायुक्त ने जेल अधीक्षक से पैरोल और फरलो पर जाने वाले कैदियों बारे भी जानकारी ली।