बसताड़ा लाठीचार्ज मामला:जांच आयोग ने 3 महीने बढ़ाने की लगाई थी गुहार, दो महीने का मिला समय, 24 दिसंबर तक करनी होगी जांच

करनाल7 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
रिटायर्ड जज सोमनाथ अग्रवाल। - Dainik Bhaskar
रिटायर्ड जज सोमनाथ अग्रवाल।

करनाल के बसताड़ा टोल लाठीचार्ज मामले की जांच कर रहे जस्टिस (रि.) एसएन अग्रवाल आयोग की गुरुवार को करनाल के पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में कोर्ट चली। सरकार ने गुरुवार को आयोग को दो महीने का समय अतिरिक्त दे दिया है। आयोग ने सरकार से जांच के लिए तीन महीने का समय मांगा था। अब आयोग को कुल तीन महीने का समय मिला है। 24 दिसंबर तक जांच को पूरा करना होगा। SDM घरौंडा पूजा भारतीय ने अपना बयान दर्ज करवा लिया है। वहीं आयोग के सामने गवाही के लिए किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल करीब 3 बजे पेश हुए। आयोग के रिटायर्ड जज सोमनाथ अग्रवाल ने बलबीर सिंह राजेवाल से करीब पौने दो घंटे तक पूछताछ की। राजेवाल ने जवाब में कहा कि जब लाठीचार्ज हुआ तो वे मौके पर नहीं थे, लेकिन उन्होंने एसडीएम के बयान की वीडियो देखा जिसमें किसानों का सिर फोड़ने का बयान दे रहे हैं। जो सामाजिक नाते से उचित नहीं है।

जिस दिन किसानों ने करनाल में सचिवालय का घेराव किया था, उस दिन राजेवाल करनाल में मौजूद रहे थे। कोर्ट की सुनवाई में अभी तक 46 की गवाही हो चुकी है। जल्द ही एसडीएम आयुष सिन्हा, डीसी, एसपी समेत अन्य अधिकारियों को नोटिस देकर जांच में शामिल किया जाएगा।

राजेवाल पहुंचे आयोग की कोर्ट।
राजेवाल पहुंचे आयोग की कोर्ट।

मुख्यालय पंचकूला तो करनाल में कोर्ट
हरियाणा सरकार ने 25 सितंबर को आयोग को जांच रिपोर्ट सौंपने के लिए एक माह का समय दिया था। परंतु सरकार ने आयोग की सेवा शर्त 11 अक्टूबर को तय की। इसलिए जांच 12 अक्टूबर से शुरू हो पाई, सरकार 24 अक्टूबर तक एक माह मान रही है। सरकार ने एचसीएस विवेक कालिया को आयोग सचिव लगाया है। आयोग का मुख्यालय पंचकूला तो कोर्ट करनाल में बनाई गई है।

एसडीएम ने दिए थे सिर फोड़ने के आदेश…
IAS आयुष सिन्हा का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वह कह रहे हैं कि बैरिकेड से आगे कोई किसान जाए तो उसका सिर फोड़ देना। कोई यहां से निकलने की कोशिश करे तो लठ उठा के मारना बस। वह स्पष्ट ऑर्डर दे रहे हैं, उसका सिर फोड़ देना। कोई डाउट नहीं है, किसी डायरेक्शन की जरूरत नहीं है। ये नाका किसी हालत में तोड़ने नहीं देंगे। पीछे और फोर्स लगी है। यहां आपको लगा रखा है शुरू में। हेलमेट पहन लो। यहां से एक बंदा भी नहीं जाना चाहिए और अगर गया तो सिर फूटा होना चाहिए उसका।

क्या था पूरा मामला
28 अगस्त को करनाल में सीएम मनोहर लाल की अध्यक्षता में भाजपा की समीक्षा बैठक थी। इस दौरान बसताडा टोल पर बैठे किसानों ने प्रदेशाध्यक्ष ओपी धनखड को काले झंडे दिखाकर विरोध किया। कुछ समय बाद किसान भाजपा की बैठक का विरोध जताने के लिए शहर के तरफ बढ़ने लगे। इस दौरान पुलिस के साथ तकरार हो गई। पुलिस ने किसानों पर लाठीचार्ज किया। अगले दिन 29 अगस्त को एक किसान रायपुर जाटान निवासी सुशील काजल की मौत हो गई। किसानों ने सुशील की मौत का कारण लाठीचार्ज की चोटों को बताया।

घरौंडा की अनाज मंडी में महापंचायत का आयोजन कर निर्णय लिया गया कि वे 7 सितंबर से सचिवालय का घेराव करेंगे। घेराव किया गया और किसान लघु सचिवालय के सामने धरने पर बैठे। 11 सितंबर को एसीएस के नेतृत्व में किसानों की बातचीत पर समझौता हुआ कि मृतक के परिवार से दो सदस्यों को नौकरी दी जाएगी। मामले की जांच रिटायर्ड जज से कराई जाएगी। 22 सितंबर को दो नौकरी सुशील काजल के बेटे व पुत्रवधू को दी जा चुकी है। 25 सितंबर को रिटायर्ड जज सोमनाथ अग्रवाल की अध्यक्षता में जांच आयोग का गठन किया गया।

खबरें और भी हैं...