बीरेंद्र सिंह बोले- मेरी रगों में किसान का खून:BJP कार्यसमिति से निकाले जाने पर बोले- किसानों की बात रखना पार्टी की खिलाफत नहीं, मेरी प्राथमिकता हमेशा से खेती और किसान

करनाल10 महीने पहले
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पूर्व केंद्रीय मंत्री और हरियाणा के कद्दावर नेता चौधरी बीरेंद्र सिंह ने खुद को BJP कार्यसमिति से बाहर किए जाने पर कहा कि वह इसे बहुत ज्यादा महत्व नहीं देते। भाजपा और केंद्र सरकार के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों से जुड़े सवाल पर बीरेंद्र सिंह ने कहा, 'किसानों की बात रखना पार्टी विरोधी गतिविधि नहीं हो सकती। जहां तक किसान और खेती की बात है तो बीरेंद्र सिंह की प्राथमिकता हमेशा से खेती और किसान ही रहे हैं। किसानों के साथ खड़ा होना मेरा धर्म हैं क्योंकि मेरी रगों में भी एक किसान का ही खून दौड़ रहा है।'

गौरतलब है कि बीरेंद्र सिंह नए खेती कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों के हक में बोलते रहे हैं। सियासी जानकारों के अनुसार, बीरेंद्र सिंह के इसी रवैये के चलते भाजपा हाईकमान उनसे नाराज है। इसी वजह से न तो उन्हें केंद्र में मंत्री बनाया गया और न ही उनके बेटे को जो कि हिसार से भाजपा के सांसद है। बीरेंद्र सिंह भी भाजपा हाईकमान की ज्यादा तरजीह नहीं देते और गाहे-बगाहे अपने मन की बात कहते रहे हैं। बीती 25 सितंबर को ही वह जींद में पूर्व उपप्रधानमंत्री स्व. देवीलाल की जयंती पर इनेलो की ओर से आयोजित रैली में पहुंच गए थे।

माना जा रहा है कि इसी वजह से भाजपा हाईकमान ने पार्टी कार्यकारिणी से बाहर कर दिया। ​​​​​इस मुद्दे पर बीरेंद्र सिंह ने कहा कि जब भी कोई नया आदमी अध्यक्ष बनता है तो अपने हिसाब से पार्टी कार्यकारिणी का गठन करता है। भाजपा की नई कार्यकारिणी का गठन भी सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। इसमें उन्हें जगह नहीं दी गई तो यह कोई बड़ी बात नहीं है। वह इसे ज्यादा गंभीर नहीं मानते।

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल द्वारा आंदोलन कर रहे किसानों को 'जैसे को तैसा अंदाज में जवाब देने' और 'उठा ल्यो लट्ठ' वाला बयान वापस लेने पर बीरेंद्र सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री ने बयान वापस लेकर बड़प्पन दिखाया है। उन्होंने कहा कि कभी-कभी किसी के प्रभाव में आकर व्यक्ति की जीभ फिसल जाती है और उसके मुंह से गैर-जिम्मेदाराना बात निकल जाती है। वैसे भी किसानों द्वारा कोई हिंसा नहीं की जा रही। किसान अपना आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से चला रहे हैं। बीरेंद्र सिंह ने कहा कि वह इस बात के लिए किसान संगठनों की प्रशंसा करते हैं।

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