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नगर निगम का दावा:सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट को अपग्रेड कराने के दावे कागजों तक सीमित, प्लांट स्थल पर लगा 85000 टन कचरे का ढेर

करनाल10 महीने पहले
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करनाल. सॉलि़ड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट पर लगे कचरे के ढेर। - Dainik Bhaskar
करनाल. सॉलि़ड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट पर लगे कचरे के ढेर।
  • प्लांट की कैपेसिटी 500 टन कचरा प्रतिदिन किया जाएगा, शहरी स्थानीय निकाय निदेशालय ने नए प्रोजेक्ट को किया अप्रूव

नगर निगम जिस सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के बूते पर शहर को साफ सुथरा रखने और स्वच्छ सर्वेक्षण में अच्छे अंक लेकर प्रदेश में नंबर वन स्थान पा रहा है, उसी सोलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट को लेकर नगर निगम उदासीन बना हुआ है। सोलिड वेस्ट मैनेजमेंट को अपग्रेड करने के दावे फिलहाल कागजों तक सीमित हैं। कचरे की मात्रा बढ़ने से लगातार प्लांट कचरा प्रबंधन में अपनी क्षमता खोता जा रहा है, जिसके चलते प्लांट स्थल पर 85000 टन कचरे के ढेर लग गए हैं। यह कचरा कोई एक दो एकड़ में नहीं, बल्कि इसने चार एकड़ जमीन को कवर कर लिया है।

कचरा स्थल पर प्रतिदिन पहुंच रहे कचरे को अनलिफ्ट करने में दिक्कत आने लगी है। जहां पर मशीनें लगी हैं, वहां तक कचरे के ढेर पहुंच गए हैं। दिनोंदिन कचरे की मात्रा बढ़ने से सॉलिड वेस्ट मैनेमेंट प्लांट कचरा स्थल के रूप में उभर कर आ रहा है। प्लांट की क्षमता प्रतिदिन 150 टन कचरा मैनेज करने की है, जबकि प्लांट पर हर रोज लगभग 200 टन कचरा पहुंचा रहा है। प्लांट पुराना भी हो चुका है, जो अपनी क्षमता से मुताबिक कचरे के प्रबंधन करने में हर दिन सक्षम नहीं रह पाता है।

न केवल नगर निगम बल्कि शहरी स्थानीय निकाय निदेशालय स्तर पर भी सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट की कैपेसिटी बढ़ाने के दावे किए जा चुके हैं, लेकिन अभी तक इस प्लांट पर कैपेसिटी बढ़ाने से संबंधित कोई काम नहीं हो पाया है। जबकि स्वच्छ सर्वेक्षण के तहत बेहतर अंकों के लिए सोलिड वेस्ट मैनेजमेंट का भी अहम रोल रहता है।

मेरठ रोड की तलहटी में शेखुपुरा गांव के निकट बने प्लांट पर कचरे के ढेर लग गए हैं। क्योंकि शहर में प्रतिदिन जितना कचरा निकल रहा है, उतने कचरे का प्लांट में मैनेजमेंट नहीं हो पा रहा है। इसके चलते कचरे के लगे ढेरों से रोड से आते-जाते लोगों को बदबू से परेशानी आ रही है।

पहले अंबाला को बनाया गया था कलस्टर
नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट को लेकर पहले अंबाला को कलस्टर बनाया गया था, जिसमें करनाल व अंबाला का संयुक्त कूड़ा प्रबंधन प्रोजेक्ट बनाया गया था, जिसके तहत कचरे से निकलने वाले फ्यूल अंबाला पहुंचाया जाना था। यहां पर जो कचरा आना था, वह करनाल के निसिंग, नीलोखेड़ी, इंद्री, घरौंडा, तरावड़ी, असंध के अलावा कैथल-पूंडरी इत्यादि स्थानों से भी कचरा आना था, लेकिन अब नए प्रोजेक्ट में शहर के अलावा जिले के कस्बों का ही कचरा आएगा। करनाल को कलस्टर बनाया जाएगा।

अब इस प्रोजेक्ट को वेस्ट टू एनर्जी के तौर पर तैयार किया जाएगा, जिसकी प्रतिदिन की सोलिड वेस्ट मैनेजमेंट की क्षमता 500 टन प्रतिदिन होगी। शहरी स्थानीय निकाय निदेशालय ने इस प्रोजेक्ट को अप्रूव कर दिया है।  

कचरे से जमीन को खाली कराया जाएगा : एलसी चौहान
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट को अपग्रेड करने के प्रोजेक्ट में फेरबदल किया गया है। अब करनाल को ही कलस्टर बनाया जाएगा, जहां पर शहर के अलावा निसिंग, नीलोखेड़ी, तरावड़ी, घरौंडा, असंध आदि स्थानों से कचरा प्लांट में पहुंचेगा। इसलिए प्लांट की क्षमता अब 500 टन कचरा प्रतिदिन की होगी। इस प्रोजेक्ट को शहरी स्थानीय निकाय निदेशालय ने अप्रूव्ड कर दिया है।

जब तक यह तैयार होगा तब तक वर्तमान में चल रहे टेंडर को रिन्यू किया जाएगा। इसके अलावा एनजीटी के निर्देशों के अनुसार प्लांट पर पड़े 85000 टन कचरे के प्रबंधन के लिए आने वाले दो सप्ताह में टेंडर लगाया जाएगा। कचरे से जमीन को खाली कराया जाएगा। एलसी चौहान, एक्सईएन, नगर निगम करनाल।

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