किसान आंदोलन समझौते के क्रेडिट पर झींडा-चढूनी आमने-सामने:HSGPC के पूर्व प्रधान बाेले-पर्दे के पीछे रहकर मैंने करवाया समझौता, चढूनी का जवाब- आए हाय, इन गंदे लोगों का मैं क्या करूं

करनालएक महीने पहले
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हरियाणा के करनाल में किसान आंदोलन के दौरान ACS की अगुवाई वाली प्रशासनिक टीम से हुए समझौते के क्रेडिट को लेकर HSGPC पूर्व प्रधान जगदीश झींडा और भाकियू हरियाणा अध्यक्ष गुरनाम चढूनी आमने-सामने आ गए। सोमवार को पहले झींडा ने डेरा कार सेवा से ऐलान किया कि पर्दे के पीदे रहकर उन्होंने सभी पक्षों से बातचीत कर समझौता करवाया। उनके इस ऐलान पर चढूनी ने टिप्पणी करते हुए गंदे लोग बताया। इसके जवाब में झींडा ने भी भाकियू नेता पर आरोप जड़े।
झींडा हीरो बनना चाहता है : चढूनी
जगदीश झींडा के ऐलान के बाद चढूनी ने दैनिक भास्कर से विशेष बातचीत में कहा कि, ''आए हाय, इन गंदे लोगों का क्या करूं। झींडा इस मामले में हीरो बनना चाहते हैं। जो न वार्ता में, न ऐलान में शामिल, फिर भी समझौते का श्रेय लेना चाहते हैं। मैं उन्हीं से बात करूंगा।''

झींडा बोले- चढूनी लड़ना चाहता है चुनाव, बेईमान आदमी
HSGPC के पूर्व प्रधान झींडा ने जवाब में कहा कि चढूनी से कहता हूं कि हरमंदिर साहिब गुरुद्वारा में चले जाते हैं। चढूनी से पूछकर ही सरकार से बातचीत की थी। साथ ही कहूंगा कि जो मैंने बयान किया, उसकी एक भी बात 1 परसेंट झूठी नहीं है। चढूनी इलेक्शन लड़ना चाहता है। बेईमान है और लोग कह रहे हैं कुछ लेकर समझौता कर गया।
कहा- किसानों का नुकसान न हो इसलिए करवाया समझौता
डेरा कार सेवा करनाल में हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (HSGPC) के पूर्व प्रधान जगदीश सिंह झींडा ने कहा कि वे किसानों के आंदोलन को खत्म करवाना चाहते थे। 7 सितंबर और 8 सितंबर की वार्ता में जब बात नहीं बनी तो शाम को समझौता करवाने का मन बनाया ताकि किसानों का नुकसान न हो। 1970 सेे भारतीय किसान यूनियन में 14 साल काम किया। पता है कि किसानांे का समझौता कैसे करवाना है। घर से गुरुनानक देव के सामने बोला कि जब तक समझौता नहीं होगा वापस नहीं आउंगा।

किसानों ने करनाल सचिवालय पर धरने की शुरुआत राष्ट्रगान से की थी। (फाइल फोटो)
किसानों ने करनाल सचिवालय पर धरने की शुरुआत राष्ट्रगान से की थी। (फाइल फोटो)

झींडा का दावा- एमसी बलविंद्र के घर हुई चढूनी से बात
करनाल आने के बाद भाजपा नेताओं से बात कर सीएम से संपर्क साधा और उनका पक्ष जाना। फिर गुरनाम सिंह चढूनी से करनाल में बलविंद्र सिंह एमसी के घर पर आधा घंटा बात करके तैयार किया। इसके बाद डीसी के पास सचिवालय में गए और सभी पक्षों को समझौते के लिए राजी किया। इसका परिणाम ये हुआ कि कुछ किसानों ने अपनी मांगों को बदला व कुछ सरकार झुकी और आखिरकार समझौता हो गया।

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