हरियाणा के करनाल में किसान आंदोलन:सचिवालय पर डटे रहेंगे किसान, टिकैत बोले- अफसरों को गेट से अंदर नहीं जाने देंगे, वे चाहें तो दीवार कूद कर चले जाएं

करनालएक महीने पहले
करनाल में लघु सचिवालय के बाहर डटे किसान। बुधवार के दिन की शुरुआत किसानों ने जय किसान नारे से की।

हरियाणा के करनाल में किसान नेताओं और पुलिस-प्रशासनिक अफसरों के बीच सवा तीन घंटे चली वार्ता विफल हो गई। बातचीत में सहमति नहीं बन पाई। इस दौरान दो दौर में बातचीत हुई। पहले दौर की वार्ता में डीसी-एसपी ने प्रशासनिक टीम का नेतृत्व किया और दूसरे दौर में रेंज कमिश्नर की अगुवाई में प्रशासन ने बातचीत की।

भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने मीटिंग से बाहर निकल कर कहा कि प्रशासनिक टीम ने हर आधे घंटे बाद चंडीगढ़ बात की। हमारी मांग थी कि IAS आयुष सिन्हा को सस्पेंड कर केस दर्ज किया जाए। प्रशासनिक टीम केस दर्ज करना तो दूर सस्पेंड करने के लिए भी तैयार नहीं है। टिकैत ने कहा कि हमारा एक मोर्चा दिल्ली बॉर्डर पर है और अब दूसरा करनाल सचिवालय पर जारी रहेगा।

आम आदमी का पूरा ख्याल रखेंगे

प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसान नेताओं ने कहा कि जिला सचिवालय पर किसान डटे रहेंगे। अफसरों को मुख्य गेट से नहीं जाने देंगे, वे चाहे किसी रास्ते या फिर दीवार कूद कर सचिवालय के भीतर जाएं। इस बात का विशेष ध्यान रखा जाएगा कि यहां आने वाले आम आदमी को किसी प्रकार की परेशानी न आए। प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसान नेता राकेश टिकैत, गुरनाम चढूनी और योगेंद्र यादव ने किसानों का पक्ष रखा।

बातचीत से समाधान का प्रयास जारी
उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने कहा कि बातचीत से इस मसले का समाधान निकालने का प्रयास जारी है। आंदोलनकारी लाठीचार्ज करवाने वाले अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग पर अड़े हैं। बिना जांच के कोई कार्रवाई नहीं होगी। आंदोलनकारियों ने बैठक में आश्वासन दिया कि वह धरने को शांतिपूर्ण तरीके से चलाएंगे। उनका मकसद अपनी मांग को मनवाना है न कि कोई उपद्रव करना। प्रशासन भी धैर्य, संयम व सूझबूझ से काम ले रहा है।

किसान नेताओं से बातचीत करते डीसी और एसपी।
किसान नेताओं से बातचीत करते डीसी और एसपी।

प्रशासन की तरफ से न्यौता मिलने के बाद राकेश टिकैत, गुरनाम चढूनी, योगेंद्र यादव और सुरेश कौथ समेत 11 किसान नेता प्रशासन से वार्ता के लिए पहुंचे थे। पुलिस-प्रशासनिक अफसरों के साथ किसान नेताओं की बातचीत हुई। प्रशासन ने धरने पर बैठे किसानों को दोपहर 2 बजे वार्ता के लिए बुलाया था। इससे पहले किसानों ने बुधवार को निर्मल कुटिया और जाट भवन होकर सचिवालय जाने वाले रास्ते पर लगाए बैरिकेड हटवा दिए। हजारों किसान बसताड़ा टोल पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में सचिवालय का घेराव कर धरने पर बैठे हैं।

जिला प्रशासन ने बुधवार को GT रोड से सचिवालय जाने वाले रास्ते पर निर्मल कुटिया के पास फिर बैरिकेडिंग कर दी थी। साथ ही जाट भवन होकर सचिवालय जाने वाले मार्ग पर भी अवरोधक लगा दिए थे। बुधवार सुबह से दोनों रास्ते खुले थे। प्रशासन के आदेश पर 11 बजे के बाद यहां बैरिकेडिंग हुई थी। बैरिकेडिंग की सूचना पर किसान मौके पर पहुंचे और पुलिस से नाके खोलने के लिए कहा। इसके बाद दोनों जगह से ट्रक और बैरिकेड को हटा दिया गया।

जाट भवन गेट से सचिवालय जाने वाले रास्ते पर लगे थे बैरिकेड और खड़ा किया था ट्रक।
जाट भवन गेट से सचिवालय जाने वाले रास्ते पर लगे थे बैरिकेड और खड़ा किया था ट्रक।

उधर, किसान मंगलवार की पूरी रात बैठे रहे। बुधवार के दिन की शुरुआत भी नारेबाजी के साथ की। धरनास्थल पर किसानों ने टेंट गाड़ लिए हैं। यह उनका अनिश्चितकालीन धरना है। लघु सचिवालय के गेट पर पैरामिलिट्री फोर्स और पुलिस के जवान तैनात हैं। इन्हें किसानों को किसी भी कीमत पर अंदर न जाने देने के आदेश दिए गए हैं। किसानों ने भी सचिवालय में आवाजाही रोकी हुई है। उनका कहना है कि वे न तो किसी को अंदर जाने देंगे और न ही कोई काम होने देंगे। शहर में आवाजाही सुचारू रूप से बहाल कर दी गई है। अब किसी को कहीं आने-जाने में दिक्कत नहीं होगी, लेकिन लघु सचिवालय न आने की अपील की गई है, क्योंकि यहां होने वाले सभी काम बाधित हो सकते हैं।

करनाल में साथियों की लाठियां गाड़ी में रखता पुलिस कर्मचारी।
करनाल में साथियों की लाठियां गाड़ी में रखता पुलिस कर्मचारी।

दरअसल, किसानों ने किसी भी अधिकारी को लघु सचिवालय में प्रवेश न करने देने का ऐलान किया है। उधर, प्रशासन की तरफ से भी अभी तक आमजन व कर्मचारियों के कामकाज को लेकर कोई दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए हैं। लघु सचिवालय में बने कार्यालयों में रोजाना 5000 लोग पहुंचते हैं, लेकिन अपील है कि सचिवालय के कामकाज के लिए जरूरी न हो तो आज न आएं।

लघु सचिवालय में हैं ये कार्यालय
लघु सचिवालय में डीसी, एसपी, एसडीएम, ई-दिशा केंद्र, सीएम विंडो, तहसील, ट्रेजरी, एडीसी, डीआरओ, डीडीपीओ, डीईओ, निर्वाचन आयोग, श्रमिक कार्यालय हैं। इसके अलावा बैंक, समाज कल्याण, जिला कल्याण, और रोजगार विभाग भी हैं।

किसानों ने लघु सचिवालय के सामने सड़क पर बैठकर आवाजाही रोकी हुई है।
किसानों ने लघु सचिवालय के सामने सड़क पर बैठकर आवाजाही रोकी हुई है।

लकड़ियों से बनाई अंगार, सुलगाई चिलम

  • सुबह 7 बजे सचिवालय के चारों तरफ किसान व पुलिस कर्मचारी-अधिकारी टहल रहे थे। जगह-जगह टोलियों में बैठे किसानों के हाथों में चाय की प्याली थी।
  • कई किसानों ने तो लकड़ियों में आग लगाकर अंगार तैयार करके चिलम भी सुलगा ली। कहीं चाय तो कहीं हुक्का पर चर्चा चल रही है।
  • एक बड़ा झुंड जय किसान, भारतीय कियान यूनियन जिंदाबाद और किसान विरोधी नारेबाजी कर रहा है।
  • पैरामिलिट्री फोर्स के साथ-साथ पुलिस की टुकड़ी गेट पर तैनात है, जो केवल किसानों को अंदर जाने से रोकने के लिए खड़ी है।

करनाल में इंटरनेट सेवा बंद, बाकी बहाल
प्रदेश सरकार द्वारा इंटरनेट सेवा को करनाल में 8 सितंबर के दिन भी बंद रखने का ऐलान किया गया है। जबकि बाकी सभी जिलों की इंटरनेट सेवा को बहाल कर दिया गया है। 7 सितंबर के किसान आंदोलन को देखते हुए करनाल के साथ-साथ कैथल, कुरुक्षेत्र, पानीपत व जींद जिले की इंटरनेट सेवा पर पाबंदी लगा दी गई थी।

किसानों ने लकड़ियों में आग लगाकर अंगार तैयार करके चिलम सुलगाई। अब कहीं चाय तो कहीं हुक्का पर चर्चा चल रही है।
किसानों ने लकड़ियों में आग लगाकर अंगार तैयार करके चिलम सुलगाई। अब कहीं चाय तो कहीं हुक्का पर चर्चा चल रही है।

क्यों कर रहे किसान आंदोलन और अब तक क्या हुआ?
28 अगस्त को पुलिस ने बसताड़ा टोल प्लाजा पर किसानों पर लाठीचार्ज किया था। पुलिस लाठीचार्ज में घायल हुए करनाल के रायपुर जाटान गांव के किसान सुशील काजल की मौत हो गई थी। इसके विरोध में किसानों ने 7 सितंबर को करनाल अनाज मंडी में महापंचायत की। 30 अगस्त को भाकियू ने घरौंडा अनाज मंडी में महापंचायत करके हरियाणा सरकार से तीन मांगें रखी थीं। साथ ही महापंचायत और लघु सचिवालय का घेराव करने की घोषणा की थी। 6 सितंबर को प्रशासन ने बातचीत के लिए किसानों को बुलाया, लेकिन बात नहीं बनी।

मंगलवार को महापंचायत हुई और किसानों का जमावड़ा देखते हुए संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं को प्रशासन ने बातचीत का न्योता भेजा। दोपहर में राकेश टिकैत, गुरनाम चढ़ूनी, योगेंद्र यादव व दर्शनपाल आदि के नेतृत्व में 15 सदस्यीय कमेटी लघु सचिवालय पहुंची। 3 दौर की वार्ता के दौरान किसान नेता सिर फोड़ने का आदेश देने वाले तत्कालीन एसडीएम आयुष सिन्हा के निलंबन पर अड़ गए, लेकिन सरकार इसके लिए तैयार नहीं हुई। इसके बाद बलबीर सिंह राजेवाल के आदेशों के बाद किसानों ने लघु सचिवालय की ओर कूच किया।

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