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लापरवाही:सरकार का सबसे ज्यादा चावल करनाल-घरौंडा में पेंडिंग, जिले में 11.42 लाख क्विंटल अटका

करनाल2 महीने पहले
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करनाल. राइस मिल स्टॉक की फिजिकल वेरिफिकेशन करती टीम। फाइल फोटो
  • करोड़ों के चावल डूबते देखकर अब सरकार को देना पड़ा 31 अगस्त तक का टाइम, मिलों में स्टॉक चेक करने के लिए बनाई गई निगरानी कमेटियां भी ऑफिस में बैठकर ही स्टॉक दिखाते गए पूरा

सरकारी धान में गड़बड़ी करने में जिम्मेदार खरीद एजेंसियों की गंभीर लापरवाही सामने आई है। उन्होंने राइस मिलों पर निगरानी ही नहीं रखी, जिनको सीएमआर के लिए धान दी हुई थी। ऑफिस में बैठकर संबंधित अधिकारी कागजों में स्टॉक पूरा दिखाते गए। अब अंतिम चरण में फिजिकल वेरिफिकेशन हुई तो उसमें सामने आया कि मिलों में धान का स्टॉक ही नहीं है। ऐसे में सरकार को चावल कैसे उपलब्ध करवाएंगे।

मिलर्स अधिकारियों की मिलीभगत से दूसरे राज्य का चावल सरकार को सौंप देते हैं। 77 में से 21 राइस मिलों में तो स्टॉक बहुत ही कम मिला है। ऐसे में चावल उपलब्ध करवाना चुनौती बन गया है। सरकार ने स्थिति को समझते हुए मिलरों को 31 अगस्त तक का टाइम दे दिया है।

जो धान का 67 प्रतिशत चावल उपलब्ध करवाएं। मिलरों के साथ उन अधिकारियों की जबावदेही हाेनी चाहिए जाे धान अलाॅट करते हैं। ऐसा करने से गड़बड़ी नहीं हाेगी। सीजन के समय खरीद एजेंसियों के इंस्पेक्टर ही ज्यादा धान अलाॅट करते हैं और हर गड़बड़ी में शामिल हाेते हैं।

खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार जिले में सबसे अधिक चावल का बकाया करनाल सेंटर पर ही है। इसके बाद घरौंडा सेंटर भी टाइम पर चावल की गाड़ियां नहीं लगी। इन दो सेंटरों पर सबसे ज्यादा राइस मिलरों ने लापरवाही बरती है।

जिम्मेदारों पर नहीं होती कार्रवाई, निष्पक्ष जांच की जरूरत
जिले में 27 राइस मिलें पहले ही डिफॉल्टर चल रही हैं। अब 21 मिलरों पर और तलवार लटक गई है। जो मिल डिफॉल्टर होती हैं उसके अनुसार खरीद एजेंसी जिम्मेदार हैं। उसके अधिकारी और जिन इंस्पेक्टरों को स्टॉक का इंचार्ज बनाया गया था उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती। इसमें निष्पक्ष जांच करने की जरूरत है। यदि विभाग का फॉल्ट है तो रिकवरी की गाज भी संबंधित अधिकारी और स्टॉक इंचार्ज से करनी चाहिए। अधिकारियों में जब डर होगा तभी धान घोटाला रुक सकता है। एक-एक मंडी में दो इंस्पेक्टर-सब इंस्पेक्टरों को लगाते हैं। बावजूद इसके स्टॉक की निगरानी नहीं रख पाते।

चावल उपलब्ध करवाने को टाइम-टू टाइम पत्र जारी करते हैं
राइस मिलों को चावल उपलब्ध करवाने के लिए टाइम-टू टाइम पत्र जारी करते हैं। स्टॉक भी चेक करते हैं। बार-बार टाइम देने के बाद जो मिलें चावल उपलब्ध नहीं करवाती उन पर विभागीय कार्रवाई के साथ कानूनी कार्रवाई करवाते हैं। जो मिल डिफॉल्टर होता है, उस पर जो इंचार्ज लगाया हुआ था उसको दोबारा से परचेज पर नहीं लगाते हैं। इसमें संबंधित अधिकारी, इंचार्ज या कमेटी की जवाबदेही होती है। -निशांत राठी, डीएफएससी करनाल।

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