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हॉकी में बेटियों की हार नहीं, यह जीत है:कप्तान रानी रामपाल के पिता ने कहा- इसे हार नहीं मानूंगा, गुरजीत की मां बोलीं- जो हुआ रब की मर्जी

करनाल4 महीने पहले

टोक्यो ओलिंपिक में भारतीय महिला हॉकी टीम ब्रॉन्ज मेडल मैच में ग्रेट ब्रिटेन से हार गई है। ब्रिटेन ने भारत को 4-3 से हराया। भारतीय टीम ने दूसरे क्वार्टर में 3-2 की बढ़त बना ली थी, लेकिन इस बढ़त को टीम कायम नहीं रख सकी। वहीं, टीम की हार से खिलाड़ियों के परिवार मायूस नहीं हैं, बल्कि बेटियों के प्रदर्शन से संतुष्ट हैं। उन्हें शानदार खेल के लिए शाबाशी दे रहे हैं।

भारतीय टीम ने दूसरे क्वार्टर में 4 मिनट में 3 गोल किए
पहले क्वार्टर में मुकाबला 0-0 की बराबरी पर रहा। दूसरे क्वार्टर में ब्रिटेन ने दो गोल किए। पहले क्वार्टर में ब्रिटेन को दो पेनल्टी कॉर्नर मिले, पर भारतीय गोलकीपर सविता पूनिया ने दोनों को बेकार कर दिया। ब्रिटेन की एली रायर ने 16वें मिनट और सारा रॉबर्टसन ने 24वें मिनट में गोल कर ब्रिटेन को 2-0 की बढ़त दिला दी।

2-0 से पिछड़ने के बाद भारतीय टीम ने दूसरे क्वार्टर में ही जबरदस्त वापसी की और 4 मिनट के अंदर 3 गोल दागे। गुरजीत कौर ने 25वें और 26वें मिनट में गोलकर पहले स्कोर 2-2 से बराबर किया। वंदना कटारिया ने 29वें मिनट में गोलकर टीम इंडिया को 3-2 की लीड दिला दी।

तीसरे क्वार्टर में ब्रिटेन की पियर्ने वेब ने 35वें मिनट में गोल कर स्कोर 3-3 से बराबर कर दिया था। चौथे और आखिरी क्वार्टर में ब्रिटेन ने चौथा गोल दागकर 4-3 की बढ़त बना ली है। 48वें मिनट में बाल्सडन ने गोल दागा। ब्रिटेन ने आखिर तक यह बढ़त बनाए रखी और मैच जीत लिया।

ब्रिटेन के खिलाफ मैच के दौरान भारतीय महिला हॉकी टीम की खिलाड़ी।
ब्रिटेन के खिलाफ मैच के दौरान भारतीय महिला हॉकी टीम की खिलाड़ी।

कप्तान रानी के पिता रामपाल बोले...
इस हार को मैं हार नहीं कहूंगा। बेटियों का प्रदर्शन स्वागत योग्य है। बेटियां ने मैदान पर खूब पसीना बहाया है। वे यहां तक पहुंची, बहुत बड़ी बात है। इस खेल को देखने के बाद बेटियों को कुछ कहना, मुश्किल है। ऐसा खेल देखकर तो खिलाड़ियों का स्वागत करना बनता है। भले ही टीम मेडल से चूक गई, पर इसे हम हार नहीं कह सकते। कई दिग्गज टीमों को हराने के बाद लौट रहीं खिलाड़ियों का स्वागत होना चाहिए। हमें बेटियों पर नाज है। मेडल की कसर वे आगे भविष्य में पूरा कर देंगी। ऐसा तो नहीं कि यह आखिरी ओलिंपिक है।

कप्तान रानी रामपाल के माता-पिता।
कप्तान रानी रामपाल के माता-पिता।

जो हुआ रब की मर्जी है
हार से ड्रैग फ्लिकर गुरजीत कौर के घर में मायूसी छा गई है। पिता और भाई टीवी के आगे से उठकर अंदर चले गए। गुरजीत कौर की मां हरजिंदर कौर घर में इकट्‌ठे हुए लोगों को चाय नाश्ता कराने में व्यस्त थीं तो उन्होंने बीच में मैच के बारे में पूछने पर कहा कि जो हुआ, रब की मर्जी है। टीम शानदार खेली। गुरजीत ने दो गोल किए। हर खिलाड़ी बस अच्छा खेल दिखाने के लिए ही मैदान में उतरता है। मुकाबले में या तो हार होती है या जीत तो कोई बात नहीं, अगली बार बेटियां मेडल जरूर लेकर आएंगी।

गुरजीत कौर की मां हरजिंदर कौर चाय नाश्ता बनाती हुईं।
गुरजीत कौर की मां हरजिंदर कौर चाय नाश्ता बनाती हुईं।

मेहनत की थी, तभी मैदान में रो पड़ी खिलाड़ी
नवनीत के पिता बूटा सिंह का कहना है कि चारों क्वार्टर मैचों में एक भी मैच ऐसा नहीं था, जब दोनों टीमों ने अपना प्रदर्शन न किया हो। भारतीय टीम डटकर खेली, ब्रिटेन की बेटियों ने भी अच्छा खेला। दोनों टीमों ने हर पॉइंट बारीकी से देखा। मेहनत के बाद मिली हार के कारण ही मैदान के बीच में बेटियां रो पड़ीं, लेकिन हमें अच्छा नहीं लगा। खिलाड़ियों के रोने से पता चलता है कि उन्होंने कितनी मेहनत की होगी। उन्हें तो यहां तक पहुंचने और शानदार प्रदर्शन से खुश होना चाहिए। प्रतियोगिता है, हार या जीत ही होती है। एक जीतेगा, दूसरा हारेगा।

नवनीत कौर के पिता बूटा सिंह और परिजन।
नवनीत कौर के पिता बूटा सिंह और परिजन।

टीम में दिखा तालमेल, मेहनत और लगन
नवजोत कौर के पिता सतनाम सिंह का कहना है कि आज पूरा देश बेटियों के साथ मैदान पर रहा। सभी को जीत की उम्मीद अंतिम क्षण तक थी। स्थिति ऐसी रही कि वे बैठकर मैच नहीं देख पाए। कभी बाहर जाते तो कभी टीवी के सामने बैठ जाते। एक गोल पर उम्मीद जीत की बनी तो ब्रिटेन के गोल से चिंता शुरू हो जाती। होना तो वही था, जो रब को मंजूर था। हार-जीत तो गेम का एक पहलू है। इस मैच में खिलाड़ियों का तालमेल, मेहनत और लगन खूब दिखी। इसलिए इसे हार नहीं कह सकते, हार कर भी वे जीत गईं। हमें उन पर नाज है, मेडल आगे आ जाएगा।

नवजोत कौर के पिता सतनाम सिंह।
नवजोत कौर के पिता सतनाम सिंह।

मायूसी तो है, लेकिन टीम के बेहतर प्रदर्शन से खुशी है
गोलकीपर सविता पूनिया के पिता महेंद्र सिंह पूनिया ने कहा कि मैच में मिली हार के कारण हर देशवासी मायूस है, लेकिन हार-जीत खेल का हिस्सा है। भारत की टीम ने मेहनत की थी इसी कारण से वह इतना आगे तक पहुंच पाई है। टीम ओलिंपिक में जरूर हार गई है, लेकिन ये खुशी है कि आज भारत के पास महिला हॉकी की एक मजबूत टीम है, जो अन्य मुकाबलों में आगे अपना बेहतर प्रदर्शन करेगी। सविता पूनिया ने आज के मैच में 2 गोल रोककर अच्छा प्रदर्शन किया।

मैच देखते सविता पूनिया के परिजन।
मैच देखते सविता पूनिया के परिजन।

पूरे परिवार का मान बढ़ाया है
भिवानी के गांव नांगल निवासी उदिता दुहन की मां गीता देवी ने बताया कि उदिता बड़े हौंसले के साथ खेलने गई थी। ओलिंपिक में मेडल नहीं मिल पाना दुख की बात तो है, लेकिन पूरी टीम ने आखिर तक संघर्ष किया। कहीं भी भारत की टीम कमजोर नहीं दिखाई दी। पहली बार सेमीफाइनल में पहुंची टीम की एक पॉइंट से हार, जीत के समान ही है। गीता देवी के अनुसार, उदिता ने पूरे परिवार का मान बढ़ाया है और वह आज हमारी पहचान है।

मैच देखने के बाद उदिता दुहन का परिवार खुश।
मैच देखने के बाद उदिता दुहन का परिवार खुश।

हमारी बेटी वर्ल्ड लेवल तक पहुंची, बड़े गर्व की बात
गांव कैमरी निवासी खिलाड़ी शर्मिला गोदारा के पिता सुरेश गोदारा ने कहा कि बेटियों ने पूरी हिम्मत और जोश से बड़ी-बड़ी टीमों का मुकाबला किया। पहले ही चांस में भारत की टीम सेमीफाइनल तक पहुंच गई। हालांकि, कुछ कमियां भी रहीं, जिनके लिए और मेहनत करनी पड़ेगी, लेकिन उनको खुशी है कि एक साधारण से खेतीबाड़ी वाले परिवार में पैदा होकर उनकी बेटी आज वर्ल्ड लेवल पर पहुंच गई है। उनकी बेटी ने अपना और परिवार का जो नाम चमकाया है, वह उनके लिए सबसे बड़ा अवॉर्ड है। वहीं मां ने कहा कि मेरी दुआ काम नहीं आई।

शर्मिला गोदारा के परिजन मैच देखते हुए।
शर्मिला गोदारा के परिजन मैच देखते हुए।

रीना खोखर के पिता बोले- बेटियों ने खेली दमदार हॉकी

रीना खोखर के पिता जसपाल सिंह ने कहा कि यह हार नहीं है, देश की बेटियों ने आखिरी सांस तक ग्रेट ब्रिटेन से जिस दमदारी से लड़ी हैं और उन्हें भारत की ताकत को बताई है, इसके लिए महिला हॉकी टीम को आने वाले समय में इतिहास याद रखेगा। आगे कहा कि बेटियों ने मैदान पर खूब पसीना बहाया है। जिसकी बदौलत यहां तक टीम पहुंची है। ऐसे खेल के लिए पूरा भारत खिलाड़ियों का स्वागत करेगा। भले ही खिलाड़ी मेडल से चूके हों, पर इसे हम हार नहीं कह सकते। कई दिग्गज टीमों को हराने के बाद लौट रही खिलाड़ियों का पूरा स्वागत करेगा। रही बात मेडल की तो उस कसर को आगे पूरा कर लिया जाएगा।

रीना खोखर के परिजन मैच देखते हुए।
रीना खोखर के परिजन मैच देखते हुए।

एक्साइटमेंट और नर्वसनेस में मोनिका मलिक के परिवार ने नहीं देखा मैच

मोनिका मलिक के परिवार के किसी भी सदस्य ने एक्साइटमेंट और नर्वेसनेस के चलते मैच नहीं देखा। मीडिया वालों से ही वह बीच-बीच में स्कोर पूछ लेते थे। जब भारतीय टीम ब्रॉन्ज नहीं जीत पाई तो मोनिका के परिवार के सदस्य कुछ सेकेंड्स के लिए चुप जरूर हो गए पर फिर बोल-छोरियां खेली तो खूब हैं। मोनिका के पिता जो मैच से पहले, मैच के दौरान इंडियन टीम के लिए पूजा करते रहे, वे मैच के बाद फिर से हाथ जोड़कर पूजा करने लगे। ये पूजा अगले ओलिंपिक में भारतीय टीम की जीत के लिए थी।

बातचीत में मोनिका के पिता तकदीर सिंह ने कहा कि मैच से पहले गुरुवार को ही उनकी मोनिका से बात हुई थी। तब मोनिका ने कहा था कि वह अपना 100 प्रतिशत देगी। मैंने भी यही कहा था कि बेटा अच्छे से खेलना। मोनिका की भाभी अनु मलिक ने कहा कि सभी खिलाड़ियों की कोशिश अच्छी रही। मोनिका के भाई आशीष का कहना था कि भारतीय महिला खिलाड़ियों के लिए ये एक अच्छी शुरुआत है। पहली बार ओलिंपिक में भारतीय महिला टीम सेमीफाइनल तक पहुंची थी। आज लड़कियां पूरे जज्बे के साथ लड़ी हैं। परफॉर्मेंस सभी की अच्छी रही है। इनके हौसले देखकर और लड़कियां भी प्रेरित होंगी और हॉकी को ऑप्ट करेंगी।

मोनिका मलिक के पिता बेटी की जीत के लिए अरदास करते हुए।
मोनिका मलिक के पिता बेटी की जीत के लिए अरदास करते हुए।