उठान का संकट:खरीदा धान 72 घंटे में भी मिलों तक नहीं पहुंचा तो बंद की खरीद, किसान नाराज

करनाल12 दिन पहले
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करनाल. मंडी में उठान न होने से दुकानों के बाहर पड़े धान से भरे कट्‌टे। - Dainik Bhaskar
करनाल. मंडी में उठान न होने से दुकानों के बाहर पड़े धान से भरे कट्‌टे।
  • राइस मिलरों की करनाल में हुई मीटिंग, बोले- एक दिन में उठान नहीं तो खरीद नहीं
  • करनाल मंडी में दो लाख बोरी वाहनों में लोड और दो लाख बोरी मंडी में पड़ा है धान

जिले की अनाज मंडियों में उठान न होने से दोबारा से व्यवस्था बिगड़ गई है और मिलर्स ने खरीद बंद कर दी है। उनका कहना है कि खरीद के 72 घंटे के बाद भी उनके मिलों तक धान नहीं पहुंच रहा है। ऐसे तो धान सड़ जाएगा और 67 प्रतिशत चावल सरकार को देना मुश्किल होगा और उनको नुकसान होगा। वे यह नुकसान उठाने को तैयार नहीं हैं।

उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि खरीदे गए धान का एक दिन में उठान नहीं हुआ तो सरकार का पूरा माल भी छोड़ देंगे। सरकार की तरफ से अधूरी प्लानिंग के कारण मिलर्स से लेकर आढ़ती व किसान सभी परेशान हैं। जिले की मंडियों में 54 हजार 312 मीट्रिक टन धान खरीदा जा चुका है। मिलर्स द्वारा खरीद बंद करने के बाद खरीद एजेंसियों की टेंशन बढ़ गई है। क्योंकि खरीद एजेंसियांे के भरोसे किसानों का माल नहीं खरीदा जा सकता है। इससे किसान सरकार के खिलाफ रोष जाहिर कर रहे हैं।

हरियाणा राइस मिलर्स एसोसिएशन करनाल के प्रधान विनोद गोयल ने बताया कि किसान गेटपास से ही मंडी में आ रहा है। वही माल वापस मिलों में जा रहा है। इसमें गड़बड़ की कोई गुंजाइश नहीं है, लेकिन सरकार समझती है कि मिलर्स इसमें गड़बड़ कर सकते हैं। मिलर्स का कारोबार ही बदनाम कर दिया है।

मंडी से मिलों तक माल लेकर जाने में ऑनलाइन गेट पास अनिवार्य कर दिया है। पोर्टल या साइट चलती नहीं है। स्लो स्पीड चलती है। इस कारण उनका माल 48 से 72 घंटे के बाद भी मिलों तक नहीं पहुंच पाया। प्रशासनिक अधिकारियों के सामने परेशानी रख चुके हैं, कोई समाधान नहीं हुआ।

इसलिए मजबूर होकर जिलेभर के मिलर्स ने खरीद बंद करने का फैसला लिया है। दोबारा खरीद तभी करेंगे जब मंडी में खरीदा हुआ माल मिलों तक पहुंच जाएगा। खरीद एजेंसियाें को कह चुके हैं कि वह 17 प्रतिशत नमी वाला धान मिलों तक पहुंचा सकते हैं। इस स्थिति में मिलर्स मंडी में खरीद करने नहीं जाएगा। जिलेभर के मिलर्स की मीटिंग होटल में हुई है। जिसमें यह निर्णय लिया है।

मंडियों में व्यवस्था नहीं, ऑनलाइन प्रक्रिया जटिल

राइस मिलरों का कहना है कि मंडियों में कोई तैयारी नहीं है। अधिकारी चंडीगढ़ से ऑर्डर पास करते हैं, लेकिन धरातल पर कुछ नहीं है। स्टाफ का टोटा है। पोर्टल स्लो है। ऑनलाइन प्रक्रिया को जटिल कर दिया है, लेकिन सुविधाएं कुछ नहीं है। किसानों ने भी रोष जताया है।

वेयरहाउस के अधिकारी के साथ किसान की हुई बहस

मंडी में सीजन पीक पर है, लेकिन हैफेड और वेयर हाउस एजेंसी के अधिकारी मंडी में नहीं है। मिलर्स मनमाना रेट लगाकर किसानों को परेशान कर रहे हैं। किसान दीपक ने कहा कि दो दिन से वेयरहाउस को आढ़ती फोन कर रहा है। वह मिलर्स के साथ सेटिंग करने को बोल रहे हैं। वेयर हाउस से ड्यूटी पर तैनात सोनू दहिया के साथ किसानों की बहस भी हुई है।

अधिकारी बोले- व्यवस्था ठीक की जा रही है

धान के उठान में गेटपास का इश्यू बन गया था। स्पीड धीमी होने से गेटपास कटने में समय लग रहा था। दोपहर बाद काफी गेट पास कट गए। समस्या दोबारा नहीं आएगी।

अशोक रावत, डीएफएससी, करनाल।

खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की ओर से 55, हैफेड की ओर से 21 व वेयर हाउस ओर से 8 गाड़ियों के गेटपास कटे हैं। सभी दिक्कतों को ठीक किया जा रहा है।

-चंद्रप्रकाश, सचिव, मार्के कमेटी करनाल।

धान खरीद को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। अधूरी तैयारियों से किसान, आढ़ती, राइस मिलर्स सभी परेशान हैं। मंडियां धान से भरी हैं। न खरीद ठीक हो रही न उठान। ऐसा रहा तो माल खराब होगा।

रजनीश चौधरी, जिला प्रधान, करनाल अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन।

खरीद में वेयर हाउस, आपूर्ति विभाग पीछे

अब तक 54 हजार 312 मीट्रिक टन धान मंडियों में खरीदी गई है। सरकारी खरीद एजेंसी खाद्य एवं आपूर्ति विभाग द्वारा 34 हजार 023 मीट्रिक टन, हैफेड द्वारा 14 हजार 930 मीट्रिक टन, हरियाणा वेयर हाउसिंग द्वारा 5 हजार 359 मीट्रिक टन खरीदा गया। वेयर हाउस की टीम द्वारा मंडी में नहीं पहुंचने के कारण सबसे कम खरीद हो पा रही है।

असंध मंडी में 4400 मीट्रिक टन, घरौंडा में 11834 मीट्रिक टन, इंद्री में 4372 मीट्रिक टन, करनाल में 12 हजार 070 मीट्रिक टन, कुंजपुरा में 4682 मीट्रिक टन, निसिंग में 2518 मीट्रिक टन तथा तरावड़ी में 4922 मीट्रिक टन धान की खरीद की गई।

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