करनाल मेडिकल कॉलेज में यौन उत्पीड़न मामला:असंध के MLA गोगी बोले- छात्राओं पर शिकायत वापस लेने का दबाव, रिपोर्ट का इंतजार

रिंकू नरवाल, करनाल9 दिन पहले
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हरियाणा में करनाल के कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज में यौन उत्पीड़न मामले में अब पीड़ित छात्राओं पर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है। यह आरोप कोई दूसरा नहीं बल्कि असंध के विधायक शमशेर सिंह ने लगाया है। उन्होंने कहा कि ऐसा लग रहा है कि जांच हो ही नहीं रही है, बस खानापूर्ति हो रही है।

इतने संगीन मामले में कॉलेज प्रशासन की ये हरकत बर्दाश्त से परे हैं। फिर भी हम कमेटी को दिए गए 15 दिन के समय का इंतजार करेंगे। यदि पीड़ित छात्राओं को इंसाफ नहीं मिलता तो मामला विधानसभा में उठाया जाएगा। इसके साथ ही वह हर मंच पर मामले को उठाएंगे।

4 दिन पहले सामने आया था मामला
कॉलेज में यौन उत्पीड़न का मामला 4 दिन पहले सामने आया था। कमेटी कॉलेज में व्यवस्थाओं का दौरा करने आई थी। इसी दौरान छात्राओं ने कमेटी को कॉलेज के ओटी ट्रेनर पवन पर यौन उत्पीड़न का आरोप जड़ा था। कमेटी जिसमें असंध के विधायक शमशेर सिंह गोगी व सीमा त्रिखा भी शामिल थी, छात्राओं के आरोपों से वह सभी हैरान रह गए। तब आनन फानन में आरोपी OT ट्रेनर पवन को जबरन अवकाश पर भेज दिया। मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की गई।

लेकिन न तो अभी तक यह पता कि कमेटी में कौन कौन शामिल हैं। जांच क्या हो रही है, इस बारे में कॉलेज प्रशासन की ओर से कोई जानकारी नहीं दी जा रही है। पीड़ित छात्राओं पर इतना दबाव बनाया कि पहले वह आर पार की लड़ाई का दम भर रही थी, लेकिन अब मुंह खोलने को भी तैयार नहीं है। एक पीड़ित छात्रा ने बताया कि उन्हें डर सता रहा है कि यदि इस तरह की बात उनके घर तक पहुंच गई तो परिवार के लोग पढ़ाई ही बंद करा देंगे।

जांच के लिए कॉलेज में पहुंची कमेटी की फाइल फोटो।
जांच के लिए कॉलेज में पहुंची कमेटी की फाइल फोटो।

विधायक तक को मामले की जानकारी नहीं दी जा रही है
हद तो यह है कि जिस विधायक के कहने पर कमेटी कॉलेज में जांच के लिए आई थी, अब असंध के उस विधायक तक को जांच के बारे में नहीं बताया जा रहा है। कॉलेज के डायरेक्टर ने सभी को फरमान जारी कर दिया गया कि कॉलेज से कोई भी इस संबंध में कुछ भी जानकारी मीडिया को नहीं देगा। विधायक ने बताया कि वह भी हैरान है कि आखिर यह जांच है किस तरह की। इतना संगीन मामला, जिसकी जांच सही होनी चाहिए, लेकिन यहां तो ऐसा लग रहा है कि बस खानापूर्ति हो रही है।

पहचान तक नहीं छुपाई जा रही पीड़ित छात्राओं की
होना तो यह चाहिए था कि शिकायत देने वाली पीड़ित छात्राओं की पहचान छुपाई जाती, लेकिन हो यह रहा है कि एक ही दिन आरोपी और पीड़ित छात्राओं से पूछताछ हो रही है। इससे जांच कमेटी पर भी सवाल उठ रहा है। इस तरह की जांच से लड़कियां घबरा रही है। उन्हें अब इस बात का डर सता रहा है कि उन्हें बाद में तंग किया जाएगा। इसलिए वह हिचकिचा रही हैं।

क्यों नहीं महिला एडवोकेट को शामिल किया गया
पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट की एडवोकेट और महिला अधिकार एक्टिविस्ट आरती अग्रवाल ने बताया कि यह सरासर गलत हो रहा है। ऐसा नहीं होना चाहिए। लड़कियों के बयान इस तरह से नहीं लिए जाने चाहिए। क्यों नहीं कमेटी में महिला एडवोकेट को शामिल किया गया। आरती अग्रवाल ने यह भी सवाल उठाया कि कॉलेज में क्यों यौन प्रताड़ना शिकायत निवारण समिति ने इस पर तुरंत एक्शन लिया। इसकी भी जांच होनी चाहिए। यौन प्रताड़ना शिकायत निवारण समिति में छात्राओं को शामिल किया गया या नहीं।

कन्या छात्रावास में सुरक्षा बढ़ाई
लड़कियों को सुरक्षा देने में फेल रहने वाला कॉलेज प्रशासन अब खासा मुस्तैद लग रहा है। कॉलेज के कन्या छात्रावास में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। बाहर से आने वाले प्रत्येक महिला-पुरुष से पूछताछ के बाद ही प्रवेश दिया जा रहा है। इधर, आरोप लगाने वाली छात्राओं को भी निदेशक कार्यालय की ओर से सुरक्षा देनी चाही, लेकिन छात्राओं ने सुरक्षा लेने से मना कर दिया। आपात स्थिति होने पर मदद के लिए मोबाइल नंबर दिए गए हैं।

साथ ही इन छात्राओं के मोबाइल नंबर भी अधिकारियों ने अपने फोन में दर्ज किए हैं। ताकि उनकी कॉल आने पर उसे तुरंत रिसीव किया जा सके। छात्राओं को निदेशक, डीन, पुलिस अधिकारी, चिकित्सा अधिकारी सहित यौन प्रताड़ना शिकायत निवारण समिति के सदस्यों के मोबाइल नंबर दिए गए हैं।

समिति के बढ़े अधिकार, नोटिस देकर जांच में करेंगे शामिल
विधानसभा कमेटी ने मामले की संवेदनशीलता समझते हुए मेडिकल कॉलेज की यौन प्रताड़ना शिकायत निवारण समिति को स्वतंत्र रूप से जांच करने के आदेश जारी किए हैं। समिति को यह भी अधिकार दिया गया कि मामले में जांच के लिए वह विभागाध्यक्ष, डॉक्टर व स्टाफ को पत्र देकर कभी भी पूछताछ के लिए तलब कर सकती है। जांच की कार्यवाही को प्रभावित करने वाले पर भी मामला दर्ज करवाने के भी पावर दी गई है।

जबरन छुट्टी सिर्फ दिखावा
आरोपी को सिर्फ जबरन छुट्टी पर भेजा, सस्पेंड क्यों नहीं किया गया। एडवोकेट आरती अग्रवाल ने बताया कि ऐसा लग रहा है कि कॉलेज प्रशासन पहले ही आरोपित को क्लीन चिट देने का मन बना चुका है। जबरन छुट्टी सिर्फ दिखावा है। इससे पीड़ित छात्राओं के मन में भय पनपना स्वाभाविक है।

कॉलेज की कमेटी कर रही जांच
कॉलेज प्रशासन यदि इतने संगीन मामले में संजीदा होता तो पहले ही कार्यवाही करता। अब जांच भी कॉलेज की कमेटी ही कर रही है। होना तो यह चाहिए कि आरोपी के खिलाफ तुरंत ही यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज किया जाए। इसके बाद जांच हो।

समिति 15 दिन में सौंपेगी जांच रिपोर्ट
कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज के मेडिकल अधीक्षक डॉ. हिमांशु मदान ने कहा समिति अपना कार्य कर रही है। हमारा समिति से अभी कोई लिंक नहीं है। समिति निदेशक को अगले 15 दिन बाद अपनी जांच रिपोर्ट सौंपेगी और जिसे निदेशक के माध्यम से विधानसभा कमेटी को सौंप दिया जाएगा। इसके बाद अंतिम निर्णय विधानसभा कमेटी ही लेगी।