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  • Karnal News, Even After 15 Days In The Case Of Karnal Paddy Scam, No Action Has Been Taken Against The Scamsters Of Gharaunda Mandi

करनाल में अपनों पर रहम गैरों को छोड़ा नहीं:धान घोटाला मामले में सियासत भी नहीं अछूती, 1 दिन की लापरवाही में कर्मचारी निलंबित

रिंकू नरवाल, करनाल3 महीने पहले
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हरियाणा के करनाल में में करोड़ों रुपए के धान का घोटाला करने वाले आरोपियों पर कार्रवाई करने में सियासत हावी दिखाई दे रही है। जिसके चलते लाखों रुपए की मंडी फीस और करोड़ों का धान गायब करने वालों का चेहरा अब तक बेनकाब नहीं हो सका। जबकि 1 दिन की लापरवाही में कर्मचारियों को ईमानदारी का पाठ पढ़ाने के नाम पर उन्हें निलंबित कर दिया गया।

ऐसा होना सिर्फ CM सिटी करनाल में ही संभव है तभी तो CM फ्लाइंग की जांच दिवाली गिफ्ट के साथ ठंडी पड़ गई और घरौंडा मंडी में मार्केटिंग मंडी बोर्ड अधिकारियों का निरीक्षण भी ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

मंडी में पड़ी धान की फाइल फोटो।
मंडी में पड़ी धान की फाइल फोटो।

15 नवंबर को करनाल मंडी में बिना गेट पास धान एंट्री पर राजनीति का साया है। क्योंकि करोड़ों रुपए का घोटाला करने वाले सत्ता की छतरी के नीचे बैठ गए हैं। यही कारण है कि जुंडला राइस मिलों के धान घोटाले में अब 1 माह बाद भी कोई नई गिरफ्तारी नहीं हुई है।

सवाल- घरौंडा मंडी में 3 नवंबर की जांच पर कार्रवाई क्यों नहीं?
मार्केटिंग मंडी बोर्ड के अधिकारी मानव मलिक अपनी टीम के साथ बीती 3 नवंबर को घरौंडा मंडी में रिकॉर्ड खंगालने के लिए पूरा दिन माथापच्ची करते रहे। जांच में 2 आढ़तियों की फर्म संदेह के घेरे में आई और छुट्टी वाले दिन गेट पास काटने का मामला भी उजागर हुआ। सूत्रों के मुताबिक सत्ता के दबाव के चलते धान घोटाले के इस मामले को नजरअंदाज कर दिया गया। जबकि अधिकारी मानव मलिक ने 15 नवंबर को फिर करनाल में दस्तक दी घरौंडा मंडी के मामले को ठंडे बस्ते में डालने के लिए करनाल मंडी में बिना गेट पास एंट्री के धान पर ईमानदारी की छाप छोड़ दी।

मंडी गेट से निकलती धान की ट्रैक्टर ट्रॉलियां।
मंडी गेट से निकलती धान की ट्रैक्टर ट्रॉलियां।

ऐसे में अब अधिकारी की इस कार्रवाई पर सवाल यह भी खड़ा होता है कि क्या मानव मलिक पर घरौंडा मंडी में मिली गड़बड़ी को नजरअंदाज करने का कोई दबाव था। क्योंकि कार्रवाई के 15 दिन बाद भी विभाग द्वारा घोटालेबाजों पर एक्शन लेना जरूरी नहीं समझा। जबकि इसी अधिकारी ने अपनी जांच में घरौंडा मंडी में 20 मिनट में 29 गेट पास कटने व छुट्टी वाले दिन 40 गेट पास काटने की गड़बड़ी को खुद उजागर किया था।

वाहनों के नंबरों की भी जांच धीमी
जुड़ला मंडी में धान घोटाला उजागर होने के बाद SP गंगाराम पूनिया के संज्ञान में मामला सामने आया कि मंडी में होने वाले धान उठाने में कार, स्कूटर व जीप वाले नंबरों के वाहनों का प्रयोग किया जा रहा है। जिसके चलते पुलिस जांच में इसे सही भी पाया गया। घरौंडा मंडी में इस तरह के वाहनों के नंबरों की आशंका जताई गई। मामला उजागर होने के बाद प्रदेश सरकार ने ऐसे वाहनों की बरामदगी के लिए अब जिले की सभी मंडियों के अधिकारियों को जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अब 30 नवंबर तक ऐसे वाहनों की रिपोर्ट देना विभाग के अधिकारियों के लिए चुनौती बना हुआ है।

जुंडला धान घोटाले के आरोप में गिरफ्तार मंडी सचिव पवन चोपड़ा की फाइल फोटो।
जुंडला धान घोटाले के आरोप में गिरफ्तार मंडी सचिव पवन चोपड़ा की फाइल फोटो।

खास यह है कि अभी तक इन वाहनों से जो धान मिलों में गया उस पर कोई भी अधिकारी बोलने को तैयार नहीं। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर इन वाहनों के नंबरों से मंडी से धान बाहर गया है तो वह कहां है? अगर धान राइस मिलों में गया है तो वाहन के नंबर गलत क्यों दिए गए। वहीं इस मामले में प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर अब सवाल उठने शुरू हो गए है।

आखिर क्यों प्रशासनिक अधिकारी इन बड़े घोटालेबाजों को पकड़ने में कमजोर पड़ रहा है। यह भी बताना जरूरी है कि मंडी से धान के उठान के लिए खास ट्रांसपोर्टरों की जिम्मेवारी सौंपी जाती है, लेकिन उसके बाद भी धान कार, स्कूल व जीप के नंबर वाले वाहनों से उठाया गया। आखिर इतनी बड़ी लापरवाही किस की सह पर की गई। अगर किसी की मिलीभगत नहीं है तो क्यों अधिकारी खुलकर सामने नहीं आ रहे।

करनाल मंडी से इन कर्मचारियों पर गिरी गाज
बता दें कि करनाल मंडी में बीती 15 नवंबर को बारीक धान के गेट पास काटे बिना वाहनों की एंट्री की गई थी। जिस पर टीम ने कार्रवाई करते हुए आठ कर्मचारियों को जिम्मेदार माना था। आरोप में मंडी सुपरवाइजर अश्विनी मेहरा, दीपक त्यागी, जयप्रकाश, चार ऑक्शन रिकॉर्डर सुरेश, प्रदीप श्योराण, प्रदीप मलिक, सोमबीर सहित सचिव-कम-ईओ को मुख्यालय की ओर से गुरुवार को निलंबित कर दिया गया है।

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