करनाल में गेस्ट टीचरों ने किया प्रदर्शन:ट्रांसफर पॉलिसी का विरोध, बोले- दूसरे जिले में उनका तबादला न करे सरकार

करनाल7 दिन पहले
प्रदर्शन करते गेस्ट टीचर।

ट्रांसफर पॉलिसी के विरोध में गेस्ट टीचरों ने करनाल की सड़कों पर उतरकर प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। टीचर सीएम आवास पर भी पहुंचे। उन्होंने कहा कि वे बहुत ही कम वेतन पर स्कूलों में पढ़ा रहे हैं और सरकार उनको सिर्फ जिले में ही रहने दे। किसी ओर जिले में उनकी ट्रांसफर ना करे।

इससे अध्यापकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। सरकार ने ट्रांसफर पॉलिसी को लेकर कोई कदम नहीं उठाया तो आने वाली 23 सितंबर को करनाल में एक बहुत बड़ी रैली होगी।

रविवार को गेस्ट टीचर CM सिटी करनाल पहुंचे और कैथल पुल के नीचे एकत्रित हुए। हाथों में बैनर लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शनकारी टीचर सीएम आवास की तरफ बढ़ चले। अध्यापकों ने सरकार के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगाए। उन्होंने बताया कि वर्ष 2005-06 में जब गेस्ट टीचरों की नियुक्ति हुई थी तो उस समय यह कहा गया था कि उनके जिला में काम करना होगा।

जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी को मांग पत्र देते अतिथि अध्यापक।
जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी को मांग पत्र देते अतिथि अध्यापक।

लेकिन अब दूसरे जिलो में ट्रांसफर की जा रही है, इतने कम वेतन में वह दूसरे जिलों में नहीं जा सकते। इतना ही नहीं दूसरे सब्जेक्ट के अध्यापकों को कोई दूसरा विषय पढ़ाने के लिए मजबूर किया जाता है। प्रदेशभर के 14 हजार गेस्ट टीचर्स ट्रांसफर नीति से परेशान हैं। जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होती तब प्रदर्शन जारी रहेगा। सरकार से मांग की कि ट्रांसफर पॉलिसी को रद्द करे। ट्रांसफर पॉलिसी को रद्द नहीं किया जाता है तो उन्हें नियमित किया जाए।

जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी को सौंपा ज्ञापन

गेस्ट टीचर दोपहर बाद करीब 4 बजे CM आवास पहुंचे और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। मौके पर पहुंचे जिला शिक्षा अधिकारी रोहताश वर्मा को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। शिक्षा अधिकारी ने गेस्ट टीचरों को आश्वस्त किया कि उनके ज्ञापन को DC ऑफिस के माध्यम से सीएम कार्यालय तक पहुंचा दिया जाएगा।

जानकारी देते जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी।
जानकारी देते जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी।

सब्जेक्ट पढ़ाने वाली पॉलिसी पहले से ही है: वर्मा

जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी रोहताश वर्मा ने पत्रकारों से बातचीत में बताया है कि संस्कृत वाला टीचर हिंदी का सब्जेक्ट पढ़ा सकता है और सामाजिक का अध्यापक अंग्रेजी विषय को भी पढ़ा सकता है, यह पॉलिसी आज से नहीं बल्कि पहले से ही है। यह मिडिल स्कूलों के लिए थी। अगर स्ट्रेंथ कम है तो संस्कृत के टीचर को हिंदी पढ़ाना अनिवार्य है।

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