बसताडा टोल पर लाडी का सम्मान:कृषि कानूनों के विरोध में 25 नवंबर 2020 को त्यागे थे जूते-चप्पल, मांगें मानी तो पैदल यात्रा निकाली

करनाल2 महीने पहले
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बसताडा टोल पर अंबाला निवासी लाडी का स्वागत करते किसान। - Dainik Bhaskar
बसताडा टोल पर अंबाला निवासी लाडी का स्वागत करते किसान।

हरियाणा के करनाल जिले के बसताडा टोल पर किसानों ने ईस्माइलपुर जिला अंबाला निवासी लाडी का फूल मालाओं से स्वागत किया गया। लाडी ने पिछले एक साल से अपने पैरों में चप्पल नहीं डाली। प्रण था कि 3 काले कानून रद्द होने तक पांव में चप्पल नहीं पहनेंगे। अब चप्पल डालने से पहले शहीदों के नाम यात्रा निकाली जा रही है। जो शंभु बॉर्डर से सिंघु बॉर्डर तक निकाली जाएगी।

ईस्माइलपुर जिला अंबाला निवासी लाडी ने बताया कि 25 नवंबर 2020 को जब दिल्ली के लिए चले थे तो उन्होंने प्रण किया था कि जब तक 3 काले कानून रद्द नहीं होंगे तब तक अपने पैरों में चप्पल नहीं डालेंगे। अब कानून रद्द हो गए हैं। ये जीत हमारे शहीद किसान भाइयों की बदौलत हुई है। अब उन शहीदों के लिए शंभु टोल प्लाजा से यात्रा शुरू की है। सिंघु बॉर्डर तक यात्रा जाएगी। वहां पर शहीदों के नाम एक दीप जलाएंगे। उसके बाद चप्पल पहनूंगा।

उन्होंने कहा कि हो सकते तो मैं संयुक्त किसान मोर्चा से अपील करता हूं कि हमारे शहीद किसानों के परिवार को मुआवजा मिले। परिवार को नौकरी मिले। घायलों को मुआवजा राशि मिले। साथ ही MSP पर भी कानून की गारंटी हो। भाकियू (चढूनी) आईटी सेल के जिला प्रधान बहादुर सिंह मैहला का कहना है कि नमन करते हैं। एक साल से जब से आंदोलन शुरू हुआ था प्रण लिया था। कानून रद्द होने तक चप्पल-जूते नहीं डालेंगे और नंगे पांव रहेंगे। अब शंभु बॉर्डर अंबाला से सिंघु बॉर्डर दिल्ली तक पैदल यात्रा निकाली है। ऐसे तपस्वी भाइयों के सहयोग से हमारी जीत हुई है। इन्हें सैल्यूट करते हैं।