251 ​​​​​​​कंजकों को कराया भोजन:मां झंडेवाली सेवा समिति ने नवरात्र में करवाई जा रही चौकियां हुई संपन्न

करनालएक महीने पहले
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  • सात दिनों से किया जा रहा था मां की चौकियों का आयोजन

करनाल-नवरात्र में माँ झंडेवाली सेवा समिति द्वारा सेवा समिति आश्रम करनाल में विशाल माँ की चौकियों का आयोजन पिछले सात दिनों से किया जा रहा था जिसका आज भव्य रूप से समापन हो गया। आज अष्टमी के अवसर पर माँ की ज्योत प्रचंड सेवा समिति आश्रम की पूरी टीम द्वारा किया गया। उसके अतिरिक्त आज 251 कंजकों को बिठाया गया और उसके उपरांत एक विशाल भंडारे का भी आयोजन किया गया था। इन नवरात्र में मां की ज्योत ने अलग-अलग रूपों में दर्शन दिए।

इन सातों दिनाें में में मातृशक्ति की बहनों द्वारा प्रतिदिन मां के मनमोहन वस्त्रें एवं श्रृंगार सराहनीय रहा। इस अवसर पर बोलते हुए समिति के सेवादारों ने बताया कि माँ झंडेवाली सेवा समिति करनाल जिसका गठन 27 मार्च 2009 को प्रथम नवरात्र वर्ष प्रतिपदा पर हुआ था। समिति निरंतर सामाजिक, धार्मिक और राष्ट्रीय कार्यक्रमो में अग्रणीय रहती है। वर्ष 2010 से वर्ष में 2 बार नवरात्रे के अवसर पर विशाल एवं भव्य चौकियों का आयोजन करती आ रही है। कोरोना काल में भी नवरात्रे के आयोजन का स्वरूप बदलकर सेवादार के घर पर ही 8 दिन महामाई की जोत जगाई और 8-10 लोगों में ही चौकी का प्रतिदिन आयोजन किया। समिति सेवादारों ने यह क्रम 11 वर्षों में कभी टूटने नहीं दिया। इस बार 7 अक्टूबर से 13 अक्टूबर तक नवरात्र का आयोजन माँ की विशेष अनुकम्पा से आज सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

जिन्होंने हमारा निमन्त्रण स्वीकार किया और हमारा उत्साहवर्धन किया। माँ के भक्तों का प्रतिदिन निरंतर आना जाना लगा रहा। इस आयोजन में शहर की सामाजिक संस्थाओं का भी धन्यवाद जो इस आयोजन में सहभागी बने और रोज अलग-अलग संस्थाएं माँ का श्रृंगार करने आई। विशेष रूप से श्री साईं चरण सेवा मंडल के धन्यवादी है जो सदैव जोड़ा सेवा करते है सबसे पहले आना और सबके बाद जाना निष्काम सेवा। इस बार का यह आयोजन अत्यंत कम समय में तय हुआ जिस कारण कई सहयोगी संस्थाएं एवम गणमान्य बन्धुओं को निमंत्रण नहीं दे पाए उन सबसे क्षमा। इन चौकियों में सेवादारों में उपस्थित जुगल बठला, कमल मुंजाल, नरेश गोयल, देवी दयाल, शशि टंड, परवीन जी, आनंद शर्मा, सुशील विशम्भू, विक्की टंडन, अनिल शर्मा, गुलशन छाबड़ा, सुनील मदान, श्रवण बठला, सिद्धार्थ माैजूद रहे।

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