करनाल निगम ने डिफाल्टरों की प्रॉपर्टी की सील:सुपर मॉल की 5 दुकानें, हर्ष केसी3 मॉल को किया सील, शहर पर 250करोड़ प्रॉपर्टी टैक्स बकाया

करनाल2 महीने पहले
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दुकान को सील करते करनाल नगर निगम की टीम। - Dainik Bhaskar
दुकान को सील करते करनाल नगर निगम की टीम।

करनाल के सेक्टर 12 में स्थित सुपर मॉल की 5 दुकानों, हर्ष केसी3 समेत 8 प्रॉपर्टी को नगर निगम ने सील किया। सबसे पहले स्पा सेंटर को सील किया, फिर कैफे शॉप और खाली दुकान को सील करने की कार्रवाई अमल में लाई गई। नगर नगम की कार्रवाई को देखते हुए मॉल में हड़कंप मच गया। दुकानदारों ने अपनी दुकानें बंद करनी शुरू कर दीं। काम से पहुंचे लोगों में अफरा-तरफी मच गई। निगम की टीम के साथ सिटी थाना पुलिस भी कार्रवाई के समय मौजूद रही।

EO देवेंद्र नरवाल ने बताया कि नगर निगम करनाल के द्वारा प्रॉपर्टी टैक्स के डिफाल्टरों की प्रॉपर्टी सील और अटैचमेंट की कार्रवाई की गई है। पहले बिल भेजा गया। फिर अक्टूबर माह में नोटिस जारी किया गया। जिन लोगों को ज्यादा टैक्स था। टॉप से सील करना शुरू किया गया है। 5 के करीब सुपर मॉल की दुकानों और करीब 8 लाख बकाया होने पर हर्ष केसी3 मॉल को मिलाकर 8 प्रॉपर्टी अटैच की गई। ये कार्रवाई जारी रहेगी। इस लिस्ट में पिछले 10 सालों से जिनका टैक्स बकाया है उनको चुना गया है। 250 करोड़ टैक्स शहर पर खड़ा है। प्राइवेट पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है। साथ ही सरकारी बिल्डिंग के अधिकारियों को सूचित कर दिया है। सरकार के नियम अनुसार गतिविधि की जाएंगे।

EO देवेंद्र नरवाल ने बताया कि नगर निगम ने ऐसे 75 लोगों एक महीना पहले ही नोटिस जारी किया था। इसी कड़ी में 20 मोटे प्रॉपर्टी टैक्स डिफाल्टरों और 55 छोटी राशि के डिफाल्टरों को नोटिस जारी किए थे। इनके खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जा रही है। शाम तक इस कार्रवाई को जारी रखा जाएगा।

कार्रवाई करने पहुंची टीम।
कार्रवाई करने पहुंची टीम।

नगर निगम ने प्रॉपटी टैक्स डिफॉल्टरों पर शिकंजा कसा जा रहा है। एक माह पहले नगर निगम ने 75 डिफाॅल्टरों को नोटिस जारी किए थे, लेकिन निगम को नोटिस के बावजूद टैक्स नहीं मिल पा रहा है। अब नगर निगम ने डिफाॅल्टर उपभोक्ताओं से टैक्स वसूली के लिए प्रॉपर्टी सील करने का निर्णय लिया है। निगम की ओर से 25 नवंबर को डिफाॅल्टरों के खिलाफ प्रॉपर्टी सील करने की कार्रवाई की जानी तय की गई थी।

नगर निगम को प्रॉपर्टी टैक्स चुकाने में न तो शहर के लोग उत्साह दिखा रहे हैं और न सरकारी कार्यालय टैक्स देने के लिए पूरी तरह से आगे आ रहे हैं। इस साल में अभी तक नगर निगम को मात्र 6 करोड़ रुपए टैक्स के रूप में हासिल हुए हैं। नगर निगम के खर्चों की बात करें तो अकेले सफाई बेड़े पर महीने में 3 करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं।

दुकान को सील करते हुए कर्मचारी।
दुकान को सील करते हुए कर्मचारी।

ऐसे में नगर निगम के आर्थिक हालात का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। नगर निगम सरकारी ग्रांट पर निर्भर होकर रह गया है। अपनी आमदनी को बढ़ाने के लिए नगर निगम ने प्रॉपर्टी टैक्स डिफाल्टरों पर कड़ी कार्रवाई करने का निर्णय लिया है।

प्रॉपर्टी टैक्स का 250 करोड़ रुपये बकाया

निगम का डिफाॅल्टरों की तरफ तकरीबन 250 करोड़ रुपए प्रॉपर्टी टैक्स के रूप में बकाया है। इसमें से 100 करोड़ रुपए शहर के लोगों की तरफ बकाया है। सरकार की ओर से दी छूट के बावजूद डिफाॅल्टरों ने टैक्स अदा करने की जहमत नहीं उठाई। ऐसे में अब नगर निगम के सामने डिफाॅल्टरों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए सिवाय कोई चारा नहीं बचा है।

अपडेट नहीं निगम का साफ्टवेयर

दुकानदार युद्धवीर ने बताया कि प्रोपर्टी टैक्स भरा हुआ था। नगर निगम का सॉफ्टवेयर अपडेट नहीं था। मेरी तीन दुकानें थी। तीनों का 40 हजार प्राेपर्टी टैक्स बना। जो तीनाें दुकानों का भरा हुआ है। तीनों की एक दुकान बनाकर कैफे चला रहे हैं। इस बारे में कार्रवाई करने आए अधिकारी को कहा था। साथ ही भरा हुआ टैक्स भी दिखाया, लेकिन उन्हाेंने ऑफिस में आकर मिलने को कहा गया है।

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