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NCC एयरविंग कैडेटों ने मनाया पराक्रम दिवस:ऑनलाइन कार्यक्रम का आयोजन; 'आवाज दो हम एक हैं' के नारे के साथ कैडेट्स ने किया नेताजी को याद

करनाल8 महीने पहले
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नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी के विचारों को आत्मसात करने के लिए आयोजित 
ऑनलाइन कार्यक्रम में उपस्थित प्राचार्य  
व NCC एयरविंग कैडेट। - Dainik Bhaskar
नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी के विचारों को आत्मसात करने के लिए आयोजित ऑनलाइन कार्यक्रम में उपस्थित प्राचार्य व NCC एयरविंग कैडेट।

देश आज नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती को पराक्रम दिवस के रूप में मना रहा है। इस मौके पर पंडित चिरंजी लाल शर्मा महाविद्यालय सेक्टर-14 करनाल के NCC एयरविंग कैडेटाें ने नेताजी को याद करते हुए ऑनलाइन कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें उन्होंने नेताजी के जीवन, उनके आदर्शाें, मूल्यों व उनके पराक्रम के बारे में जाना और अपने विचार व्यक्त किए।

ऑनलाइन कार्यक्रम का मंच संचालन कैडेट समृद्धि ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता ANO फ्लाइंग ऑफिसर डॉ. सुरेश दुग्गल ने की और उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में नेताजी के योगदान पर प्रकाश डालते हुए उनके पराक्रम का परिचय दिया। उन्होंने कैडेटों को नेताजी के आदर्शों व मूल्यों को अपनाकर जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

नेताजी के जीवन पर आधारित PPT दिखाई गई

कार्यक्रम में महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. राजेश रानी ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। कॉलेज के ही कार्यक्रम महत्वपूर्ण दिवस कार्यक्रम आयोजक एवं कन्वीनर डॉ. राजेश रांझा और एनसीसी कैडेट भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में कैडेट अभिषेक शर्मा ने नेताजी के जीवन और संघर्षाें की कहानी को एक PPT के माध्यम से दर्शाया। कैडेट सागर ने नेताजी के जीवन पर एक कविता प्रस्तुत की। कैडेट सचिन शर्मा ने नेताजी का जीवन परिचय दिया। कैडेट दीक्षित, कैडेट सचिन शर्मा, कैडेट अमीषा, कैडेट सौरव शर्मा ने भी देशभक्ति से लबरेज कविताएं प्रस्तुत कीं और आजाद हिंद फौज के बारे में बताया।

स्वतंत्रता संग्राम के दिनों में नेताजी इस तरह दिखते थे। उनकी फौज के जीवित सैनिक बताते हैं कि नेताजी मुस्कान से उनका सौम्य स्वभाव झलकता था।
स्वतंत्रता संग्राम के दिनों में नेताजी इस तरह दिखते थे। उनकी फौज के जीवित सैनिक बताते हैं कि नेताजी मुस्कान से उनका सौम्य स्वभाव झलकता था।

नेताजी की संवेदनशीलता पर प्रकाश डाला गया

प्रिंसिपल डॉ. राजेश रानी ने अपने संबोधन में कैडेटों से जयहिंद व 'आवाज दो हम एक हैं' के नारे लगवाए। उन्होंने कहा कि हमें नेताजी के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। वे देश के प्रति इतने समर्पित थे कि आजीवन देशसेवा में लगा दिया और देश के लिए ही प्राण न्योछावर कर दिए। नेताजी ने आजाद हिंद फौज का गठन किया, जिसमें ज्यादातर सैनिक हरियाणवी थे।

डॉ. राजेश रानी ने बताया कि नेताजी ने 23 साल की उम्र में आईएएस की परीक्षा पास कर ली थी, क्योंकि यह उनके पिता जी की दिली ख्वाहिश थी। नेताजी बेहद संवेदनशील थे। इसका एक उदाहरण यह है कि जब वे 8वीं कक्षा में पढ़ते थे तो स्कूल के गेट पर हर दिन एक भिखारिन खड़ी होती थी। वे स्कूल जाकर उस भिखारिन को अपने टिफिन से आधा खाना देते थे।

नेताजी की फौज के जीवित सदस्य बताते हैं कि वे गांधीजी के काफी करीब थे। गांधीजी सुभाष चंद्र बोस से इतना प्रभावित थे कि वे उन्हें विशेष सम्मान देते थे।
नेताजी की फौज के जीवित सदस्य बताते हैं कि वे गांधीजी के काफी करीब थे। गांधीजी सुभाष चंद्र बोस से इतना प्रभावित थे कि वे उन्हें विशेष सम्मान देते थे।

जब नेताजी बने कांग्रेस अध्यक्ष...
डॉ. राजेश रांझा ने बताया कि दिसंबर 1938 में कांग्रेस का 51वां अधिवेशन था और कांग्रेस ने सर्वसम्मति से नेताजी को पार्टी अध्यक्ष नियुक्त किया। इस दौरान गांधीजी के सुझाव पर 51 बैलों को जोड़कर एक गाड़ी बनाई गई, जिसमें नेताजी को बिठाकर क्षेत्र का भ्रमण कराया गया था, उन्हें विशेष सम्मान दिया गया था। यह पहली बार था कि किसी कांग्रेस अध्यक्ष को इतना सम्मान मिला हो।

डॉ. राजेश रांझा ने बताया कि तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा... नारा बुलंद करने वाले महान क्रांतिकारी सुभाष चंद्र बोस कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद हिसार आए थे। लुधियाना-हिसार ट्रेन में बैठकर नेताजी संयुक्त पंजाब के पहले मुख्यमंत्री गोपी चंद भार्गव के घर हिसार पहुंचे थे। इस दौरान कैंप चौक के पास वे कुछ घंटे ही रुके थे और उन्हें सम्मान देने के लिए इस चौक का नाम सुभाष चंद्र बोस के नाम पर रख दिया गया।

हर साल 23 जनवरी को मनाया जाएगा पराक्रम दिवस
बता दें कि अब हर साल 26 जनवरी गणतंत्र दिवस समारोह 23 जनवरी से मनाया जाएगा और 23 जनवरी को नेताजी की जयंती पराक्रम दिवस के रूप में मनाई जाएगी। नेताजी की जयंती को गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल करने के लिए मोदी सरकार ने यह फैसला लिया है, जिस पर इसी साल से अमल किया जा रहा है। नेताजी को श्रद्धांजलि स्वरूप दिल्ली में इंडिया गेट पर उनकी ग्रेनाइट की एक प्रतिमा भी लगाई जाएगी।

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