करनाल में खुली ज्योग्राफिकल इन्फॉर्मेशन सिस्टम लैब:खेतों में आग लगने की मिलेगी जानकारी, 32 प्रोजेक्टों पर चल रहा काम; विभागों के डाटा बेस को मैपिंग में लेकर आसान बनाएंगे प्रोसेस

करनाल2 महीने पहले
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डीसी साहब लैब में जानकारी लेते हुए। - Dainik Bhaskar
डीसी साहब लैब में जानकारी लेते हुए।

हरियाणा के करनाल में ज्योग्राफिकल इन्फॉर्मेशन सिस्टम लैब (जीआईएस) लैब खुल चुकी है। प्रौद्योगिकी से सरकारी विभागों के डाटा बेस कार्य को मैपिंग में लेकर उसे आसान बनाने के मकसद से जीआईएस लैब वर्क स्टेशन की स्थापना हो गई है। शहर के सेक्टर-12 स्थित लघु सचिवालय द्वितीय खंड के प्रथम तल पर बुधवार को उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने लैब का दौरा किया और यहां मौजूद प्रोजेक्ट फैलो रोहित पांडे से इसकी जानकारी ली।

जानकारी दी गई कि वे लैब में जल्द ही म्यूनिसिपल पार्क की मैपिंग सॉल्यूशन का काम करेंगे। खेत में गेहूं व धान के अवशेषों को आग लगने की घटनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे बहुत से प्रोजेक्ट हैं जो हरसैक (हरियाणा अंतरिक्ष अनुप्रयोग केन्द्र) द्वारा चलाए जा चुके हैं। गेहूं व धान के अवशेषों को आग लगाने का प्रोजेक्ट भी उन्हीं में है। अब इनसे अलग 32 प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। इससे यह जानने में और आसानी होगी की कहां किस वक्त खेतों में आग लगाई जा रही है और उस पर समय रहते कार्रवाई की जा सकेगी।

वैसे तो नासा व इसरो जैसे बड़े सैटेलाइट केन्द्र हैं, जहां से हरसैक डाटा को प्राप्त किया जाता रहा है और फिर संबंधित वैबसाइट के ओपन सोर्स से डाटा उठाकर उसकी प्रोसेसिंग करते हैं। यह कार्य एआरसी सॉफ्टवेयर के जरिए होता है। लैब की स्थापना की प्रक्रिया वैसे तो अप्रैल से शुरू हो गई थी, जो मुकम्मल हो जाने के बाद आज उपायुक्त की विजिट से कार्यशील हो गई है।

जानिए, क्या है जीआईएस लैब
प्रोजेक्ट फेलो ने बताया कि लैब में सैटेलाइट आधारित डाटा की प्रोसेसिंग होती है। यह डाटा अलग-अलग वैबसाइट से लिया जाता है, फिर उसकी प्रोसेसिंग करके उसे मैप बेस सोल्यूशन में देते हैं। हिसार स्थित सीसीएसएचएयू कैम्पस में सिटीजन रिसोर्स इंफॉर्मेशन डिपार्टमेंट की ओर से स्थापित हरसैक (हरियाणा अंतरिक्ष अनुप्रयोग केन्द्र) जीआईएस लैब की मॉनिटरिंग करता है। इसमें वहां के वरिष्ठ वैज्ञानिक आदेश जारी करते हैं। वैसे तो इस तरह की लैब प्रदेश के कुछ जिलों में कुछ समय पहले स्थापित हो गई थी, लेकिन हाल ही में 14 जिलों में जीआईएस लैब खुली है जिनमें करनाल भी शामिल है।

डीसी को लैब की जानकारी देते हुए लैब अधिकारी।
डीसी को लैब की जानकारी देते हुए लैब अधिकारी।

क्या होगा फायदा
रोहित पांडे ने बताया कि जिला के वन, कृषि, भू-रिकॉर्ड, राजस्व, खनन, जन स्वास्थ्य, पर्यटन, सिंचाई, पशुपालन, परिवहन, ग्रामीण विकास, आपदा प्रबंधन व पुलिस जैसे कईं विभाग अपनी जरूरतों के आधार पर इस लैब को डाटा उपलब्ध करवाएंगे। जहां से विभागों को मैप बेस सोल्यूशन मिल सकेगा। इससे विभागों को जो काम मैन्यूअल करवाना होता था, वो कम हो जाएगा। स्टीकता बढ़ जाएगी तथा कोस्ट एफेक्टिव यानी पैसे की बचत होगी।

सभी विभागों की लेंगे मीटिंग
उपायुक्त ने प्रोजेक्ट फेलो रोहित पांडे को बताया कि आगामी 6 अक्टूबर को लघु सचिवालय में उपरोक्त विभागों की एक मीटिंग रखेंगे, जिसमे प्रेजेंटेशन के जरिए जीआईएस वर्क स्टेशन जानकारी देगा और विभाग मैपिंग के लिए अपनी जरूरतें बताएंगे।

एआरसी सॉफ्टवेयर से बनाए गए मैप
विजिट के दौरान उपायुक्त ने प्रोजेक्ट फेलो से शहर के सभी म्यूनीसिपल पार्क की मेपिंग तैयार करने को कहा। उन्होंने फसल कटाई के सीजन में खेतों में आग लगाने जैसी घटनाओं की सूचना पर भी चर्चा की। उन्होंने लैब में मौजूद एआसी सॉफ्टवेयर से बनाए गए कुछ मैप को भी दिखाया। लैब में मौजूद प्लोटर मशीन की भी जानकारी ली इसमें बड़े मैप की स्कैनिंग व प्रिंटिंग का काम होता है।

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