करनाल में शूटर रायजा ढिल्लो का शानदार स्वागत:ISSF जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में महिला टीम ने जीता स्वर्ण पदक; टीम की बेस्ट खिलाड़ी कौ पैतृक गांव शामगढ़ में मिला आशीर्वाद

करनाल2 महीने पहले
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जीप में बैठक अभिवादन स्वीकार करते हुए खिलाड़ी। - Dainik Bhaskar
जीप में बैठक अभिवादन स्वीकार करते हुए खिलाड़ी।

भारतीय महिलाओं ने ISSF जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में शूटिंग इवेंट में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा। टीम की खिलाड़ी रायजा ढिल्लो का पैतृक गांव शामगढ़ जिला करनाल में भव्य स्वागत हुआ। शहर के आईटीआई चौक से ढोल, बाजों और फूलमालाओं के साथ खिलाड़ी का स्वागत किया गया। आगे बढ़ाते हुए 10 किलोमीटर तक नाचते गाते हुए काफिला शामगढ़ गांव की तरफ बढ़े। गांव में पहुंचने पर ग्रामीणों ने नोटों की माला पहनाकर खिलाड़ी का स्वागत करके हौंसला बढ़ाया और ओलिंपिक में जीत का आशीर्वाद दिया।

खिलाड़ी को जीत का आशीर्वाद देते ग्रामीण।
खिलाड़ी को जीत का आशीर्वाद देते ग्रामीण।

फाइनल में इटली को हराकर जीता गोल्ड

पेरू की राजधानी लीमा में खेली गई चैंपियनशिप में महिला शूटिंग टीम ने इवेंट में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। बीते शुक्रवार को अरीबा खान, रायजा ढिल्लो और गनीमत सेखों की टीम ने फाइनल में इटली की टीम को 6-0 से मात दी। अरीबा खान, रायजा ढिल्लो और गनीमत सेखों की तिकड़ी ने फाइनल मुकाबले में 6 का स्कोर किया और शीर्ष पर रही। इस भारतीय टीम ने इटली को 6-0 से हराया। पुरुष टीम कांस्य पदक जीतने में सफल रही।

ओलिंपिक जीतना लक्ष्य

खिलाड़ी रायजा ने बताया कि चैंपियनशिप में 32 देशों ने हिस्सा लिया था। इंडिया के मेडल सबसे हाई आए हैं। वे पिछले तीन साल से लगातार अभ्यास कर रहे हैं। अबा ओलिंपिक तक पहुंचने का सपना है।

फूलमालाओं से किया स्वागत।
फूलमालाओं से किया स्वागत।

देश को पहली बार मिला महिला टीम से गोल्ड

पिता रविजीत सिंह ढिल्लो ने कहा कि ये इतिहास है। जूनियर चैंपियनशिप में पहली बार गोल्ड मेडल आया है। लड़कों से ज्यादा लड़कियों ने स्कोर किया। इटली, अमेरिका, जर्मनी जैसी टीमों को हराकर गोल्ड जीता। टाॅप पर रही। बहुत बड़ी बात है।

कड़ी मेहनत से मिला मुकाम

माता गुल ढिल्लो ने कहा कि बच्चे का फोक्स होना चाहिए। टीम के अनुसार काम करना होता है। इसके अलावा टाइम पर उठाना, टाइम पर सोना, अभ्यास करना। जिंदगी में कुछ बनाने के लिए रोज की लाइफ में चेंज लाना होता है। चंडीगढ़ से पटियाला जाकर प्रैक्टिस की। हमें विश्वास था कि जरूर जीतेगी, लेकिन 18 की उम्र में ही जीत दर्ज करेगी। यह बड़ी बात है। वह आगे पढ़ाई के साथ-साथ ओलिंपिक की तैयारी भी करेगी।

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