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प्रोजेक्ट:पश्चिमी बाईपास फेज-2 का निर्माण नहीं शुरू कर पाया पीडब्ल्यूडी, फाइलों में अटका प्रोजेक्ट

करनाल4 दिन पहले
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करनाल. पश्चिमी यमुना नहर बाईपास फेज-2 का कैथल रोड से अभी तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ। - Dainik Bhaskar
करनाल. पश्चिमी यमुना नहर बाईपास फेज-2 का कैथल रोड से अभी तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ।
  • वन विभाग से एनओसी का इंतजार, निर्माण में देरी से शहर में बाहरी वाहनों का बढ़ रहा दबाव

पश्चिमी बाईपास फेज-2 का निर्माण कार्य सीएम की घोषणा के तीन साल बाद भी शुरू नहीं हो सका है। बाईपास निर्माण का यह महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट फाइलों में दबकर रह गया है। पीडब्ल्यूडी विभाग को वन विभाग से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओेसी) मिलने का इंतजार है। लेकिन दो साल का समय बीतने के बावजूद सड़क निर्माण के लिए पीडब्ल्यूडी को एनओसी नहीं मिल पाई है।

ऐसे में बाईपास निर्माण की देरी का प्रभाव शहर को सीधे तौर पर प्रभावित कर रहा है। फेज-2 के निर्माण में देरी से शहर में बाहरी वाहनों के आवागमन का दबाव बढ़ता जा रहा है, जिससे सड़कों पर बार-बार जाम व वाहनों को रेंगकर निकलना पड़ता है।

पश्चिमी यमुना नहर की पटरी पर कर्ण लेक से काछवा रोड नहर पुल तक बाईपास का निर्माण करने के बाद उद्‌घाटन पर सीएम मनोहर लाल ने सेकेंड फेज के बाईपास निर्माण की घोषणा की थी, लेकिन निर्माण कार्य अभी तक भी शुरू नहीं हो पाया है। बाईपास न बनने के कारण कैथल व काछवा की तरफ से आकर मूनक, मधुबन, घरौंडा व पानीपत की तरफ जाने वाले वाहन शहर के अंदर से होकर गुजरते हैं।

जिसके चलते शहर के अंदर सड़कों पर वाहनों का दबाव रहता है। वाहनों के रस के कारण सड़कों पर जाम भी लगते रहते हैं, जिससे वाहनाें को रेंगकर शहर के अंदर से निकलना पड़ता है। इसी समस्या के समाधान के लिए पीडब्ल्यूडी ने सीएम के घोषणा के अनुसार पश्चिमी बाईपास फेज-2 निर्माण का प्रोजेक्ट तैयार किया।

लेकिन सरकार से प्रशासनिक अप्रूवल मिलने के बाद भी पीडब्ल्यूडी निर्माण कार्य शुरू नहीं करा पा रहा है। क्योंकि अभी तक वन विभाग से ही एनओसी नहीं मिल पाई है। दो बार एनओसी की फाइल पर आब्जेक्शन लग चुके हैं, जिनको वन विभाग की ओर से दूर करके फाइल को दोबारा से भेजा जा चुका है, लेकिन फिलहाल एनओसी मिलना लंबित है।

शहर की सड़कों से हटेगा वाहनों का दबाव

पश्चिमी बाईपास फेज-2 का निर्माण होने से हजारों वाहनों का दबाव शहर की सड़कों से हटेगा। जिन वाहनों को अंबाला चंडीगढ़ की तरफ से आकर मूनक की ओर जाना होगा वे सीधे कर्ण लेक से टर्न ओवर करके घोघड़ीपुर गांव के पास मूनक रोड पर पहुंच जाएंगे।

कैथल व पेहवा से आने वाले वाहन सीधे होंगे बाईपास

कैथल व पेहवा की तरफ से आकर मूनक, मधुबन, घरौंडा, पानीपत की तरफ जाने वाले वाहनों को शहर के अंदर प्रवेश करने की जरूरत नहीं रहेगी और न ही कर्ण लेक की साइड से घूमकर आने की जरूरत रहेगी। वाहन पश्चिमी बाईपास फेज-2 से होकर घोघड़ीपुर से मूनक रोड को क्रॉस करते हुए दाहा बजीदा से होकर जीटी रोड पर पहुंच जाएंगे।

5.8 किलोमीटर लंबे बाईपास पर 33 करोड़ होंगे खर्च

कैथल रोड पश्चिमी यमुना नहर के पुल से लेकर घोघड़ीपुर बस अड्‌डे तक फेज-2 का पश्चिमी बाईपास 5.8 किलोमीटर लंबा बनाया जाएगा। इस बाईपास की चौड़ाई भी 10 मीटर रहेगी। इसके निर्माण पर 33 करोड़ रुपए की राशि खर्च होनी है।

मूनक रूट के राहगीरों को मिलेगा अल्टरनेट मार्ग

मूनक रोड की तरफ से शहर में प्रवेश करने के लिए मात्र एक ही रोड है, लेकिन अगर किसी कारण से घोघड़ीपुर रेलवे फाटक की जगह बने रेलवे ओवरब्रिज पर किसी कारण से जाम लग जाए तो इस रूट के राहगीरों सामने कोई अल्टरनेट मार्ग नहीं है। लेकिन अगर पश्चिमी बाईपास फेज-2 का निर्माण हो जाता है तो इस रूट के लोगों हो चंडीगढ़, यमुनानगर व कुंजपुरा जाने के लिए अल्टरनेट मार्ग मिल जाएगा।

33 करोड़ का प्रोजेक्ट है

पश्चिमी बाईपास का निर्माण करने के लिए 33 करोड़ के बजट का प्रोजेक्ट बनाया हुआ है, जिसकी सरकार से अप्रूवल मिल चुकी है। लेकिन नहर की पटरी सड़क बनाने के लिए वन विभाग से एनओसी मिलनी है जो अभी तक नहीं मिली है। दो बार एनओसी की फाइल पर लगे ऑब्जेक्शन को भी दूर कर दिया है। अब 15 दिन पहले ऑब्जेक्शन दूर करके फाइल भेजी गई है। एनओसी मिलने के बाद छह महीने में निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
संदीप गोयल, एसई, पीडब्ल्यूडी विभाग, करनाल।

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