फर्जीवाड़ा:टेंपरेरी प्रॉपर्टी आईडी फ्रॉड का पर्दाफाश, दो आरोपी रिमांड पर, 1 आईडी जनरेट करने के लेते थे ~10 हजार

करनाल9 महीने पहलेलेखक: रमेश पाल
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  • धाेखाधड़ी से जनरेट की गई 209 प्रॉपर्टी आईडी के बेस पर कराई जा चुकी हैं 143 रजिस्ट्री
  • एक आरोपी निगम की प्रॉपर्टी टैक्स ब्रांच का कर्मी और दूसरा तीन अटल सेवा केंद्र का संचालक गिरफ्तार

नगर निगम में फर्जीवाड़े से टेंपरेरी प्रॉपर्टी आईडी जनरेट करने के चर्चित फ्रॉड का पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। जिला पुलिस के इकोनाॅमिक ऑफेंस सेल को मामले की जांच और खुलासा करने में 20 दिन लगे। पुलिस ने टेंपरेरी प्रॉपर्टी आईडी जनरेट करने के आरोप में गिरफ्तार दो आरोपियों को 6 मार्च को कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लिया है।

जिनमें एक नगर निगम की प्रॉपर्टी टैक्स ब्रांच का कर्मचारी गांधी नगर वासी राजीव और तीन अटल सेवा केंद्रों का संचालक प्रेमनगर वासी अमित शामिल है। दोनों आरोपियों से पुलिस ने सख्ताई से पूछताछ की तो कई राज सामने आए।

अभी तक की पूछताछ में पुलिस के सामने आया है कि आरोपी अमित टेंपरेरी प्रॉपर्टी आईडी जनरेट करने के लिए एनडीसी पोर्टल पर ऑनलाइन डाटा डालता था और राजीव निगम की यूजर आईडी से उसे ओके करता गया। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि दोनों ने रुपए बटोरने के लिए इस फ्रॉड को अंजाम दिया।

आरोप है कि वैसे तो इन्होंने टेंपरेरी प्रॉपर्टी आईडी जनरेट करने के लिए कई लाेगाें से रुपए वसूले, लेकिन अप्रूव्ड एरिया की एक टेंपरेरी आईडी जनरेट करके देने के लिए एवरेज 10 हजार रुपए हासिल किए। नगर निगम की पुलिस को दी शिकायत के अनुसार फर्जीवाड़े से 209 टेंपरेरी प्राॅपर्टी आईडी जनरेट हुई हैं, जिनके जरिए 143 रजिस्ट्रियां हुई हैं। मामले में गिरफ्तार दो दिन के रिमांड के बाद दोनों आरोपियों को साेमवार फिर से कोर्ट में पेश किया जाएगा।

साॅफ्टवेयर हैक नहीं हुआ, लू पोल से खेला आईडी जनरेट का खेल

पुलिस के अनुसार अर्बन लोकल बॉडीज का एनडीसी पोर्टल नया है। इसमें कई तरह के अपडेशन की जरूरत है। नगर निगम की ओर से उनके बारे में यूएलबी (अर्बन लाॅकल बाॅडी) को लिखा भी गया है। पोर्टल हैक होने की शिकायत निराधार है।

पोर्टल न तो हैक हुआ है न पोर्टल से कोई छेड़छाड़ है, न किसी अनजान नंबर का प्रयोग हुआ, पर साॅफ्टवेयर के लू पोल (खामी) का फायदा उठाकर दोनों आरोपियों ने टेंपरेरी प्रॉपर्टी आईडी जनरेट करने का खेल खेला है। जांच में पाया गया कि मोबाइल नंबर 99999-99990 नगर निगम कार्यालय के कर्मचारी के द्वारा ही बदला गया था न कि पोर्टल को हैक करके बदला गया।

एनडीसी अप्रूव्ड एरिया की और रजिस्ट्री हो गई अन-अप्रूव्ड की
सरकार की ओर से भले ही अवैध कॉलोनियों में रजिस्ट्रियों पर रोक लगा रखी हो, लेकिन यहां तो तू डाल-डाल मैं पात-पात वाली कहावत चरितार्थ हो रही है। आरोपियों ने फर्जीवाड़े से अप्रूव्ड एरिया की टेंपरेरी प्रॉपर्टी आईडी जनरेट की और फिर एनडीसी जारी की गई, जिसके बेस पर न केवल अप्रूव्ड एरिया में बल्कि अन-अप्रूव्ड एरिया की रजिस्ट्रियां हुई हैं।

जैसे मंगल कॉलोनी पार्ट वन में कुछ खसरा अप्रूव्ड है, लेकिन यहां खेल यह खेला गया कि टेंपरेरी प्रॉपर्टी आईडी से एनडीसी पार्ट-वन की और रजिस्ट्री कराई गई पार्ट-टू की है। इसके अलावा पुलिस की जांच में सामने आया कि एनडीसी कर्ण विहार की ले रखी है, जबकि रजिस्ट्री विकास कॉलोनी की हुई है। जांच में 23 रजिस्ट्रियां ऐसी पाई गई हैं जिसमें एनडीसी किसी कालोनी की जारी की गई है और रजिस्ट्री किसी अन्य काॅलोनी की कराई गई हैं।

डीड राइटराें से मिला हुआ था अमित

पुलिस के अनुसार अटल सेवा केंद्र होने के कारण डीड राइटर अमित को जानते थे। अमित डीड राइटरों को नगर निगम में अपनी अच्छी जानकारी होने व काम को जल्दी करवाने की कहता था। जब कोई डीड राइटर, खरीदार या कोई जमीन बेचने वाला रजिस्ट्री करवाने के लिए आता था और टेंपरेरी प्रॉपर्टी आईडी न होने के कारण डीड राइटर या खरीदार या बेचने वाला संबंधित डिटेल अमित को दे देते थे।

अमित किसी भी वैध एरिया की टेंपरेरी आईडी बनाकर पोर्टल पर आवेदन को अनुमोदित कराने के लिए राजीव को पैसे देता था। पुलिस तहसील की लापरवाही की जांच के लिए भी अधिकारियों को पत्र लिखेगी।

यूएलबी से प्राप्त डेटा के आधार पर आए काबू

पुलिस को मामले में आरोपियों तक पहुंचने के लिए यूएलबी से प्राप्त डेटा के आधार पर सहायता मिली। पुलिस ने बताया कि जो डेटा यूएलबी सर्वर से मिला है उसके थ्रू ही आरोपियों की पहचान होने पर उन्हें गिरफ्तार किया गया।

आरोपी किसी भी अप्रूव्ड एरिया की कर देते थे आईडी जनरेट

पुलिस के इकोनॉमिक ऑफेंस सेल के इंस्पेक्टर संदीप सिंह के अनुसार आरोपियों ने टेंपरेरी प्रॉपर्टी आईडी जनरेट करने को पैसे हथियाने का जरिया बना लिया था। पोर्टल पर किसी भी अवैध एरिया की टेंपरेरी प्रॉपर्टी आईडी जनरेट नहीं हो पाती है।

साॅफ्टवेयर उस एरिया के खसरा नंबर इत्यादि को उठाता ही नहीं है। इसलिए आरोपी किसी भी अप्रूव्ड एरिया की टेंपरेरी आईडी बनाकर देते थे। उन्होंने एेसा न केवल अन-अप्रूव्ड एरिया की टेंपरेरी आईडी के लिए किया बल्कि अप्रूव्ड एरिया के लिए भी ऐसा ही कर दिया।

टेंपरेरी प्रॉपर्टी आईडी फ्रॉड मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर रिमांड पर लिया है। इनमें एक निगम कर्मचारी राजीव और दूसरा करनाल वासी अमित है। दोनों ने मिलीभगत से पैसे के लिए टेंपरेरी प्रॉपर्टी आईडी के फ्रॉड को अंजाम दिया है। एक आईडी के लिए करीबन 10 हजार रुपए लेते थे। आरोपियों से पैसा रिकवर करना है। संदीप सिंह, इंस्पेक्टर, इकोनॉमिक ऑफेंस सेल, पुलिस।

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