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  • The Administration Landed 180 Depot Holders In The Mandi, But Farmers Did Not Sell Wheat, A Group Started Buying In The Evening Created An Atmosphere Of Tension

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खरीद- बिक्री:प्रशासन ने 180 डिपो होल्डर को मंडी में उतारा पर किसानों ने नहीं बेचा गेहूं, शाम को एक गुट ने शुरू की खरीद तो बना तनाव का माहौल

करनाल13 दिन पहले
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  • एसडीएम ने कहा- 48 घंटे में पेमेंट आ जाएगी
  • किसान बोले- साहब! रात को 50 हजार की जरूरत पड़ गई, आढ़ती से लेकर गए, सीधे कैसे बेच सकते हैं

किसानों के खाते में सीधे पेमेंट डालने के विरोध में गुरुवार को आढ़तियों हड़ताल शुरू कर दिया। प्रशासन ने 180 डिपो होल्डरों को कच्चा आढ़ती बनाकर मंडी में उतारा, लेकिन किसानों ने उन्हें फसल बेचने से इन्कार कर दिया है। करनाल मंडी में एसडीएम आयुष सिन्हा, डीएफएससी निशांत राठी, इंस्पेक्टर समीर वशिष्ठ, सेक्रेटरी सुरेंद्र सिंह करीब 40 ढेरियों पर पहुंचे।

लेकिन, एक किसान को छोड़कर किसी ने सीधे सरकार को गेहूं नहीं बेचा। उनका कहना था कि आढ़ती के माध्यम से ही गेहूं बेचेंगे। इस दौरान लेबर ने आढ़तियों का समर्थन किया। बुधवार तक जिले की विभिन्न मंडियों में करीब 50 हजार 508 मीट्रिक टन गेहूं आ चुका है।

इसमें से खाद्य आपूर्ति विभाग ने 25 हजार 828.5 मीट्रिक टन, हैफेड द्वारा 20 हजार 290 मीट्रिक टन तथा हरियाणा वेयर हाउस कार्पोरेशन द्वारा 4 हजार 389.5 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया। उधर शाम तक आढ़तियों की एसोसिएशन दो फाड़ हो गई। कुछ आढ़तियों ने शाम को हड़ताल खत्म कर खरीद शुरू कर दिया।

हड़ताल को देखते हुए प्रशासन ने पहले इंतजाम किया था। सीधे खरीद के लिए मार्केट कमेटी ने 180 डिपो होल्डरों को तीन माह के लिए अस्थायी कच्चा आढ़ती के लाइसेंस जारी किए थे। इसके अतिरिक्त राइस मिलों के मजदूरों से काम कराने की बात कही गई थी।

लेकिन, प्रशासन के यह इंतजाम नाकाफी रहे। वहीं लेबर न होने से बुधवार तक खरीदे गए गेहूं की उठान भी नहीं हो पाई। मंडियों में गेहूं के ढेर लगे हैं। इससे किसान परेशान हैं और वह मंडी में अपनी फसल पर पहरा दे रहे हैं।

कुछ आढ़तियों के डर से नहीं बेचा तो कुछ ने बेचा भी

इस दौरान प्रशासनिक अधिकारी डिपो होल्डर के साथ किसानों के ढेरियों पर पहुंचे लेकिन अधिकांश किसानों ने बेचने से इनकार कर दिया। इस दौरान आढ़ती किसानों को गेहूं न बेचने के लिए समझाते रहे। इस दौरान टपराना गांव के किसान सुनील और सुरेश ने सरकार को सीधे तौर पर 40 क्विंटल गेहूं बेचा है। डीएफएससी निशांत राठी ने कहा कि किसान सीधे तौर पर बेचने को तैयार हैं, लेकिन आढ़ती उन्हें गुमराह कर रहे हैं।

हड़ताल चलेगी, सरकार परेशान करना बंद करें

आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान रजनीश चौधरी ने कहा कि गेहूं पेमेंट में पोर्टल में आढ़ती का ऑप्शन दिया जाए। तुलाई और लोडिंग हम नहीं करवाएंगे। यह हड़ताल अनिश्चितकालीन रहेगी।

नमी वाली भी बिक जाएगी, लेकिन किसान नहीं माने

किसान और आढ़तियों के नहीं मानने के कारण अधिकारियों ने किसानों को लालच दिया कि अाज तो नमी वाली गेहंू भी बिक जाएगी। किसान चंद्रभान ने 100 क्विंटल गेहूं बेचने की हां भर ली। एसडीएम समेत पूरी टीम ढेरी पर पहुंची और किसान से गेटपास ले लिया और नाम नोट कर लिया गया। लेकिन इसी दौरान किसान का लड़का आ गया और बगैर आढ़ती के गेहूं बेचने से इनकार कर दिया।

तोल शुरू करवाने को लेकर मंडी में तनाव, पुलिस तैनात

करनाल मंडी में एक गुट की तरफ से हड़ताल के दौरान तोल शुरू करवाने को लेकर तनाव की स्थिति बन गई है। सिटी थाना प्रभारी संदीप सिंह ने बताया कि सुरक्षा की दृष्टि से फोर्स तैनात कर दी है। दोनों गुटों के आढ़तियों के बीच बहस हो गई है। दोनों गुटों की मीटिंग चल रही है। कानून को हाथ मे लेने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

सुनिश्चित करें कि किसान की फसल समय पर बिके : सीएम

मुख्यमंत्री ने गुरुवार को प्रदेश के उपायुक्तों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए गेहूं की तुलाई और उठान को लेकर मौजूदा स्थिति पर चर्चा की। सीएम ने कहा कि सुनिश्चित करें कि किसान की फसल समय पर बिके और उसी दिन उसकी उठान हो। पेमेंट उनके खाते में चली जाए। आढ़तियों के विषय पर उन्होंने कहा कि हाल ही में उनके साथ मीटिंग की गई थी। इसमें काफी बातों पर सहमति बनी है। ब्याज को लेकर कुछ मुद्दे थे, उसका भी हल कर दिया है। आज से ही उसे आढ़तियों के खाते में डाल रहे हैं।

^आढ़तियों की हड़ताल के चलते तुलाई बंद रही। लेकिन गेट पास सभी जगह काटे गए हैं। मंडियों में तुलाई सुचारू रूप से चलते रहे, इसका विकल्प डिपो होल्डरों को प्रशिक्षण दे दिया है। 180 अस्थाई लाइसेंस जारी कर दिए हैं, ताकि किसी मंडी में गेहूं की तुलाई और बिक्री की प्रक्रिया बाधित न हो। -निशांत कुमार यादव, डीसी करनाल।

एक गुट के हड़ताल खत्म करने से राहत

करनाल में आढ़ती एसो. दो फाड़ हो गई है। प्रधान रजनीश चौधरी के नेतृत्व के आढ़ती हड़ताल को जारी रख रहे हैं। दूसरी तरफ, करनाल मंडी के दूसरी एसोसिएशन के प्रधान धर्मबीर पाढ़ा ने कहा कि सरकार से बातचीत हो गई है। पेमेंट में ऑप्शन के लिए सरकार ने 12 अप्रैल तक का टाइम दिया है। शाम को हमने हड़ताल खत्म कर दी है।

इस दौरान एसडीएम, डीएफएससी के साथ दो ढेरी खरीदी और तुलाई शुरू करवा दी है। नरूखेड़ी गांव के किसान सुभाष ने बताया कि सुबह से बैठे थे। हड़ताल खत्म करके राहत दी है। डीसी निशांत कुमार यादव ने कहा कि एक गुट के आढ़तियों ने हड़ताल खत्म कर दी है।

समझाने पर नहीं मान रहे किसान

साहब! आढ़ती से रात को लिए थे पैसे...

एसडीएम ने समझाया कि आढ़तियों को 48 घंटे में पेमेंट आ जाएगी, सीधे सरकार गेहंू खरीद रही है। इसपर एक किसान ने कहा कि साहब, रात को जरूरत पड़ गई थी। 50 हजार रुपए लेकर गया था। यदि बगैर आढ़ती के गेहूं बेच दी तो विश्वास खो जाएगा।

ट्रैक्टर किराए पर लेकर आया हूं

खाद्य एवं आपूर्ति एजेंसी डिपो होल्डरों के माध्यम से परचेज करने पहुंची तो सतबीर के आढ़ती ने कहा कि किसान किराए के ट्रैक्टर पर गेहंू लेकर आया है। एक हजार ट्रैक्टर चालक को किराया दे दो। इसपर अधिकारियों ने कोई जवाब नहीं दिया।

आढ़ती कर देगा परेशान

किसान जगदीश सिंह ने कहा कि मैं तो बेच दूंगा, लेकिन आढ़ती परेशान कर देगा। एक आढ़ती ने किसान को समझाया कि पेमेंट टाइम पर नहीं आई तो अफसरों के पास कैसे जाओगे। हमारे पास तो आने के रास्ते खुले हैं। इस पर किसान ने गेहूं बेचने से इनकार कर दिया।

ढूंढे नहीं मिलते थे अफसर, खुद ढूंढे रहे हैं

प्रशासनिक टीम परचेज करने पहुंची तो आढ़तियों ने कहा कि ढूंढे नहीं मिलते थे अफसर। आज स्वयं ही किसानों को ढूंढने में लगे हैं। ।

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