पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App

धर्म संदेश:अज्ञानता को वरदान मानने वालों की भी कमी नहीं है : मुनि पीयूष

करनाल2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक

उपप्रवर्तक पीयूष मुनि ने श्री आत्म मनोहर जैन आराधना मंदिर से अपने दैनिक संदेश में कहा कि अज्ञानता वरदान नहीं बल्कि अभिशाप है। अज्ञानी संसार में बिना सींग और पूंछ के पशु के समान होता है। अज्ञानता को वरदान मानने वालों की भी कमी नहीं है। विश्व में अनेक विचारधाराओं के व्यक्ति पाए जाते हैं। अज्ञानता को प्रश्रय देने वाले अज्ञानवादी कहलाते हैं। संसार में अनेक त्यागी, वैरागी, पंडित, विद्वान तथा साहित्यकार पाए जाते हैं जो अपने-अपने ढंग से ज्ञान की व्याख्या करते हैं परंतु उन सबका ज्ञान परस्पर विरोधी होता है। इससे सभी ज्ञान मिथ्या प्रतीत होता हैं।

इस प्रकार अज्ञानवाद ही सर्वश्रेष्ठ है। इसलिए प्रत्येक को ज्ञान को पाने के पचड़े में न पड़कर अज्ञान को ही स्वीकार करना चाहिए। ऐसे अज्ञानवादी आगे बढ़कर और कहते हैं कि ज्यों-ज्यों ज्ञान बढ़ता है, त्यों-त्यों दोष भी बढ़ता है जिस कारण जानने वाला अगर कोई अपराध करता है तो उसे दोष लगता है परंतु न जानते हुए दोष का सेवन करने वाला पाप से मुक्त रहता है परन्तु अज्ञानवादियों के यह सभी कुतर्क गलत साबित होते हैं। प्रथम यदि सभी ज्ञान परस्पर विरोधी होने के कारण गलत है तो अज्ञान भी अयथार्थ ही सिद्ध होता है। बालक एक मूर्ख की तरह अपनी मूर्खता या अज्ञानता को सही मानने का दुराग्रह नहीं करता।

प्रेम की मग्नता में भगवान के सिवाय अन्य किसी का ज्ञान ही न रहे : रमनीक

|जगत सद्‌भावना संस्थान के सानिध्य में सद्भावना संस्कृत मंदिर निर्मल विहार में आयोजित श्रीकृष्ण कथा में डॉ. रमनीक कृष्ण महाराज ने रागानुगा प्रेमा भक्ति का वर्णन किया। उन्हाेंने कहा कि जैसे पक्षियों के पंख हीन बच्चे अपनी मां की बाट जोहते हैं, जैसे भूखे बछड़े अपनी मां का दूध पीने के लिए आतुर रहते हैं और जैसे वियोगिनी पत्नी अपने प्रवासी प्रियतम से मिलने के लिए उत्कन्ट्ठित रहती है वैसे ही भक्त का मन भगवान के दर्शन के लिए छटपटाता रहता है। इस प्रगाढ़ प्रेम की पराकाष्ठा को ही रागानुगा प्रेमा भक्ति कहते हैं, इस प्रेमभक्ति में अन्न्यता का सर्वोपरि स्थान है।

अनन्य प्रेम का साधारण स्वरूप है एक भगवान के अतिरिक्त अन्य किसी में किसी प्रकार की आसक्ति न होना। प्रेम की मग्नता में भगवान के सिवाय अन्य किसी का ज्ञान ही न रहे, जहां जहां मन जाए वहीं केवल भगवान दृष्टिगोचर हों। ऐसे होते होते अभ्यास हो जाने पर अपने आप की विस्मृति होकर केवल भगवान की स्मृति रह जाए। प्रेम करने का हेतु भी केवल परमेश्वर या उनका प्रेम ही होना चाहिए।

0

आज का राशिफल

मेष
Rashi - मेष|Aries - Dainik Bhaskar
मेष|Aries

पॉजिटिव- लाभदायक समय है। किसी भी कार्य तथा मेहनत का पूरा-पूरा फल मिलेगा। फोन कॉल के माध्यम से कोई महत्वपूर्ण सूचना मिलने की संभावना है। मार्केटिंग व मीडिया से संबंधित कार्यों पर ही अपना पूरा ध्यान कें...

और पढ़ें