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दिवाली निकट है:इस बार भी नहीं लग पाई शहर में एलईडी स्ट्रीट लाइट, टेक्निकल बिड में फंसा टेंडर

करनालएक महीने पहले
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  • जिन कंपनियों ने टेंडर भरा था उनके टेक्निकल डॉक्यूमेंट पूरे नहीं मिले, अभी तक फाइनल नहीं हो पाया स्ट्रीट लाइट का टेंडर, पूरे शहर में नई लाइट लगाने की है जरूरत

दिवाली का त्योहार निकट है, लेकिन इस बार फिर शहर में न तो स्ट्रीट लाइटें लग पाई और न पुरानी सोडियम लाइटों को एलईडी लाइटों में बदला जा सका है। पूरे शहर की लाइटों को एलईडी लाइटों में तब्दील करने के चक्कर में जरूरत के स्थानों पर भी नई लाइटें नहीं लग पा रही हैं। निगम अधिकारियों ने दिवाली के त्योहार से पहले स्ट्रीट लाइटों को बदलने का दावा किया था, लेकिन अधिकारियों का यह दावा स्ट्रीट लाइट के टेंडर में फंस कर फेल हो रहा है। निगम में पैसे की कड़की के मद्देनजर स्मार्ट सिटी के तहत पूरे शहर की सोडियम लाइटों को एलईडी लाइटों में बदलने और करीबन 5 हजार नई लाइटें लगाने का प्रोजेक्ट बनाया गया है।

नए टेंडर के तहत 25 हजार एलईडी लाइटों का प्रोजेक्ट बनाया गया है। इस कार्य के लिए नगर निगम की ओर से आमंत्रित किए गए टेंडर में पांच कंपनियों ने टेंडर भरा था। जब स्मार्ट सिटी के अधिकारियों ने इस कंपनियों की टेक्निकल बिड खोली तो उसके डॉक्यूमेंट में कई कमियां मिली। अब स्मार्ट सिटी प्रबंधन की तरफ से इन कंपनियों को टेंडर डॉक्यूमेंट्स पूरे करने का समय दिया गया है। अगर इस माह में जल्द ही कंपनियां अपने डॉक्यूमेंट पूरा कर लेंगी तो उनके फाइनेंशियल बिड खोली जाएंगी और जिस कंपनी के रेट नियमों के अनुसार सही होंगे उसे वर्क अलॉट किया जाएगा, लेकिन अगर टेक्निकल बिड के कागजात पूरे नहीं होते हैं तो फिर दोबारा से टेंडर आमंत्रित किया जाएगा।

पिछले तीन साल से लटका हुआ है एलईडी लाइट्स का प्रोजेक्ट

शहर में एलईडी लाइट्स प्रोजेक्ट पिछले तीन सालों से लटका हुआ है। पहले शहरी स्थानीय निकाय निदेशालय स्तर पर इसका टेंडर निकाला गया था, जिसके रेट पर आपत्ति जताते हुए नगर निगम हाउस ने प्रस्ताव पास कर उसे सरकार से निरस्त करवा दिया था। इसके बाद नगर निगम की ओर से एक साल पहले खुद स्ट्रीट लाइट लगाने का प्लान तैयार किया गया, लेकिन यह प्रोजेक्ट भी इससे पहले कि सिरे चढ़ता बजट का मुद्दा सामने आ गया। इसके बाद तकरीबन छह माह पहले से सीएम के निर्देश पर इस प्रोजेक्ट को स्मार्ट सिटी के तहत शामिल गया। स्मार्ट सिटी के तहत इस टेंडर लगाया गया, लेकिन टेक्निकल बिड पर आकर ही काम अटका हुआ है। चार कंपनियों ने टेंडर भरा लेकिन टेक्निकल बिड में उनके कागजात अधूरे पाए गए हैं। अब इन्हें इसी माह में जल्द ही कागजात पूरे करने के लिए कहा गया है।

नई अप्रूव्ड कॉलोनियों में 5000 स्ट्रीट लाइटों की है जरूरत

शहर में सरकार की ओर से नई अप्रूव्ड कॉलोनियों में तकरीबन 5000 स्ट्रीट लाइटों की जरूरत है। इन कॉलोनियों की अधिकतर गलियां अंधेरे में डूबी रहती हैं। इसके अलावा कॉलोनियों में लगी बहुत सी पुरानी लाइटें भी रिप्लेसमेंट होने वाली है। जो कभी जल जाती है तो कभी बंद रहती हैं।

शहर के सबसे व्यस्त मार्ग पर स्ट्रीट लाइट न होने से छाया अंधेरा

शहर के सबसे व्यस्त मार्ग घोघडीपुर रेलवे ओवब्रिज से लेकर नमस्ते चौक तक स्ट्रीट लाइटें नहीं हैं। जबकि इस सड़क पर वाहनों का रस बना रहता है। भारी वाहनों के आवागमन के कारण सड़क भी खस्ताहाल है। इसके बावजूद इस सड़क पर अंधेरा रहता है।

कंपनियों को इसी माह में जल्द ही डॉक्यूमेंट पूरे करने के लिए कहा गया

4 कंपनियों ने टेंडर भरा है। स्ट्रीट लाइटों को डैमो भी दिखाया है, लेकिन जब इनकी फाइनेंशियल बिड खोली गई तो डॉक्यूमेंट अधूरे पाए गए। इन्हीं कंपनियों को इसी माह में जल्द ही डॉक्यूमेंट पूरे करने के लिए कहा गया है। इसके बाद फाइनेंशियल बिड खोली जाएगी। अगर इनके डॉक्यूमेंट पूरे नहीं होते हैं तो दोबारा से टेंडर कॉल करना पड़ेगा। रमेश मढाण, जीएम, करनाल स्मार्ट सिटी लिमिटेड, करनाल।

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