रूट पर सर्विस प्रभावित:रोडवेज को 4 किमी. दूर बसों में डीजल डलवाने से समय हो रहा खराब, हर माह ~ 5 लाख का नुकसान

कुरुक्षेत्र5 दिन पहलेलेखक: मुनीष मुंडे
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पेट्रोल पंप पर तेल डलवाती रोडवेज की बसें। - Dainik Bhaskar
पेट्रोल पंप पर तेल डलवाती रोडवेज की बसें।

रोडवेज के पास अपना खुद का पेट्रोल डीजल पंप है, लेकिन इस पंप से रोडवेज बसों को अब तेल नहीं मिल रहा। पिछले ढाई माह से भी ज्यादा समय से उक्त पंप बंद है। अब बसों में तेल के लिए नई व्यवस्था बनाई है, लेकिन यह व्यवस्था जहां कर्मचारियों के लिए सिरदर्द बनी है। वहीं इसमें जहां समय की बर्बादी हो रही है। वहीं यह सिस्टम महंगा भी पड़ रहा है।

महंगा होने के कारण ही पानीपत रिफाइनरी से तेल खरीदना बंद किया था। अब शहर के एक प्राइवेट पंप से डीजल डलवाया जा रहा है। इस सिस्टम के कारण रोडवेज को भी हर माह करीब पांच लाख का नुकसान झेलना पड़ रहा है। वहीं जिले में एक ही पेट्रोल पंप से तेल लेने के कारण चालकों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है।

बस स्टैंड परिसर में आकर ड्राइवरों को निजी पेट्रोल पंप तक की दूरी नापनी पड़ती है। यही नहीं पिपली होकर गुजरने वाली लंबे रूट की बसों को भी तेल डलवाने के लिए नेशनल हाईवे से दूर आना पड़ रहा है। इसके चलते यात्रियों को आधे तक कुरुक्षेत्र में ही घूमना पड़ता है। लेट होने के कारण आए दिन यात्री चालक परिचालक से उलझ रहे हैं।

बता दें कि रोडवेज की वर्कशॉप में खुद का तेल पंप लगा है। पहले इसमें पानीपत रिफाइनरी से टैंकर लाकर यहां का टैंक फुल करते थे। इसके बाद इस पंप से बसों में तेल भरते थे, लेकिन पानीपत रिफाइनरी से तेल खरीदना रोडवेज को महंगा पड़ रहा था। तब हर माह दस लाख रुपए तक अतिरिक्त का भार पड़ रहा था। इसे देखते हुए कुरुक्षेत्र रोडवेज ने रिफाइनरी से करार खत्म कर दिया। इसके बाद नई व्यवस्था बनाई।

इसमें शहर के एक पेट्रोल पंप के साथ करार किया। उक्त पंप सौ फुटा रोड पर स्थित है। खुद के पंप से तेल भरने के चलते पहले समय कम लगता था। वहीं तेल की भी बचत होती थी। एक तरफ दस लाख का खर्च तो रोडवेज ने बचाया, लेकिन अब दूसरी तरफ खर्च बढ़ गया।

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रोज 18 हजार से ज्यादा चुका रहे, दो लीटर ज्यादा खप रहा तेल
बता दें कि पेट्रोल पंप की दूरी नए बस स्टैंड परिसर से चार किलोमीटर पड़ती है। ऐसे में पेट्रोल पंप से डीजल डलवाकर आने में 8 किलोमीटर बस ज्यादा चलानी पड़ रही है। बस की एवरेज 4 किलोमीटर है। ऐसे में बस में दो लीटर अधिक तेल लग रहा है। आए दिन रोडवेज की करीब 90 बसें पेट्रोल पंप पर तेल डलवाने के लिए पहुंचती हैं। इससे हर रोज 18 हजार का तेल अतिरिक्त लग रहा है। पूरे माह की बात करे तो करीब 5 लाख रुपए का नुकसान रोडवेज को झेलना पड़ रहा है।

अनदेखी: रूट से हटकर हादसा हो तो विभाग की नहीं जिम्मेदारी
नियमानुसार बसों की रोटेशन होती है। चालक परिचालक रूट से हटकर बस नहीं चला सकता। अगर इस दौरान कोई घटना घटित हो जाए तो विभाग की जिम्मेदारी नहीं बनती। वहीं तेल डलवाने के लिए चालक-परिचालक को रूट से हटकर 8 किलोमीटर बस चलानी पड़ रही है। ऐसे में यदि कोई घटना होती है तो इसके लिए विभाग चालक परिचालक पर ही जिम्मा डालेगा। ऐसे में कर्मचारियों में भी डर बना रहता है।

बसों में लगाएं बड़ी टंकी, होगी बचत
ऑल हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन प्रधान नरेंद्र पांचाल का कहना है कि बसों की टंकी में तेल कम आने के कारण महाप्रबंधक को बसों की टंकी बढ़ाने को लेकर पत्र दे चुके हैं। पांचाल ने कहा कि अन्य डिपों में वर्कशॉप से ही बसों को तेल मिल रहा है, लेकिन कुरुक्षेत्र में पेट्रोल पंप पर ही जाकर तेल डलवाना पड़ रहा है। जिससे बसों में दो लीटर अतिरिक्त तेल लगने से रोडवेज को नुकसान हो रहा है। पांचाल ने कहा की लोंग रूट की बसों की टंकी बढ़ाई जाए।

काटना पड़ता चक्कर
वहीं कुरुक्षेत्र रोडवेज की जो बसें लंबे रूट की हैं, उन्हें ज्यादा दिक्कत होती है। मसलन दिल्ली से अमृतसर जा रही बस का यदि तेल खत्म होने को होता है तो उसे शहर के पंप से ही तेल डलवाना होगा। ऐसे में जीटी रोड से बस शहर में उक्त पंप तक यात्रियों के साथ ही पहुंचती है। इससे यात्रियों का भी समय बर्बाद होता है। इसके लिए पिपली के साथ लगते पेट्रोल पंपों पर तेल डलवाने की व्यवस्था होनी चाहिए।
कर में नहीं ला सकते डीजल
: अशोक कुमार

रोडवेज महाप्रबंधक अशोक कुमार मुंजाल ने कहा कि टैंकर में डिपो में पेट्रोल पंप से डीजल लेकर आने की उन्हें अनुमति नहीं है। इसे लेकर विभागीय उच्च अधिकारियों से बातचीत चल रही है। माना कि पेट्रोल पंप से डीजल डलवाने में विभाग को नुकसान जरूर हो रहा है। उन्होंने कहा कि इसे लेकर बातचीत हो रही है। जल्द ही इसका भी हल निकाला जाएगा।

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