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आंदोलन का 91वां दिन:114 साल बाद अंग्रेजों के जमाने के आंदोलन के रंग में रंगे किसान

कुंडली बॉर्डर/टिकरी बॉर्डर5 दिन पहलेलेखक: जितेंद्र बूरा, धीरज शर्मा
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बहादुरगढ़ | पगड़ी संभाल दिवस पर रंग-बिरंगी पगड़ी पहने हुए। - Dainik Bhaskar
बहादुरगढ़ | पगड़ी संभाल दिवस पर रंग-बिरंगी पगड़ी पहने हुए।
  • पगड़ी संभाल दिवस पर कुंडली बॉर्डर पर पहुंचे भगत सिंह के परिवार के सदस्य, अजीत सिंह को दी श्रद्धांजलि
  • ज्यादातर किसानों ने क्षेत्रीय पगड़ी पहनी, हरियाणवियों ने बांधा खंडका
  • जितेंद्र बूरा, धीरज शर्मा |

ब्रिटिश सरकार वर्ष 1907 में किसान विरोधी तीन कानून लेकर आई थी। इसके 114 साल बाद किसान फिर विरोध के उसी रंग में नजर आए। अंग्रेजों के जमाने में सरदार भगत सिंह सिंह के चाचा अजीत सिंह ने पगड़ी संभाल जट्टा अांदोलन शुरू किया था। उस समय पुरुष रंग-बिरंगी पगड़ी पहनकर आंदोलन में शामिल हुए थे और महिलाएं पीले दुपट्‌टे में पहुंची थीं। उसी तर्ज पर किसानों ने रंग-बिरंगी पगड़ियां पहनीं व महिलाएं पीले दुपट्‌टे में नजर आईं।

कुंडली, टिकरी व खेड़ा बॉर्डर पर मंगलवार को शहीद भगत सिंह के चाचा सरदार अजीत सिंह का जन्मदिवस पगड़ी संभाल दिवस के रूप में मनाया गया। मंच पर अजीत सिंह और स्वामी सहजानंद सरस्वती की तस्वीर पर किसान नेताओं ने पुष्पांजलि दी। प्रदर्शन में शामिल किसानों ने अपनी क्षेत्रीय पगड़ी पहनी। भगत सिंह के भतीजे अभय सिंह संधू को पगड़ी बांधी गई और उन्हें संयुक्त किसान मोर्चा के मंच पर सम्मानित किया गया। पंजाब के किसान हरी, लाल व पीली पगड़ी में नजर आए। वहीं, हरियाणा के किसानों ने अपनी प्राचीन संस्कृति के तहत सफेद रंग का खंडका बांधा।

विरोध का तरीका एक सदी पुराना: अंग्रेजों के खिलाफ किसानों ने पहनी थी रंग-बिरंगी पगड़ी, महिलाअों ने पीले दुपट्टे

बुजुर्गों ने युवाओं को सिखाई पगड़ी बांधनी

हरियाणा में बुजुर्ग सफेद रंग का खंडका यानी पगडी बांधते हैं। मंगलवार को बुजर्गों ने आंदोलन में शामिल युवाओं को पगड़ी बांधना सिखाया। कैथल के 85 वर्षीय बुजुर्ग टेका ने बताया कि वे 15 साल की उम्र में पगड़ी बांधने लगे थे। शादी के अगले दिन भी ससुराल में पगड़ी बांधकर गया था। पगड़ी किसान की पारंपरिक शान है। नए युवा पगड़ी कम बांधते हैं, लेकिन आज उन्होंने युवाओं को पगड़ी बांधना सिखाया। पिछले डेढ़ महीने से वे आंदोलन में हैं।

1 हाथ गंवाया, अब 1 हाथ से बांधते हैं पगड़ी

मंच के पास किसानों के बीच कुरुक्षेत्र के किसान सुरजीत सिंह भी पहुंचे। उन्होंने बताया कि वर्ष 1990 में खेत में काम करते हुए उन्हें बिजली करंट लग गया था। इससे एक हाथ गंवाना पड़ा। मंच पर उन्होंने एक हाथ से पगड़ी बांधी। उन्होंने बताया कि वह अब एक हाथ से कृषि भी करते हैं और पगड़ी बांधने के साथ अन्य कार्य कर लेते हैं। आंदोलन में भी किसानों का हक लेने के लिए पांच दिन से आए हैं। वे कुछ दिन आते हैं और फिर वापस जाते हैं।

युवा बोले- बुजुर्गों की पगड़ी का सम्मान

आंदोलन में युवाओं की भागीदारी भी कम नहीं हैं। बुजुर्ग बैठे हैं तो व्यवस्था बनाने में युवा भागीदारी दे रहे हैं। पंडाल बना रहे हैं, लंगर सेवा में भागीदारी दे रहे हैं। कैथल जिले के युवा दीपक ने बताया कि वह चंडीगढ़ में ऑनलाइन सामान भेजने वाली कंपनी में जॉब करते थे। आंदोलन के लिए छुट्‌टी नहीं मिली तो नौकरी छोड़ दी। 26 को युवा किसान दिवस मनाया जाएगा। उधर, रेवाड़ी के खेड़ा बॉर्डर पर किसान राजस्थानी पगड़ी में नजर आए।

ताजा हुईं यादें - 1907 के आंदोलन में अंग्रेजों से जीते थे

वर्ष 1907 में भगत सिंह के चाचा अजीत सिंह ने अंग्रेजों के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ ‘पगड़ी संभाल जट्टा’ आंदोलन किया था। अजीत सिंह ने आगे बढ़कर किसानों को संगठित किया और पूरे पंजाब में सभाओं का सिलसिला शुरू हुआ, जिनमें लाला लाजपत राय को बुलाया गया।

अंग्रेजों के एक्ट में नया कालोनी एक्ट, जिसके तहत किसानों की जमीन जब्त हो सकती थी, बढ़ा हुआ मालिया (राजस्व) और बारी दोआब नहर के पानी के बढ़े हुए दर जैसे कानून थे। तब एक-एक मार्मिक कविता पढ़ी गई थी, जिसे पगड़ी संभाल जट्टा का नाम दिया गया था। उस समया किसानों के आगे अंग्रेजी सरकार ने घुटने टेक दिए थे और तीनों किसान विरोधी कानूनों को वापस लेना पड़ा था। अब उसी तर्ज पर यह दिवस मनाया गया। ​​​​​​​

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