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कानूनी लड़ाई:कोर्ट के आदेश पर भी मां को नहीं सौंपी 4 साल की बच्ची, दादा पर अपहरण का केस

नारायणगढ़9 महीने पहले
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  • बच्ची की चाहत में ससुर व पुत्रवधू मेंएडीए ने दी राय- कानून के मुताबिक पिता के बाद नाबालिग बच्चे की मां ही नैचुरल गार्जियन

संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी की शिकायत पर पुलिस ने गांव पंजलासा के रूपचंद के खिलाफ सरकारी काम में बाधा डालने, अपहरण और गुमशुदगी का केस दर्ज किया है। यह मामला डीडीए की राय के बाद दर्ज किया गया।

गांव पंजलासा का यह मामला संवेदनाएं और भावनाओं से जुड़ा है। मामला 4 साल की एक बच्ची का है, जिसे दादा अपना वारिस और मां अपना सहारा मान रही है। दरअसल, रायपुररानी की प्रीति की शादी 2014 में पंजलासा के कैलाश चंद से हुई थी। प्रीति ने एक बेटी को जन्म दिया। अप्रैल 2020 में कैलाश चंद की मौत हो गई। कुछ दिन बाद ही प्रीति मायके रायपुररानी चली गई।

बच्ची की परवरिश को लेकर दादा और मां के बीच विवाद शुरू हो गया। एडवोकेट कुलविंदर काैर ने एसडीएम की अदालत में याचिका दायर की। वहीं मामला स्थानीय अदालत में चला गया। अब यह मामला हाईकोर्ट में भी विचाराधीन है। प्रीति ने बताया कि हाईकोर्ट में 5 अप्रैल को सुनवाई होनी है। फिलहाल पुलिस ने रूपचंद के खिलाफ केस दर्ज किया है।

सर्च वारंट के बाद भी नहीं दी बच्ची

महिला प्रीति ने बच्ची के लिए नारायणगढ़ कोर्ट में घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 का दावा दायर किया था। उपमंडल मजिस्ट्रेट के आदेशों की पालना करते हुए पुलिस ने 3 फरवरी को पंजलासा में रूपचंद के घर जाकर बच्ची दिलवाने का प्रयास किया था, जहां पर ताला लगा हुआ था। पड़ोस में रहने वाले लोगों से पुलिस को पता चला कि रूपचंद पिछले काफी समय से इस घर में नहीं रहता।

वह अब राजपुरा की प्रताप काॅलोनी में रहता है। वह पंचकूला के केंद्रीय विद्यालय रामगढ़ में नौकरी करता है। उसे कोर्ट के 21 जनवरी के आदेश के बारे में बताया गया। उसे बच्ची को प्रीति को सौंपने के लिए कहा गया, लेकिन रूपचंद ने बच्ची को नहीं दिया। इसके बाद कोर्ट के सर्च वारंट के 5 फरवरी की प्रति रूपचंद को दिखाई। इसके बाद भी उसने महिला प्रीति को उसकी बच्ची चाहत को वापस नहीं दिया।

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