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  • 82 Patients Were Found In A Day, So Far 1650 Have Been Received, The OPD Of Fever Reached 18 Thousand In Hospitals, Ground Report Revealing The Claims Of The Administration And The Government On The Increasing Dengue Cases In The State

डेंगू का डंक:एक दिन में 82 मरीज मिले, अब तक 1650 मिल चुके, अस्पतालों में बुखार की ओपीडी 18 हजार तक पहुंची, प्रदेश में लगातार बढ़ रहे डेंगू के मामलों पर प्रशासन और सरकार के दावों की पोल खोलती ग्राउंड रिपोर्ट

हरियाणाएक महीने पहले
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अम्बाला सिटी के सिविल अस्पताल के ट्राॅमा सेंटर में बनाए गए डेंगू वार्ड में दाखिल मरीज। - Dainik Bhaskar
अम्बाला सिटी के सिविल अस्पताल के ट्राॅमा सेंटर में बनाए गए डेंगू वार्ड में दाखिल मरीज।
  • लार्वा पर कार्रवाई नोटिस तक ही सीमित
  • फॉगिंग मशीनों की कमी, बजट भी नहीं
  • जिला अस्पतालों में ब्लड सेपरेटर मशीन नहीं, जहां हैं वहां भी खराब पड़ी

प्रदेश में डेंगू का कहर बढ़ता जा रहा है। गुरुवार को ही प्रदेशभर में 82 मरीज सामने आए हैं। अब तक इस सीजन में प्रदेश के अंदर डेंगू के 1650 मामले सामने आ चुके हैं। वहीं, अस्पतालों में बुखार की ओपीडी भी प्रतिदिन 18 हजार के पार पहुंच गई है, लेकिन इस सब के बावजूद विभाग इसके रोकथाम की व्यवस्था करने में नाकाम साबित हो रहा है।

प्रदेश के अलग-अलग जिलों में इसकी रियलिटी चैक कराई तो सामने आया कि विभाग की टीम एक बार दौरा करने के लिए जाती है और जहां लार्वा मिलता है, वहां नोटिस देकर बात खत्म कर देते हैं। इसके बाद दोबारा टीम जाकर भी नहीं देखती।

वहीं, शहरी क्षेत्र में फॉगिंग हो रही है, लेकिन ग्रामीण एरिया में ज्यादातर जगह या तो मशीनें खराब पड़ी हैं या दवाई नहीं मिली है, जिसके चलते फॉगिंग नहीं हो रही। इस सब के कारण डेंगू की रोकथाम नहीं हो पा रही। दूसरी तरफ, डेंगू के मरीज अस्पतालों में जा रहे हैं, वहां भी उन्हें परेशान होना पड़ रहा है। ज्यादातर जिलों के सरकारी अस्पतालों के अंदर ब्लड सेपरेटर मशीन ही नहीं है और जहां पर हैं उनमें से भी कई जगहों पर मशीनें खराब पड़ी हैं।

पूरानी फाॅगिग मशीनें रिपेयर नहीं हुई

  • टीमें शहर और गांवों में निरीक्षण के लिए जा रही हैं और जहां लार्वा मिलता है, उन्हें नोटिस दे रहे हैं।
  • एक बार जिस जगह का निरीक्षण हो जाता है वहां नोटिस देने के बाद दोबारा कोई जाकर नहीं देख रहा।
  • स्वास्थ्य विभाग के पास स्टाफ की कमी है, जिसके कारण हर जगह समय से निरीक्षण नहीं हो पा रहा है।
  • शहरी क्षेत्र में ज्यादातर जगह फॉगिंग हो रही है, लेकिन मशीनों की कमी के कारण रोज नहीं हो पा रही।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में काफी जगह मशीनें ही नहीं हैं और जहां हैं, वहां फॉगिंग के लिए दवाई आदि की व्यवस्था नहीं है।
  • ग्रामीण क्षेत्र में काफी समय से सरपंचों, ब्लाॅक समिति और जिला परिषद आदि का कार्यकाल पूरा हो रखा है इसलिए न तो कोई पुरानी मशीनों को रिपेयर करवाने वाला है और न ही नई खरीदने वाला। दवाई भी कहीं से उपलब्ध नहीं हो रही।
  • ज्यादातर जगह 5 से 6 साल पुरानी मशीनें हैं, जिनमें से काफी खराब हो गई हैं और इसकी वजह से फॉगिंग नहीं हो रही। बजट की कमी भी सामने आ रही है।

ब्लड सेपरेटर मशीन हैं, चलाने वाला नहीं

  • प्रदेश के कई जिलों के सिविल अस्पतालों में ब्लड सेपरेटर मशीन ही नहीं हैं। कई जिलों में करीब एक करोड़ खर्च करके नया सेटअप तो लगा दिया, लेकिन इन्हें चलाया नहीं गया है।
  • कई जिलों में ब्लड सेपरेटर मशीनें खराब पड़ी हैं, लेकिन इन्हें कोई ठीक नहीं करवा रहा है।
  • सरकारी अस्पतालों में सुविधा न होने के कारण मरीजों के लिए प्राइवेट अस्पतालों से 10 से 15 हजार खर्च कर प्लेटलेट्स खरीदनी पड़ रही हैं।
  • प्रदेश के कई जिलों में तो प्राइवेट में भी प्लेटलेट्स नहीं मिल रही और परिजनों को दूसरे जिलों से खरीद कर लानी पड़ रही हैं।
  • सरकार की तरफ से डेंगू का टेस्ट करने के अधिकतम 600 रुपए तय किए गए हैं, लेकिन कई जगहों पर प्राइवेट लैब वाले 1 हजार रुपए तक भी ले रहे हैं।
  • कई जिलों में अब भी रेपिड टेस्ट हो रहे हैं, जबकि इन टेस्टों को स्वास्थ्य विभाग मानता नहीं, सरकारी अस्पतालों में टेस्टिंग सुविधा की कमी है।

ग्राउंड रिपोर्ट: जानिए प्रदेश के किस जिले में डेंगू की क्या है स्थिति, ग्रामीण एरिया में कहीं मशीनें खराब तो कहीं दवाई नहीं मिली

  • जींद: सरकारी अस्पताल में प्लेटलेट्स की सुविधा नहीं है। करनाल से मंगवाने पड़ते हैं। 299 गांव में से फॉगिंग मशीनें मात्र 66 गांवों के पास हैं। स्वास्थ्य विभाग के पास केवल 1 और नगर परिषद के पास भी एक ही बड़ी मशीन है।
  • सोनीपत: जीटी रोड बेल्ट के गांवों में ज्यादा मरीज हैं। नागरिक अस्पताल पर ब्लड सेपरेटर मशीन नहीं है। 35 किमी. दूर खानुपर जाना पड़ता है। प्राइवेट में 11 हजार की खरीदनी पड़ती हैं। गोहाना क्षेत्र के गांवों में फॉगिंग शुरू नहीं कराई है।
  • पलवल: प्लेटलेट्स फ्री नहीं मिल रही, एक यूनिट प्लेटलेट्स के लिए 11 से 12 हजार रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं। जिला अस्पताल में ब्लड सेपरेटर मशीन नई आई है, लेकिन अभी चालू नहीं हो सकी है। सीएमओ का कहना है कि दो- तीन दिन में चला दी जाएगी।
  • कुरुक्षेत्र: जिला अस्पताल में अभी तक मरीजों को प्लेटलेट्स की सुविधा नहीं मिली। मरीजों को निजी लेबोरेटरी, करनाल व चंडीगढ़ से प्लेटलेट्स खरीदनी पड़ रही हैं।
  • करनाल: टेस्ट के लिए 600 रुपए निर्धारित किए हुए हैं। निजी अस्पतालों में लैब संचालक ज्यादा पैसे वसूल रहे हैं।
  • कैथल: शहर में जहां-जहां केस मिलते हैं, वहां पर नगर परषिद ने एक बार फॉगिंग कराई है। इसके बाद वहां के क्या हालात हैं। यह जानने के लिए कोई अधिकारी नहीं पहुंचता। कोई बजट जारी नहीं किया गया है। सिविल अस्पताल में ब्लड सेपरेटर मशीन है, लेकिन वर्किंग में नहीं है। {पानीपत: एक माह से प्लेटलेट्स की डिमांड राेजाना 20-25 बढ़ गई है। सरकारी अस्पतालों में प्लेटलेट्स मिलने की काेई व्यवस्था नहीं है।
  • महेंद्रगढ़: पंचायतें भंग होने के कारण फॉगिंग का कार्य ठप पड़ा है। फॉगिंग मशीनों का अभाव है।
  • हिसार: एक माह में प्लेटलेट्स की डिमांड तीन गुना तक बढ़ी है। लार्वा मिलने पर नोटिस तो दिए हैं, लेकिन किसी पर जुर्माना नहीं लगाया है।
  • फरीदाबाद: फॉगिंग मशीनें 10-11 साल पुरानी हैं। जापानी तकनीक की मशीनें है। खराब होने पर मेंटेनेंस के लिए कोई वर्कशाॅप नहीं है। किसी तरह जुगाड़ लगाकर काम चलाना पड़ रहा है। नगर निगम ने कोई बजट अलॉट नहीं किया है।
  • सिरसा: सरकारी अस्पतालों में प्लेटलेट्स फ्री नहीं मिल रही। अब तक डबवाली क्षेत्र में फॉगिंग हुई है।
  • फतेहाबाद: नागरिक अस्पताल में प्लेटलेट्स की सुविधा न होने से अग्रोहा रेफर किया जा रहा है। गांवों में फॉगिंग नहीं हो रही है।
  • यमुनानगर: 15 दिन पहले 10 यूनिट तक प्लेटलेट्स की डिमांड थी, अब 40 यूनिट तक पहुंच रही है। ग्रामीण एरिया में फॉगिंग नहीं हुई। स्वास्थ्य विभाग के पास दो मशीनें हैं, जो नहीं चल रही।
  • अम्बाला: गांव में बीडीपीओ फॉगिंग नहीं करवा पा रहे, लोग स्वास्थ्य विभाग को लिख रहे हैं।
  • राेहतक: एक माह में प्लेटलेट्स की 110 यूनिट तक डिमांड बढ़ी है। 4 मशीनें खराब थी। इनकी अब मरम्मत कराई गई है।
  • गुड़गांव: एक माह में प्लेटलेट्स की डिमांड बढ़कर 10 गुणा हो गई है। प्राइवेट लैब वाले टेस्ट के नाम पर ज्यादा पैसे की वसूली कर रहे हैं।
  • रेवाड़ी: सिविल अस्पताल में करीब डेढ़ साल से सेल सेपरेटर मशीन उपलब्ध है। पहले लाइसेंस नहीं मिलने से और अब बिजली उपकरणों के अभाव में मशीन शुरू नहीं हो सकी है।
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