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राव इंद्रजीत ने बिछाई ऐसी बिसात, चित्त हुए ‘जयचंद‘:BJP में बढ़ता कद नहीं आ रहा था भाजपाइयों को ही रास, अजय जांगड़ा को उपप्रधान बनाकर दे दी सबको मात

रेवाड़ी17 दिन पहलेलेखक: मुकेश कुमार
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अजय जांगड़ा को गुलदस्ता भेंट करके बधाई देते पार्षद। - Dainik Bhaskar
अजय जांगड़ा को गुलदस्ता भेंट करके बधाई देते पार्षद।
  • चुनाव भले ही छोटा हो, लेकिन सियासी तौर पर यह काफी अहम था
  • 17 में से 16 पार्षदों को अपने पाले में लाने में कामयाब हुए राव इंद्रजीत

अहीरवाल की राजनीति में अहम भूमिका निभाने वाले केंद्रीय मंत्री राव इन्द्रजीत सिंह की हरियाणा की सिसायत में अपनी एक अलग ही पहचान है। बुधवार को रेवाड़ी में हुआ धारूहेड़ा नगर पालिका के उपप्रधान का चुनाव भले ही छोटा हो, लेकिन सियासी तौर पर यह काफी अहम था, क्योंकि भाजपा के भीतर राव इंद्रजीत का बढ़ता कद भाजपा के ही कुछ नेताओं को रास नहीं आ रहा था।

इसलिए छोटे से चुनाव में भाजपा को दो धड़ों में बांट दिया गया। लेकिन हुआ वहीं तो राव इंद्रजीत को मंजूर था। क्योंकि एक दिन पहले तक राव समर्थित धारूहेड़ा के वार्ड नंबर-5 से पार्षद अजय जांगड़ा उर्फ सत्यनारायण के साथ 11 पार्षद थे। लेकिन राव इंद्रजीत ने कश्मीर की वादियों से लौटने के बाद बचे हुए 6 पार्षदों को पाले में लाने के लिए प्लान तैयार किया।

मंगलवार रात से ही राव इंद्रजीत सिंह के निजी सचिव रवि यादव खुद पार्षदों से बात कर रहे थे और सुबह होते-होते धारूहेड़ा के एक टूरिस्ट कॉम्पलेक्स में 11 से बढ़कर पार्षदों की संख्या सीधे 16 पर पहुंच गई। यहां सभी को अजय जांगड़ा के समर्थन में एकजुट किया गया। उसके बाद सभी को एक बस में बैठाकर सीधे धारूहेड़ा के नगर पालिका कार्यालय में भेजा गया।

जहां सभी ने राव समर्थित अजय जांगड़ा के पक्ष में वोट दिया और जांगड़ा के सिर पर निर्विरोध नगर पालिका के उपप्रधान का ताज सजा। इस तरह राव इंद्रजीत की बिछाई गई सियासी बिसात में पार्टी के ही 'जयचंद' फेल हो गए। धारूहेड़ा नगर पालिका में पार्षद व चेयरमैन के चुनाव का नतीजा 31 दिसंबर 2020 को आया था। रेवाड़ी नगर परिषद में भाजपा की उम्मीदवार पूनम यादव को जीत मिली थी।

जबकि धारूहेड़ा में निर्दलीय उम्मीदवार कंवर सिंह यादव ने जीत दर्ज की थी। धारूहेड़ा नपा चेयरमैन का चुनाव जीतने के बाद कंवर सिंह की फर्जी मार्कशीट का मामला गर्मा गया था। जांच में उनकी मार्कशीट फर्जी पाए जाने पर चुनाव आयोग ने शपथ लेने से पहले ही उन्हें अयोग्य ठहरा दिया। लंबे समय तक पार्षदों की शपथ अटकी रही। बाद में उनकी शपथ हुई तो उपप्रधान को लेकर लॉबिंग शुरू हो गई।

एक सप्ताह पहले ही उपप्रधान का चुनाव कराने के लिए आदेश हुआ था। डीसी की तरफ से बतौर चुनाव अधिकारी रेवाड़ी के एसडीएम रविंद्र यादव को नियुक्त किया गया था। इससे पहले भाजपा में उपप्रधान को लेकर दो गुट बने। एक गुट केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह व दूसरा गुट भाजपा संगठन के ही कुछ नेताओं द्वारा बनाया गया था। चुनाव से पहले संगठन गुट ने अपने साथ 6 पार्षदों का दावा किया था।

धारूहेड़ा नगर पालिका में कुल 17 पार्षद हैं। ऐसे में कोरम पूरा करने के लिए 12 पार्षद चाहिए थे। दूसरे गुट की तरफ 6 पार्षद साथ होने की बात सामने आते ही राव गुट के पार्षदों को कश्मीर की वादियों में भेज दिया गया था, लेकिन चुनाव से ठीक एक दिन पहले रात में धारूहेड़ा पहुंचे पार्षदों के साथ चर्चा के बाद राव ने खेमे में 5 पार्षद और अपने साथ मिला लिए।

वार्ड नंबर-1 से पार्षद व पूर्व उपप्रधान सावित्री मुकदम ही चुनाव से गैरहाजिर हुईं। जबकि बचे हुए 16 पार्षदों ने अजय जांगड़ा के नाम पर सहमति जताते हुए उपप्रधान के रूप में उन्हें निर्विरोध चुना।

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