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शहद उत्पादन:मधुमक्खी पालन के लिए नहरी एरिया बना पसंदीदा जगह

झांसा16 दिन पहलेलेखक: पवन चोपड़ा
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  • मधुमक्खी पालन केंद्र में शहद उत्पादकों को दी जा रही ट्रेनिंग, सब्सिडी पर मिल रहे बेहतर डिब्बे

गांवों में लोग अब खेती के साथ साथ मधुमक्खी पालन कर शहद जुटा कमाई कर रहे हैं। वहीं मधुमक्खी पालक अब घूम घूम कर भी शहद उत्पादन कर रहे हैं। प्रदेश से होकर गुजर रही नरवाना ब्रांच नहर शहद उत्पादकों की पसंदीदा जगह बनी हुई है। सूरजमुखी फसल के दौरान इस एरिया में ही नहर किनारे सैकड़ों की तादाद में मधुमक्खी के डिब्बे रखे हुए नजर आते हैं।

झांसा व आसपास के क्षेत्र में हजारों एकड़ सूरजमुखी की फसल होती है। वहीं नहर किनारे वन विभाग के द्वारा लगाए फलदार पेड़ भी मधुमक्खी पालन में कारगर साबित हो रहे हैं। मधुमक्खियों के शहद बनाने का मुख्य स्त्रोत उक्त फूल है। प्रदेशभर में सबसे ज्यादा खेती उत्तरी हरियाणा में हो रही है। वहीं नहर पास होने के कारण जहां मधुमक्खियों को पानी के के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ती।

साथ ही पेड़ों की छाया में डिब्बे भी गर्मी से महफूज रहते हैं। कुछ समय से प्रदेश भर से मधुमक्खी पालक नहर किनारे मधुमक्खियों के लेकर डिब्बे लेकर पहुंचे हुए हैं। इनके डिब्बों में शहद उत्पादन भी हो चुका है। अब यहां से दूसरे राज्यों में रुख करेंगे। सिरसा से पहुंचे मधुमक्खी पालक कुलदीप बताते हैं कि इन दिनों फूलों से संबंधित खेती कम होती है। ऐसे में कुरुक्षेत्र का यह इलाका ही मधुमक्खी पालन के लिए अनुकूल रहता है।

हालांकि मौजूदा सत्र में मधुमक्खी पालन के लिए और दिनों की अपेक्षा खर्चा करना पड़ता है। उन्हें प्रत्येक सप्ताह 100 मधुमक्खी के डिब्बों के लिए 50 किलो चीनी का घोल मक्खियों को डालना पड़ता है, जिसके लिए करीब 1 सप्ताह में 2 हजार रुपए अतिरिक्त खर्चा होता है।

मधुमक्खी पालन के लिए 85% तक दी जाती है सब्सिडी

इजराल के सहयोग से जीटी रोड पर शाहाबाद के निकट रामनगर में मधुमक्खी पालन केंद्र स्थापित है। केंद्र के उपनिदेशक डॉक्टर बिललु यादव के मुताबिक मधुमक्खी पालन के लिए हर महीने बेसिक ट्रेनिंग दी जाती है। जिन लोगों ने यह ट्रेनिंग ली हुई, उनको नई तकनीक सिखाने के लिए एडवांस ट्रेनिंग दी जाती है। लगभग 1 सप्ताह भर की ट्रेनिंग होती है।

प्रशिक्षणार्थी का खाना-पीना व रहने जैसे सभी सुविधाएं मुफ्त मुहैया कराई जाती हैं। स्किल काउंसिल ऑफ इंडिया की तरफ से भी 200 घंटे की ट्रेनिंग दी जाती है। भारत सरकार द्वारा प्रमाण पत्र दिया जाता है। मधुमक्खी पालन के लिए सब्सिडी 85% तक दी जाती है।

मधुमक्खी का अत्याधुनिक डिब्बा जिसकी कीमत बाजार में लगभग 2410 रुपए है, वह सब्सिडी पर 640 में मुहैया कराते हैं। मधुमक्खी पालन के लिए एक व्यक्ति को 50 डब्बे दिए जाते हैं। इन दिनों ऑनलाइन ट्रेनिंग दी जा रही है। हरियाणा के अलावा विभिन्न राज्यों से हर साल एक हजार से ज्यादा किसान प्रशिक्षण लेने आते हैं।

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