• Hindi News
  • Local
  • Haryana
  • Complaint Of Illegal Possession Of Corporation's Land Reached In Front Of Haryana Deputy Chief Minister, Building Sealed On The Very Next Day

इधर शिकायत आई, उधर कार्रवाई हुई:हरियाणा के उप मुख्यमंत्री के सामने पहुंची निगम की जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायत, अगले ही दिन भवन हुआ सील

फरीदाबाद8 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
धार्मिक संगठन के भवने को सील करने की कार्रवाई करते हुए नगर निगम के अधिकारी। - Dainik Bhaskar
धार्मिक संगठन के भवने को सील करने की कार्रवाई करते हुए नगर निगम के अधिकारी।
  • संस्था का भवन निगम मुख्यालय के पीछे दशहरा ग्राउंड के सामने बना है

हरियाणा के फरीदाबाद जिले में जिला ग्रीवांस कमेटी की अध्यक्षता करने आए उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के सामने नगर निगम की जमीन पर कब्जा करने की शिकायत दी गई थी। इसमें कहा गया था कि एक धार्मिक व सामाजिक संगठन द्वारा कब्जा करके सामुदायिक भवन बनाया गया है और वहां व्यवसायिक गतिविधियां की जाती है। इस पर कार्रवाई करते हुए उप मुख्यमंत्री ने तुरंत उक्त संगठन के भवन को सील करने के आदेश जारी कर दिए, जिन पर बुधवार को अमल भी हो गया।

मंगलवार की बैठक में निगरानी समिति के सदस्य आनंदकांत भाटिया ने उप मुख्यमंत्री को बताया कि फरीदाबाद धार्मिक एवं सामाजिक संगठन नामक एक संस्था ने नगर निगम की जमीन पर कब्जा करके वहां सामुदायिक भवन बना लिया है। उस भवन में शादी ब्याह की बुकिंग करके व्यवसायिक गतिविधियां की जा रही हैं। इससे नगर निगम को कोई राजस्व नहीं मिल रहा है यानी जमीन निगम की और कमाई कोई और कर रहा है। खास बात ये है कि संस्था का भवन निगम मुख्यालय के पीछे दशहरा ग्राउंड के सामने बना है।

मामला संज्ञान में आने के बाद उप मुख्यमंत्री ने इसकी जांच निगम कमिश्नर यशपाल यादव को सौंपी। कमिश्नर ने भी बुधवार को उक्त संस्था के भवन को सील करने के आदेश जारी कर दिए। इसके कुछ ही घंटों के अंदर भवन को सील कर दिया गया। संस्था के पदाधिकारी जोगिंदर चावला का कहना है कि उप मुख्यमंत्रत्री को गुमराह किया गया है। वहां कोई व्यवसायिक गतिविधियां नहीं की जाती।

निगम सूत्रों की मानें तो फरीदाबाद धार्मिक एवं सामाजिक संगठन वर्ष 1983 से चल रही है। वर्ष 1999 में तत्कालीन ADC के कहने पर संस्था ने वहां अपना कार्यालय बना लिया था। शिकायतकर्ता आनंदकांत भाटिया का कहना है कि संस्था का पंजीकरण वर्ष 2000 में कराया गया था। रजिस्ट्रार सोसाइटी किसी सरकारी जमीन पर बनी संस्था को पंजीकृत ही नहीं कर सकती। उन्होंने ये भी बताया कि वर्ष 2012 में एक RTI लगाई गई थी, जिसमें निगम के प्लानिंग विभाग ने जानकारी दी थी कि उन्होंने कोई जमीन संस्था को नहीं दी है।

खास बात ये है कि MP और MLA के फंड से उक्त संस्था के भवन बनाए गए हैं। हैरानी की बात ये है कि एक संस्था इतने लंबे समय से निगम की जमीन पर कब्जा किए बैठी है और निगम को इसकी भनक तक नहीं लगी। संस्था के पदाधिकारी जोगिंदर चावला का कहना है कि 30 साल से अधिक पुरानी संस्था है। मामला कोर्ट में चल रहा है। जल्द ही पूरी सच्चाई सबके सामने आ जाएगी।