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मौत पर बवाल:आंदोलनकारी किसानों के परिजन ने शव पंजाब ले जाने से मना किया, सिविल अस्पताल के बाहर लगाया जाम

बहादुरगढ़2 महीने पहले
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बहादुरगढ़ में सिविल अस्पताल के बाहर रोड जाम किए बैठे आंदोलनकारी किसान और मारे गए दो किसानों के परिजन। - Dainik Bhaskar
बहादुरगढ़ में सिविल अस्पताल के बाहर रोड जाम किए बैठे आंदोलनकारी किसान और मारे गए दो किसानों के परिजन।
  • शनिवार रात सेक्टर-9 बाईपास मोड़ के पास कार में सो रहे धनौला के ट्रैक्टर मैकेनिक जनकराज की हुई थी जिंदा जल जाने से मौत
  • रविवार रात को लुधियाना के भगवानपुरा निवासी गज्जन सिंह अचानक जमीन पर गिर पड़े, पानी की बौछार में भीगने से बताए जा रहे बीमार

कृषि कानूनों के विरोध को लेकर खड़ा हुआ किसान आंदोलन अब बहादुरगढ़ का रुख कर गया है। बीते दिनों मारे गए दो किसानों के शवों को परिजन ने पंजाब ले जाने से इन्कार कर दिया। इसके बाद साथी आंदोलनकारियों ने सिविल अस्पताल के बाहर रोड जाम कर दिया। यहां तक कि टीकरी बॉर्डर से भी 100 के करीब ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भरकर किसान यहां पहुंच गए। इनकी मांग है कि दोनों साथियों को शहीद का दर्जा दिया जाए और परिजनों को मुआवजा दिया जाए।

पिछले 6 दिन से दिल्ली-हरियाणा की सीमाओं पर तनाव का माहौल है। हजारों की संख्या में पंजाब और राजस्थान के किसान सोनीपत के सिंघू बॉर्डर पर और बहादुरगढ़ के टीकरी बॉर्डर पर डटे हुए हैं। इन्हीं में शामिल पंजाब के दो किसानों गज्जन सिंह और जनकराज की बीते दिनों बहादुरगढ़ एरिया में मौत हो गई है।

पंजाब के दो किसानों गज्जन सिंह और जनकराज की फाइल फोटो।
पंजाब के दो किसानों गज्जन सिंह और जनकराज की फाइल फोटो।

आंदोलनकारियों के ट्रैक्टर ठीक करने आए थे जनकराज

बरनाला के धनौला गांव के 65 साल के जनकराज किसानों के खराब हुए ट्रैक्टर ठीक करने के लिए शनिवार रात 11 अपने तीन साथियों के साथ बहादुरगढ़ आए थे। वह सेक्टर-9 बाईपास मोड़ के पास रात को अपनी कार में सो रहे थे कि करीब डेढ़ बजे तेज धमाके के साथ उसमें आग लग गई। वह जलती हुई कार से बाहर नहीं निकल पाए और न ही समय पर लोग उनकी मदद कर पाए। जब तक उन्हें बाहर निकाला जा सका तो उनकी मौत हो चुकी थी।

24 घंटे में इस तरह गई थी दूसरी जान

इसके 24 घंटे के भीतर दूसरी जान लुधियाना का भगवानपुरा के रहने वाले 50 साल के गज्जन सिंह की गई। गज्जन सिंह बहादुरगढ़ बाईपास पर नए बस स्टैंड के पास ही था। रात को लघुशंका के लिए सड़क से कुछ कदम दूर गए थे, वहीं पर गिर गए। आसपास मौजूद किसानों ने उन्हें संभाला और अचेत अवस्था में शहर के जीवन ज्योति अस्पताल में लेकर गए। अस्पताल में डॉक्टर्स ने किसान गज्जन सिंह को मृत घोषित कर दिया। हालांकि डॉक्टर्स और पुलिस के मुताबिक मौत हार्ट अटैक से हुई बताई जा रही है, लेकिन परिचितों का कहना है कि चार दिन पहले जुलाना में हुई पानी की बौछार में भीगने के बाद से वह बीमार थे। इसी के चलते उनकी मौत हुई है।

20-20 लाख रुपए मुआवजा और परिजनों को नौकरी की मांग

इन दोनों के शवों को लेने से परिजनों ने इन्कार कर दिया। साथ किसान जत्थेबंदियों की तरफ से मांग की जा रही है कि इन दोनों को शहीद मानते हुए सरकार से 20-20 लाख रुपए का मुआवजा, एक परिजन को नौकरी दी जाए। साथ ही सरकारी कर्ज भी माफ किया जाए। दूसरी तरफ किसानों के रोष को देखते हुए पुलिस कुछ करने की स्थिति में नहीं है। अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं।

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