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किसान बिल का विरोध:ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में राशन-पानी लेकर दिल्ली कूच करेंगे हरियाणा के किसान

फतेहाबाद5 दिन पहले
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फतेहाबाद में आयोजित रैली में उपस्थित किसान संगठनों के पदाधिकारी। आज किसानों ने दिल्ली कूच की तैयारियों पर चर्चा की।
  • किसान संघर्ष समिति की बैनर तले फतेहाबाद में हुआ पगड़ी संभाल जट्टा शीर्षक से सम्मेलन

कृषि कानूनों के खिलाफ 26 नवंबर को प्रस्तावित आंदोलन को सफल बनाने के लिए शनिवार को फतेहाबाद में एक किसान सम्मेलन का आयोजन किया गया। किसान संघर्ष समिति की बैनर तले आयोजित सम्मेलन पगड़ी संभाल जट्टा में बड़ी संख्या में पंजाब हरियाणा के किसानों ने भाग लिया, सम्मेलन में महिलाओं की संख्या भी काफी रही। इसमें सरकार के विरोध में जमकर नारेबाजी की गई। रैली में फैसला लिया गया कि ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में राशन-पानी लेकर किसान जत्थेबंदियां दिल्ली कूच करेंगी।

रैली से पहले और बाद में शहर की सड़कों पर ऐसे नजर आई किसानों की भीड़।
रैली से पहले और बाद में शहर की सड़कों पर ऐसे नजर आई किसानों की भीड़।

सम्मेलन को हरियाणा के अलावा पंजाब के किसानों नेताओं ने भी संबोधित किया। किसान नेताओं ने सरकार को घेरते हुए कहा कि खुद को किसानों की हितैषी होने का दम भरने वाली भाजपा सरकार आज किसानों पर ही जुल्म कर रही है। किसानों के खिलाफ ऐसे ऐसे कानून ला रही है, जिससे भविष्य में न तो किसान रहेगा और न ही किसानी, एक बार फिर देश के किसानों की हालत गुलामों की तरह हो जाएगी।

नेताओं ने कहा कि उन्होंने कहा कि 26 नवम्बर को बड़ी संख्या में किसान दिल्ली जाएंगे। जब किसान अपनी बात कहने के लिए सड़कों पर आता है तो सरकार उन पर बल का प्रयोग करती है, जैसे किसान किसान न होकर कोई अपराधी हो। ऐसे में इस बार निश्चित तौर पर किसान सैकड़ों ट्रैक्टर ट्रॉली पर सवार होकर और राशन-पानी साथ लेकर बड़ी लड़ाई लड़ने के लिए जाएगा। किसान सम्मेलन के बाद बड़ी संख्या में किसानों ने शहर में प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

क्या और भी कोई वजह है विरोध की?
पंजाब और हरियाणा के किसान और किसान संगठन मुख्य रूप से इन कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। जुलाई में भी उन्होंने ऑर्डिनेंस के खिलाफ ट्रेक्टरों के साथ प्रदर्शन किया था। 28 अगस्त को पंजाब विधानसभा केंद्र के ऑर्डिनेंस के खिलाफ प्रस्ताव पारित कर चुकी है। कांग्रेस शासित राज्यों का कहना है कि खेती और उससे जुड़े बाजार राज्यों का अधिकार क्षेत्र है। केंद्र इसमें बेवजह दखल दे रही है। हालांकि, सरकार का कहना है कि खाद्य वस्तुओं का कारोबार उसके दायरे में है। इस वजह से वह संविधान के अनुसार ही काम कर रही है।

तीनों विधेयकों पर सरकार के खिलाफ कौन है और साथ कौन?
कांग्रेस के नेतृत्व में करीब छह विपक्षी पार्टियों ने इन विधेयकों का संसद में विरोध किया है। एनडीए के घटक दल शिरोमणि अकाली दल ने भी बिल के विरोध में वोटिंग की। कांग्रेस का साथ देने वालों में तृणमूल कांग्रेस, बसपा, एनसीपी और माकपा शामिल है। हालांकि, महाराष्ट्र में कांग्रेस और एनसीपी के साथ सरकार चला रही शिवसेना इस बिल पर सरकार के साथ खड़ी दिखाई दी। बीजेडी, टीआरएस और वायएसआर कांग्रेस पार्टी ने भी एसेंशियल कमोडिटी (अमेंडमेंट) ऑर्डिनेंस पर सरकार का साथ दिया।

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