• Hindi News
  • Local
  • Haryana
  • Farmers Protest (Kisan Andolan); Haryana Karnal Kisan Mahapanchayat Update | Rakesh Tikait, Anil Vij, Manohar Lal Khattar Government

दिल्ली बॉर्डर की तरह करनाल में किसानों का डेरा:सचिवालय के बाहर डटे किसान नेता, बिस्तर और डीजे मंगवाया; गुरुद्वारे से 20 हजार लोगों के लिए आया खाना

करनाल5 महीने पहले
करनाल के दो गुरुद्वारों निर्मल कुटिया और डेरा कारसेवा की ओर से प्रदर्शनकारी किसानों और पुलिस जवानों को लंगर पहुंचाया गया।

हरियाणा के करनाल में किसानों ने जिला प्रशासन से बातचीत विफल होने के जिला सचिवालय के बाहर डेरा डाल लिया है। किसान दिल्ली बॉर्डर की तरह यहां भी मोर्चा लगाने की तैयारी कर रहे हैं। रात साढ़े 10 बजे तक किसानों ने सचिवालय के गेट के बाहर सड़क पर सोने के लिए दरियां बिछा लीं। धरने पर राकेश टिकैत, बलबीर सिंह राजेवाल, योगेंद्र यादव, गुरनाम सिंह चढ़ूनी समेत तमाम नेता मौजूद हैं। किसानों ने डीजे का इंतजाम भी कर लिया है।

किसानों के आसपास तैनात पुलिसवालों और पैरामिलिट्री फोर्स के जवानों ने सड़क से लगे डिवाइडर पर खुद के आराम करने के लिए मैट वगैरह बिछा लिए हैं। एसपी गंगाराम पूनिया रात साढ़े 10 बजे खुद सचिवालय के बाहर मौजूद रहकर वहां तैनात पुलिस टुकड़ियों के रुकने का इंतजाम का जायजा लेते रहे। करनाल के दो गुरुद्वारों निर्मल कुटिया और डेरा कारसेवा की ओर से प्रदर्शनकारी किसानों और पुलिस जवानों को लंगर पहुंचाया गया। दोनों गुरुद्वारों से लगभग 20 हजार लोगों को लंगर बांटा गया।

सचिवालय के बाहर मौजूद सुरक्षाकर्मियों के रुकने का भी इंतजाम किया जा रहा है।
सचिवालय के बाहर मौजूद सुरक्षाकर्मियों के रुकने का भी इंतजाम किया जा रहा है।

इससे पहले किसानों को खदेड़ने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। हालांकि इसके बाद भी किसान सचिवालय के सामने ही जमा हो गए। किसान नेताओं ने सचिवालय के बाहर ही मोर्चा लगाने का फैसला किया।

हरियाणा के 5 जिलों में इंटरनेट-बल्क SMS बंद
इधर, किसानों के आंदोलन के चलते हरियाणा के 5 जिलों में मोबाइल इंटरनेट और बल्क SMS सर्विस बंद कर दी गई हैं। गृह सचिव-1 डॉ. बलकार सिंह के आदेश के अनुसार कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए करनाल, कुरुक्षेत्र, कैथल, पानीपत और जींद में सोमवार रात 12 बजे से मंगलवार रात 11:59 बजे तक मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद रहेंगी।

किसानों ने बसें रोकीं, हाईवे पर जाम लगा
करनाल के DC और SP किसानों को हिरासत में लेने के बाद उनसे भरी बसों को बाहर भेजने के आदेश दे रहे थे। उसी दौरान किसान सड़क के बीच बैठ गए। वहीं, फ्लाईओवर पर कुछ शरारती तत्वों ने वाहनों को डंडे दिखाकर रोक लिया। करीब 10 मिनट तक वाहन रोककर रखने से हाईवे पर जाम की स्थिति बन गई।

करनाल में किसानों के मार्च में शामिल भाकियू नेता राकेश टिकैत।
करनाल में किसानों के मार्च में शामिल भाकियू नेता राकेश टिकैत।

पैरामिलिट्री फोर्स समेत 40 कंपनियां तैनात
करनाल के SP गंगाराम पुनिया ने बताया कि कानून व्यवस्था बनाए रखने को लेकर पुलिस पूरी तरह मुस्तैद है। धारा-144 लागू है। किसानों को मिनी सचिवालय तक पहुंचने से रोकने के लिए पैरामिलिट्री फोर्स समेत सुरक्षाबलों की 40 कंपनियां तैनात की गई हैं। लघु सचिवालय समेत 18 जगहों पर नाके लगाए गए हैं। जीटी रोड और शहर से लघु सचिवालय तक पहुंचने वाले रास्तों को ब्लॉक किया गया है।

घरौंडा में हुई महापंचायत में गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने घेराव का आह्वान किया था।
घरौंडा में हुई महापंचायत में गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने घेराव का आह्वान किया था।

किसानों की गिरफ्तारी के लिए 40 बसें बुलाईं
नमस्ते चौक पर लगे चौथे नाके पर प्रशासन ने 40 रोडवेज बसें बुला लीं। किसान गिरफ्तारी के लिए तैयार हो गए। वहीं, आधे से ज्यादा किसान फ्लाईओवर से होकर नमस्ते चौक से आगे निकल गए।

  • इससे पहले, सोमवार दोपहर को भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के नेताओं और करनाल के प्रशासनिक अफसरों के बीच मिनी सचिवालय में बैठक हुई थी, जो बेनतीजा रही। एक घंटे चली इस बैठक में जिला प्रशासन की ओर से डीसी निशांत कुमार यादव, एसपी गंगाराम पुनिया और किसानों की ओर से भाकियू प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी, जिला प्रधान जगदीप औलख समेत 6 सदस्य शामिल हुए।
  • प्रशासनिक अफसरों के साथ किसानों की बातचीत हुई। इस दौरान किसान नेताओं ने ​तत्कालीन SDM आयुष सिन्हा को सस्पेंड करने की मांग की। अफसरों ने इससे इनकार कर दिया। उसके बाद किसान नेता बैठक से उठकर बाहर आ गए और अनाज मंडी की ओर निकल गए।
  • बैठक के बाद चढ़ूनी ने कहा कि जिला प्रशासन ने 30 अगस्त के पुलिस लाठीचार्ज में मारे गए किसान सुशील काजल के बेटे को डीसी रेट पर नौकरी देने का ऑफर किया है, जो स्वीकार करने योग्य नहीं है। उनकी अन्य मांगों पर जिला प्रशासन ने कोई चर्चा नहीं की

पिछली दो बैठकों से भी बाहर आ गए थे किसान नेता
इससे पहले दो दौर की वार्ता के बाद चढूनी-टिकैत समेत 11 सदस्य उठकर कुछ देर के लिए बाहर आए थे। बाहर आकर किसान नेताओं ने कहा था- जो हम मांग रहे, वह प्रशासन नहीं दे रहा और जो प्रशासन दे रहा, वह हम नहीं ले रहे।

पहली वार्ता के बाद भी एक ब्रेक लिया गया था। दूसरे दौर की वार्ता के बाद भी जब बात नहीं बनी तो सभी किसान नेता उठकर बाहर आ गए। हालांकि कुछ ही देर बाद प्रशासन ने किसान नेताओं को तीसरे दौर की वार्ता के लिए भीतर बुला लिया। अब तीसरे दौर की वार्ता भी विफल हो गई है।

8 किसान संगठनों को कोर्ट का नोटिस
करनाल जिला कोर्ट की तरफ से सोमवार को 8 किसान संगठनों को नोटिस जारी किया गया। नोटिस में गुरनाम सिंह चढ़ूनी ग्रुप, अजय राणा ग्रुप, रतनमान ग्रुप, गन्ना समिति, भाकियू, भाकिसं वगैरह को आदेश दिया गया है कि वह कानून को हाथ में न लें और न ही किसी सरकारी या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाएं। कोर्ट की ओर से करनाल के डीसी व एसपी को भी नोटिस जारी किया गया कि महापंचायत की वजह से आमजन को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। इससे जुड़ी उचित व्यवस्था की जाए।

बसताड़ा टोल प्लाजा पर लाठीचार्ज : कब-क्या हुआ
पुलिस ने 28 अगस्त को बसताड़ा टोल प्लाजा पर किसानों पर लाठीचार्ज किया था, जिसमें कई किसान घायल हो गए थे। आरोप है कि पुलिस लाठीचार्ज में घायल हुए करनाल के रायपुर जाटान गांव के किसान सुशील काजल ने अगले दिन दम तोड़ दिया था।

30 अगस्त को भाकियू ने घरौंडा अनाज मंडी में महापंचायत करके हरियाणा सरकार से तीन मांगें की थी। इनमें मृतक किसान सुशील काजल के परिवार को 25 लाख रुपए मुआवजा व एक मेंबर को सरकारी नौकरी, घायल किसानों को 2-2 लाख रुपए मुआवजा और लाठीचार्ज के आदेश देने वाले SDM, DSP व दूसरे पुलिसवालों पर कार्रवाई की मांग शामिल थी।

भाकियू प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने सरकार को अल्टीमेटम दिया था कि अगर 6 सितंबर तक उनकी ये तीनों मांगे पूरी नहीं की गईं तो 7 सितंबर को करनाल में दोबारा महापंचायत कर मिनी सचिवालय का घेराव किया जाएगा, लेकिन 6 सितंबर को हुई बैठक बेनतीजा रही। परिणामस्वरूप किसानों ने प्रदर्शन करने का फैसला लिया।

खबरें और भी हैं...