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मौसम अपडेट:पश्चिमी विक्षोभों का असर - अप्रैल से अब तक बिना लू के बीत गए 34 दिन

राजधानी हरियाणा13 दिन पहलेलेखक: सुशील भार्गव
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अम्बाला सिटी | अम्बाला में दोपहर 3:40 बजे आंधी के साथ अंधेरा छा गया। फिर बारिश शुरू हो गई। 3 एमएम बारिश से मौसम सुहाना हो गया। - Dainik Bhaskar
अम्बाला सिटी | अम्बाला में दोपहर 3:40 बजे आंधी के साथ अंधेरा छा गया। फिर बारिश शुरू हो गई। 3 एमएम बारिश से मौसम सुहाना हो गया।
  • मार्च और अप्रैल में आए 5-5 पश्चिमी विक्षोभ का 22 दिन तक रहा असर
  • अब भी प्रदेश में सामान्य से 59 फीसदी कम बारिश; फिलहाल चार दिन यूं ही रह सकता है मौसम का मिजाज

अबकी बार गर्मी का प्रकोप इतना देखने को नहीं मिल रहा है, जितना अमूमन हर साल होता है। अप्रैल से अब तक करीब 34 दिनों का समय बीत चुका है, लेकिन लू ने प्रदेश में दस्तक नहीं दी है। अप्रैल से जून तक तीन महीने लू के माने जाते हैं। एचएयू हिसार के मौसम विभाग के अध्यक्ष डॉ. मदन खीचड़ के अनुसार मार्च व अप्रैल में लगातार पश्चिमी विक्षोभ आ रहे हैं, इससे पारा अधिक नहीं बढ़ पा रहा।

अमूमन इन दिनों में पहाड़ी इलाकों में पश्चिमी विक्षोभ का असर अधिक होता रहा है, लेकिन इस बार मैदानी इलाकों में भी असर है। पहाड़ों पर लगातार बरसात हो रही है, इससे नदियों के कैचमेंट एरिया में पानी का फ्लो बढ़ेगा। इससे हरियाणा में जल का प्रवाह भी बढ़ जाएगा। 6 व 7 मई को बारिश हो सकती है।

10 व 11 को फिर पश्चिमी विक्षोभ असर दिखा सकता है। आईएमडी शिमला के निदेशक डॉ. मनमोहन के अनुसार अप्रैल से अब तक 7 से 8 पश्चिम विक्षोभ आ चुके हैं, अमूमन पांच से छह आते हैं। पहाड़ों में तापमान सामान्य से कम चल रहे हैं। इसी कारण हरियाणा में भी पारा कम है।

पहाड़ों पर पारा सामान्य से कम चल रहा, इसलिए हरियाणा में भी तापमान नीचे

प्रदेश में 65 दिन में महज 9 मिलीमीटर बारिश

सूबे में एक मार्च से चार मई तक महज 9 मिलीमीटर बरसात हुई है, जबकि इन दिनों में सामान्यत: 22 मिलीमीटर बरसात होती है। फिलहाल सामान्य से 59% कम बरसात हुई है। मई में 0.1 एमएम बरसात हुई है, जो 94 फीसदी कम है।

कपास बिजाई में थोड़ी देरी

अप्रैल और मई में आ रहे पश्चिमी विक्षोभ से सबसे बड़ी दिक्कत इन दिनों कपास बिजाई में देरी हो रही है। प्रदेश में करीब 6.50 लाख हेक्टेयर में कपास की बिजाई होती है।

डेढ़ महीने की बची लू

यदि 15 मई के बाद लू चलती है तो सवा से डेढ़ माह ही लू चल सकती है। क्योंकि जून के प्रथम पखवाड़े में प्री-मानसून की दस्तक और दूसरे पखवाड़े में मानसून की बरसात होती है।

ये आए हैं पश्चिमी विक्षोभ

  • मार्च-पांच-11 दिन तक असर
  • अप्रैल-पांच-11 दिन तक असर
  • मई-दो-दो दिन तक असर

मानसून पर असर नहीं

मौसम विभाग के पूर्व निदेशक डॉ. डीपी दुबे के अनुसार लू कम चलने या न चलने से मानसून पर असर नहीं पड़ेगा। अरब सागर में साइक्लोनिक सर्कुलेशन से पश्चिमी विक्षोभ मजबूत हो रहे हैं।

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