विश्व रेबीज दिवस पर विशेष:पशुओं को रेबीज बीमारी से बचाने के लिए सावधानी बरतना जरूरी

गढ़ी बीरबलएक महीने पहलेलेखक: राकेश कुमार
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  • पशुओं को रेबीज से बचाने के लिए प्रदेशभर में 17 से 28 सितम्बर तक चलेगा जागरूकता अभियान

व्यवसाय हो या शौक, पेट्स/पालतू पशु हमारे जीवन का अहम हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में डेयरी पशुओं के संपर्क में कुत्तों का आना, उनके साथ रहना स्वभाविक है, लेकिन हमें हमारे पालतू जानवरों से बहुत से रोग भी लग सकते हैं, जिन्हें हम जूनोटिक डिजीज या पशु जन्य रोग कहते हैं। ऐसा ही एक बहुत भयावह रोग है रेबीज। महेंद्रगढ़ में हरियाणा पशु विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक के डॉ. देवेंद्र सिंह बताते हैं कि यह राेग विशेषकर कुत्ता, बन्दर, बिल्ली, चमगादड़ आदि के काटने से पशुओं में फैलता है। इस रोग के लक्षण आने पर इलाज संभव नहीं है और मृत्यु दर 100 प्रतिशत है, लेकिन इस बीमारी का बचाव 100 प्रतिशत संभव व कारगर है।

40% केस 15 वर्ष से कम आयु के बच्चों में होते हैं क्योंकि बच्चों मे अधिकतर कुत्तों के काटने, चाटने, खरोचने या लार के त्वचा, आंख, नाक, और मुंह के संपर्क में आने के केस नजर अंदाज हो जाते हैं। विस्तार शिक्षा निदेशालय के वैज्ञानिक डॉ. सुजौय खन्ना ने बताया कि पशुओं को रेबीज से बचाए रखने के लिए कुत्तों का टीकाकरण रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम का अहम हिस्सा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार यदि 70% कुत्तों की आबादी भी रेबीज के टीकाकरण से प्रतिरक्षित हो जाती है तो रेबीज से मुक्ति मिल सकती है। इनमें पालतू ही नहीं, स्ट्रीट डॉग्स भी शामिल हैं।

किसी आदमी व पशु को कुत्ते के काटने पर सबसे पहले यह करें

  • अगर किसी पशु को कुत्ता काट ले तो घाव या खरोच को साबुन या किसी कीटाणु नाशक घोल से या केवल चलते नल के पानी के नीचे धोएं।
  • इसके बाद तुरंत डॉक्टर के पास जाएं।
  • अगर मुमकिन हो तो काटने वाले कुत्ते के बारे में जानकारी इक्कठी करें, जैसे कुत्ता पालतू है या आवारा, कुत्ते की टीकाकरण स्थिति। इसके साथ ही कम से कम 10 दिन तक कुत्ते की निगरानी करें और हो सके तो बांध कर रखें, क्योंकि आमतौर पर 10 दिन के भीतर रेबीज से संक्रमित कुत्ते में इस रोग के लक्षण दिखेंगे या वह मर जाएगा।
  • इस बात का विशेष ध्यान रखें कि पशुओं के घाव पर लाल मिर्च, मसाला, चुना, हल्दी, बाम, किसी पौधे या फलो का रस आदि कोई भी ज्वलनशील पदार्थ बिलकुल न डालें, क्योंकि इससे रेबीज के वायरस को शरीर में फैलने में मदद मिलती है।
  • पशु को टीके 0, 3, 7,14 व 28 दिन के अंतराल पर लगवाएं। जरुरी होने पर 90वें दिन भी टीका लगावाएं।

गाय/भैंस में रेबीज के लक्षण

  • पशु अस्थिर अवस्था में लड़खड़ाया नजर आता है।
  • हल्का तापमान, अस्वस्थता, भूख का कम लगना व दूध उत्पादन में कमी।
  • कान का बार-बार कांपना व हिलना।
  • मुंह की मांसपेशियों के पक्षाघात से पशु मुंह खुला रखता है, जैसे कोई चीज फंसी हो और अधिक लार गिराता व दांत पीसता है।
  • पशु को कुछ निगलने व पानी पीने में तकलीफ होती है और बिना आवाज रंभाने की कोशिश करता है।

हर वर्ष 28 सितम्बर को विश्व रेबीज दिवस की रूप में मनाया जाता है। इसी कड़ी में विस्तार शिक्षा निदेशाल्य एवं हरियाणा पशु विज्ञान केंद्र द्वारा अगले 10 दिनों तक विभिन्न स्कूलों में जागरूकता अभियान, लोगों के ज्ञान, योग्यता और व्यवहार पर सर्वेक्षण, सोशल मीडिया अभियान, मोबाइल एडवाइजरी और वीडियो के माध्यम से किया जाएगा। -डॉ. धर्मवीर सिंह दहिया, डायरेक्टर विस्तार शिक्षा निदेशाल्य, लुवास, हिसार।

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