• Hindi News
  • Local
  • Haryana
  • Panipat
  • Neeraj Chopra Will Play In The Final Of Javelin Throw Today, Athletics Federation Officials Will Also Watch The Match With Family In The Village

सूबेदार नीरज के भाले का निशाना गोल्ड पर:चाचा बोले- सोना तो म्हारे छोरे का ही था, दादा ने कहा- पोते ने मेरा सिर ऊंचा कर दिया

पानीपत2 महीने पहले

भारत के स्टार एथलीट नीरज चोपड़ा ने टोक्यो ओलिंपिक में गोल्ड मेडल जीतकर सोने का सुखा खत्म कर दिया। शनिवार को जेवलिन थ्रो के फाइनल मुकाबले में भारतीय सेना के सूबेदार नीरज चोपड़ा ने 87.58 मीटर भाला फेंककर गोल्ड जीता।

नीरज की कामयाबी के बाद उनके चाचा भीम चोपड़ा ने कहा कि उसे उसकी मेहनत का फल मिला है। 1 साल से उसका मोबाइल बंद है। उसने बहुत मेहनत की। मैंने पहले ही कहा था कि गोल्ड मेडल तो म्हारे छोरे का ही है। फाइनल में 11 खिलाड़ियों पर मेरा भतीजा भारी पड़ा।

नीरज के रिकॉर्ड तक कोई नहीं पहुंच पाया
नीरज ने पहली बार में 87.03 मीटर और दूसरी बार में 87.58 मीटर दूर भाला फेंका। तीसरे अटैम्प्ट में उन्होंने 76.79 मीटर, चौथे और 5वें में फाउल और छठे अटैम्प्ट में 80 मीटर से ज्यादा थ्रो किया।कोई भी नीरज के 87.58 मीटर के रिकॉर्ड तक नहीं पहुंच पाया। नीरज की इस सफलता पर हरियाणा समेत पूरा देश नाज कर रहा है।

दादा बोले- मेरा सिर फख्र से ऊंचा हो गया
नीरज के दादा धर्म सिंह ने भी परिवार के साथ बैठकर मुकाबला देखा। वे कहते हैं कि मेरा पोता बहुत मेहनती है। वह ओलिंपिक खेलने गया और गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया। मेरा सिर फख्र से ऊंचा कर दिया।

नीरज चोपड़ा के दादा और चाचा ने कहा कि उसने गोल्ड जीतकर देश का नाम रोशन किया है।
नीरज चोपड़ा के दादा और चाचा ने कहा कि उसने गोल्ड जीतकर देश का नाम रोशन किया है।

एक साल से बंद है नीरज का फोन
चाचा भीम चोपड़ा ने बताया कि ओलिंपिक में पदक जीतने के लिए नीरज ने जी-तोड़ मेहनत की है। एक साल से तो उसका फोन बंद है। 15 दिन पहले हमारी वीडियो कॉल से उससे बात हुई थी, वो भी मैनेजर के फोन से। उसके बाद बात ही नहीं हुई।

खांडरा गांव में नीरज के घर के बाहर लगाई गई स्क्रीन पर मुकाबला देखते पानीपत के डीसी सुशील सारवान (मास्क में)। उनके बगल में नीरज के पिता सतीश चोपड़ा।
खांडरा गांव में नीरज के घर के बाहर लगाई गई स्क्रीन पर मुकाबला देखते पानीपत के डीसी सुशील सारवान (मास्क में)। उनके बगल में नीरज के पिता सतीश चोपड़ा।

मुकाबला देखने के लिए एलईडी स्क्रीन लगाई
नीरज चोपड़ा का मुकाबला देखने के लिए उनके पानीपत के गांव खांडरा स्थित घर में बड़ी स्क्रीन लगाई गई। घर में पूरा परिवार, रिश्तेदार, गांववाले और एथलेटिक्स फेडरेशन के अधिकारी जुटे। उन्होंने एक साथ लाइव मुकाबला देखा। पंडाल लगाकर कुर्सियां लगाई गईं। गांव के बड़े बुजुर्ग, बच्चे और महिलाएं सुबह से ही नीरज के घर पर जुटने लगे थे।

नीरज चोपड़ा के गोल्ड मेडल जीतने पर गांव में जश्न मनाते लोग।
नीरज चोपड़ा के गोल्ड मेडल जीतने पर गांव में जश्न मनाते लोग।

पहले ही प्रयास में किया था फाइनल के लिए क्वालिफाई
नीरज चोपड़ा ने अपने पहले ही प्रयास में 86.65 मीटर भाला फेंककर फाइनल के लिए क्वालिफाई किया था। हालांकि, जेवलिन थ्रो में उनका नेशनल रिकॉर्ड 88.07 मीटर है।

नीरज के घर के बाहर एलईडी पर लाइव मुकाबला देखते लोग।
नीरज के घर के बाहर एलईडी पर लाइव मुकाबला देखते लोग।

वजन घटाने के लिए स्टेडियम पहुंचे नीरज बने जेवलिन थ्रो के स्टार
भीम सिंह ने बताया कि बचपन में नीरज का वजन ज्यादा था। वजन घटाने के लिए स्टेडियम जाना शुरू किया। दौड़-भाग की। इसके बाद भाला थाम लिया। कड़ी मेहनत के बल पर नीरज आज यहां तक पहुंचा है।

नीरज चोपड़ा के घर में एलईडी पर लाइव मुकाबला देखते ग्रामीण।
नीरज चोपड़ा के घर में एलईडी पर लाइव मुकाबला देखते ग्रामीण।

किसान परिवार से हैं नीरज चोपड़ा
नीरज चोपड़ा हरियाणा के पानीपत जिले के मतलौडा ब्लॉक के गांव खांडरा के रहने वाले हैं। इनके पिता सतीश चोपड़ा किसान हैं और मां सरोज देवी गृहिणी हैं। दो छोटी बहनें संगीता और सरिता हैं। चाचा भीम चोपड़ा ने नीरज को जेवलिन थ्रो में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया था।

खबरें और भी हैं...