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भाला पर विजय तिलक:नीरज ने कहा- रात को जब सोया, तब मन में यही था कल जन-गण-मन बजना चाहिए

हरियाणा3 महीने पहले
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राष्ट्रगान गूंजा तो भावुक हो गए नीरज- मेडल सेरेमनी के दौरान जब जन-गण-मन गूंजा तो पोडियम पर खड़े नीरज चोपड़ा भावुक हो गए। उनकी आंखों में पानी आ गया। - Dainik Bhaskar
राष्ट्रगान गूंजा तो भावुक हो गए नीरज- मेडल सेरेमनी के दौरान जब जन-गण-मन गूंजा तो पोडियम पर खड़े नीरज चोपड़ा भावुक हो गए। उनकी आंखों में पानी आ गया।
  • आत्मविश्वास ऐसा- दूसरा थ्रो कर बिना देखे ही हाथ उठा जीत जैसा जश्न मनाया, यही गोल्डन थ्रो रहा
  • 121 साल के ओलिंपिक इतिहास में एथलेटिक्स में देश का पहला गोल्ड

पिछली रात जब सोया तो मन में यही था कि कल स्टेडियम में जन-गण-मन बजना चाहिए। क्वालिफाइंग राउंड में टॉप पोजिशन हासिल करने के बाद आत्मविश्वास बढ़ गया था। यही कारण है कि फाइनल से पहले दबाव महसूस नहीं हुआ। बस इतना ख्याल था कि अपना बेस्ट देना है। पहला थ्रो 87 मीटर से ऊपर गया तो अंदर से बहुत हिम्मत आई। दूसरा थ्रो 87.58 मीटर गया तो साफ दिखने लगा कि ओलिंपिक मेडल अब अपना है। उसी खुशी का इजहार मैंने हाथ उठाकर किया। मैंने सोचा कि अब ओलिंपिक रिकॉर्ड के लिए प्रयास करूंगा। लेकिन यह कर नहीं पाया।

जब 86.67 मी. थ्रो कर चुके चेक रिपब्लिक के जेकब वेदलेच का अंतिम थ्रो 87 मीटर क्राॅस नहीं कर सका तो मेरा गोल्ड पक्का हो गया। फिर जब मेडल पहना और जन-गण-मन बजा तो धड़कनें बढ़ गईं। उस अहसास को कैसे बयां करूं। एथलेटिक्स में भारत के लिए मेडल का जो ख्वाब मिल्खा सिंह और पीटी उषा ने देखा था, वह आज पूरा हो गया है।

मिल्खा सिंह की ख्वाहिश थी कि एथलेटिक्स में देश का गोल्ड आए। आज उनकी ख्वाहिश पूरी करके खुश हूं। यह मेडल उन्हें समर्पित करता हूं। मेरी जीत परिवार के त्याग और कोच की मेहनत के बिना असंभव थी। कभी महीने तो कभी दो महीने तक घर पर बात नहीं होना, महीनों घर नहीं आना, यह सब आसान नहीं होता।

जर्मनी के दिग्गज थ्रोअर जोहानस वेटर के चैलेंज ने मेरे लिए प्रेरणा का काम किया। उन्होंने कहा था कि मैं बेहतर कर सकता हूं, पर उन्हें हरा नहीं सकता। वे महान खिलाड़ी हैं, लेकिन मैंने अपना जवाब अपने थ्रो से दिया। लेकिन, मुझे उनके लिए बुरा लग रहा है, क्योंकि मैं उनका सम्मान करता हूं। कई बार बड़े से बड़े एथलीट परफॉर्मेंस नहीं दे पाते।

मेरा इवेंट देश के लिए सबसे अंतिम था तो मन में था कि देश को अंत में सबसे बड़ी खुशी दे पाऊं। मुझे खुशी है कि मैं देश को गोल्ड दिला पाया। अब इसी पर काम करूंगा कि कैसे 90 मीटर पार कर सकूं। अभी डायमंड लीग खेलनी है। इसके बारे में स्वदेश लौटने के बाद ट्रेनिंग के हिसाब से देखूंगा।

गौरव- एकल खेल में दूसरे गोल्ड मेडलिस्ट बने नीरज

  • अभिनव बिंद्रा ने 2008 में शूटिंग में पहला गोल्ड जीता। अब नीरज ने जीता है। हॉकी को छोड़ दें तो 121 साल के ओलिंपिक इतिहास में पोडियम पर सिर्फ दूसरी बार ‘जन-गण-मन...’ गूंजा है।
  • भारत 1900 में पहली बार ओलिंपिक में उतरा। तब एथलेटिक्स में 2 सिल्वर जीते थे। अब नीरज चोपड़ा ने गोल्ड जीता है। भारत ने 2012 में सर्वाधिक 6 मेडल जीते थे। अब टोक्यो में 7 मेडल जीते हैं।

इनाम- 11.75 करोड़ नकद, नौकरी-प्लॉट की घोषणा

  • नीरज को हरियाणा सरकार 6 करोड़, पंजाब सरकार 2 करोड़, मणिपुर सरकार, बीसीसीआई, चेन्नई सुपरकिंग्स 1-1 करोड़, केंद्र सरकार 75 लाख रु. देगी।
  • नीरज को हरियाणा सरकार क्लास-1 अफसर की सरकारी नौकरी व रियायती दरों पर एचएसवीपी का प्लॉट देगी।
  • पंचकूला में एथलेटिक्स उत्कृष्टता केंद्र बनाया जाएगा। उसका हेड नीरज चोपड़ा को ही बनाया जाएगा।

सम्मान- पंचकूला में 13 को सम्मान समारोह होगा

  • प्रदेश के खिलाड़ियों के अच्छे प्रदर्शन को देखते हुए राज्य सरकार 13 अगस्त को पंचकूला के इंद्रधनुष स्टेडियम में सम्मान समारोह आयोजित करेगी।
  • देश की आबादी का 2% होने के बावजूद ओलिंपिक में 25% प्रतिभागी हरियाणा के हैं। देश के 120 में से 30 खिलाड़ी यहां से हैं।
  • कुल 7 मेडल में से 3 मेडल हरियाणा के खिलाड़ियों ने जीते। कांस्य पदक विजेता पुरुष हॉकी टीम में भी 2 हरियाणवी हैं।

बधाइयां- पाक खिलाड़ी ने नीरज को आइडियल बताया

नीरज चोपड़ा को गोल्ड मेडल जीतने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, हरियाणा के सीएम, खेल मंत्री, लता मंगेशकर समेत तमाम बड़ी हस्तियों ने बधाई दी है। पूरा देश जश्न मना रहा है। वहीं, नीरज काे पड़ोसी देश पाकिस्तान से भी बधाइयां मिल रही हैं। नीरज के साथ जिस पाकिस्तानी खिलाड़ी अरशद नदीम का मुकाबला हुआ, उसने भी ट्वीट कर कहा, ‘मेरे आइडियल नीरज चोपड़ा को गोल्ड मेडल के लिए बधाई।

नीरज के जीवन का टर्निंग पॉइंट

  • परिवार के सभी लोगों ने तय किया कि पैसे के लिए बच्चे का खेल नहीं रुकने देना। सभी मिलकर ज्यादा काम करने लगे। खेती ज्यादा की, प्राइवेट नौकरी की और घर के खर्चे कम कर दिए।
  • नीरज सही से तैयारी कर सके, इसलिए परिजन फोन पर 15 से 20 दिन में एक बार थोड़ी देर बात करते थे।

सब पर काबू पाया

  • नेशनल कैंप से पहले कोहनी में फ्रैक्चर हो गया था।
  • 2016 रियो ओलिंपिक से पहले बुखार आ गया। क्वालीफाई नहीं कर पाए।

दबाव वाली रणनीति पर चले... विरोधी उलझ कर रह गए- (बहादुर सिंह, पूर्व मुख्य कोच एथलेटिक्स, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स, पटियाला)

  • नीरज को मैं तब से जानता हूं, जब 2015 में उनका एनआईएस पटियाला में चयन हुआ। पिछले साल जब मैंने एनआईएस छोड़ा, तब तक नीरज ने मेरे पास प्रैक्टिस की है। नीरज केवल प्रैक्टिस पर ध्यान रखते हैं। आसपास क्या चल रहा है, उससे कुछ लेना देना नहीं होता। अपने खेल के लिए इतने दीवाने हैं कि कभी कैंप से छुट्टी नहीं ली। कभी प्रैक्टिस मिस नहीं की। ट्रेनिंग के दौरान लेट नहीं होते।
  • नीरज ने अपनी रणनीति पर क्वालीफाई वाले दिन से काम शुरू कर दिया था। उन्होंने जिस तरह सिंगल थ्रो में क्वालीफाई किया, उसी दिन से विरोधी दबाव में थे। यही रणनीति फाइनल में भी जारी रखी।
  • नीरज का सीधा प्लान था कि दबाव नहीं लेना है, बल्कि सामने वालों पर दबाव बनाना है। वही किया। पहला थ्रो 87 मीटर से अधिक फेंककर विरोधियों को उसे पार करने की चुनौती दी। इसी से सभी दबाव में आ गए।
  • रही-सही कसर नीरज ने दूसरे थ्रो में पूरी कर दी। इससे विरोधियों को यह संदेश गया कि छठे थ्रो तक जाने की जरूरत पड़ी तो वह 90 मीटर तक फेंक सकते हैं।
  • नीरज चोपड़ा की स्पीड, ग्रिप और एंगल तीनों एकदम सही रहे। नीरज ने दूसरे थ्रो के बाद जिस तरह हाथ उठाए, ऐसा तब होता है, जब भाला हाथ से निकलते ही पता चल जाए कि थ्रो सही था या नहीं।