भास्कर एक्सप्लेनरपंजाब विधानसभा सेशन बुलाने से इनकार क्यों?:गवर्नर को बहुमत पर शक नहीं, विपक्षी विधायकों ने मांग भी नहीं की; संवैधानिक तौर पर राज्यपाल सुप्रीम

अभिषेक वाजपेयी,चंडीगढ़6 दिन पहले
  • कॉपी लिंक

पंजाब में गवर्नर बनवारी लाल पुरोहित ने विधानसभा का स्पेशल सेशन बुलाने से इनकार कर दिया। आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार ने इसकी मांग की थी। मुख्यमंत्री भगवंत मान इस सेशन में पार्टी का बहुमत साबित करना चाहते थे। AAP का तर्क था कि भाजपा 'ऑपरेशन लोटस' चलाकर उनके MLA खरीदने की कोशिश कर रही है। गवर्नर ने पहले सेशन की मंजूरी दे दी और फिर इसे रद्द कर दिया। इसके बाद नई बहस छिड़ गई है कि सरकार सही है या गवर्नर?

दैनिक भास्कर ने संविधान और कानून विशेषज्ञों से इस पूरे विवाद और इससे जुड़े 3 अहम पॉइंट्स पर बात कही। पहला पॉइंट- पंजाब विधानसभा की नियमावली में ऐसा कोई नियम नहीं। दूसरा- गवर्नर को सरकार के बहुमत पर कोई शक नहीं। तीसरा- विपक्षी विधायकों ने इसकी मांग नहीं की।

भास्कर एक्सप्लेनर में जानते हैं कि इस पूरे मामले में हो रही सियासत के बीच AAP सरकार सही है या फिर गवर्नर का फैसला...

अविश्वास प्रस्ताव का जिक्र लेकिन विपक्ष लाएं तो ही संभव

​​​​​पंजाब विधानसभा की नियम एवं संचालन नियमावली के नियम 58 (1) के अनुसार, सदन में अविश्वास प्रस्ताव पेश किया जा सकता है। नियमावली में विश्वासमत का प्रस्ताव लाने के किसी प्रावधान का जिक्र नहीं है। विधानसभा के रूल्स ऑफ बिजनेस के चैप्टर 10 में केवल अविश्वास प्रस्ताव लाने का जिक्र है जो विपक्ष के विधायक लाते हैं।

पंजाब के इतिहास में ऐसा पहली बार
पंजाब विधानसभा के पूर्व डिप्टी स्पीकर बीर दविंदर सिंह के अनुसार, गवर्नर का यह साहसिक कदम है। राज्य के इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि सरकार की ओर से बुलाए गए सत्र को मंजूरी देने के बाद राज्यपाल ने रद्द कर दिया हो। कोई कानूनी अड़चन न आए इसलिए राजभवन की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल से कानूनी राय लेने के बाद सेशन की मंजूरी वापस ले ली गई।

डॉ. कश्यप बोले- सेशन बुलाने का अधिकार गवर्नर को
जाने-माने संविधान विशेषज्ञ और लोकसभा के पूर्व महासचिव पद्मभूषण डॉ. सुभाष कश्यप स्पष्ट कहते हैं कि संविधान के अनुसार गवर्नर को अधिकार है कि वह विधानसभा का स्पेशल सेशन बुलाने से इनकार कर दे। हालांकि पंजाब गवर्नर के फैसले को लेकर अलग-अलग राय जरूर हो सकती है। दिल्ली, बिहार और झारखंड की तुलना को भी डॉ. कश्यप सही नहीं मानते। उनके अनुसार, हर राज्य की परिस्थिति अलग थी। ऐसे में आखिरी फैसला गवर्नर को ही करना होता है।

जब गवर्नर को शक ही नहीं तो क्यों बुलाएं सेशन

भारत सरकार के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल सत्यपाल जैन ने भी पंजाब राज्यपाल के फैसले से सहमति जताई। जैन ने कहा- पंजाब में राज्यपाल को जब बहुमत पर कोई संदेह ही नहीं है तो विधानसभा का विशेष सेशन बुलाने का कोई औचित्य नहीं है।

कैबिनेट ने अनुच्छेद 174 (1) के तहत ली थी मंजूरी
पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी ने दावा किया था कि उसके कम से कम 10 MLA को भाजपा ने 25-25 करोड़ रुपये में खरीदने की कोशिश की। पंजाब के वित्तमंत्री हरपाल चीमा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया कि भाजपा 'ऑपरेशन लोट्स' के तहत राज्य सरकार को गिराना चाहती है। कैबिनेट ने संविधान के अनुच्छेद 174 (1) के तहत राज्यपाल से विशेष सत्र के लिए मंजूरी ली थी।

पढ़िए... दूसरे राज्यों में ऐसा क्यों नहीं हुआ?

दिल्ली में चलते सेशन में लाया गया प्रस्ताव: इस मामले में दिल्ली की स्थिति पंजाब से अलग थी। पंजाब में स्पेशल सेशन बुलाया जा रहा था जबकि दिल्ली में सेशन समाप्ति की घोषणा नहीं हुई थी। चालू सेशन में विधानसभा अध्यक्ष के पास अविश्वास प्रस्ताव लाए जाने की मंजूरी देने का अधिकार होता है। यदि सेशन समाप्ति की घोषणा कर दी जाती तो उपराज्यपाल से मंजूरी लेनी जरूरी हो जाती।

बिहार में टूट गया था गठबंधन : पंजाब में विशेष सत्र रद्द किए जाने की तुलना बिहार से भी नहीं की जा सकती क्योंकि बिहार के हालात बिल्कुल अलग थे। बिहार में सत्तासीन पार्टी जदयू का भाजपा से गठबंधन टूट गया। इसके बाद राजद ने जदयू को समर्थन दिया। ऐसे में नए सिरे से सरकार को बहुमत साबित करने के लिए राज्यपाल की मंजूरी से विशेष सत्र बुलाया गया।

​​​​झारंखंड में विशेष नियम से बुलाया सेशन : झारखंड सरकार ने विशेष नियम से सेशन बुलाया था। इसके लिए राज्यपाल से अनुमति नहीं ली गई। झारखंड विधानसभा की कार्य संचालन नियमावली के नियम चार के परंतुक और नियम 15 के तृतीय परंतुक के अनुसार जब तक राज्यपाल की ओर से सत्रावसान नहीं किया जाता, तब तक सदन के नेता के परामर्श पर स्पीकर सत्र की मीटिंग बुला सकते हैं।

पंजाब में AAP सरकार Vs गवर्नर विवाद से जुड़ी अन्य खबरें भी पढ़ सकते हैं

राज्यपाल के इनकार के बाद CM ने 27 सितंबर से विधानसभा सेशन बुलाया; SC भी जाएगी आप

पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार और गवर्नर बीएल पुरोहित के बीच जंग शुरू हो गई है। गवर्नर ने कल अचानक पंजाब विधानसभा सेशन रद्द कर दिया। जिससे यहां विश्वासमत साबित करने के बहाने ताकत दिखाने की तैयारी कर रही AAP भड़क गई। पहले AAP के विधायकों की CM भगवंत मान की अगुआई में मीटिंग हुई। जिसके बाद उन्होंने विधानसभा से गवर्नर हाउस तक... आगे पढ़ने के लिए क्लिक करें