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पानीपत में लाठीचार्ज मामला:कश्यप समाज ने एसआईटी से बातचीत को किया इनकार, बोले- पहले 14 लोगों को छोड़ो, दीपेंद्र हुड्डा भी आए समर्थन में

पानीपत20 घंटे पहले
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पानीपत में कश्यप समाज के लोग बिंझौल में बच्चों की मौत और लाठीचार्ज मामले में बैठक करते हुए।
  • कश्यप समाज के लोगों ने रविवार को भी बैठक की
  • दीपेंद्र हुड्डा की मांग- पीड़ित परिवार को आधिकारिक मदद करे सरकार
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पानीपत के बिंझौल में तीन बच्चों की मौत और फिर प्रदर्शन कर रहे लोगों पर लाठीचार्ज मामले की जांच कर रही करनाल पुलिस की एसआईटी से कश्यप समाज के लोगों ने बातचीत करने से मना कर दिया है। वहीं कश्यप समाज की प्रदेश सरकार व पानीपत प्रशासन और पुलिस विभाग से मांग है कि गुरुवार को लाठीचार्ज के दौरान गिरफ्तार किए गए 14 नागरिकों को बिना किसी शर्त के तत्काल जेल से रिहा किया जाए। थाना सिटी पुलिस द्वारा नामजद समेत 500 से अधिक लोगों पर दर्ज किए गए केस को बिना किसी शर्त के रद्द करने के लिए भी कहा है। इसके साथ-साथ सांसद दीपेंद्र हुड्डा भी पीड़ित परिवार के पक्ष में आ गए हैं।

कश्यप समाज के सख्त रूख के चलते एक बार फिर गांव बिंझौल में सात जुलाई की रात को मरे तीन बच्चों की मौत के मामले की जांच ठहर सी गई है। रविवार को करनाल पुलिस की एसआईटी ने पीड़ित परिवार को बयान दर्ज करवाने के लिए फोन किया था लेकिन उन्होंने मना कर दिया।

वहीं, करनाल पुलिस की एसआईटी ने ग्रामीणों को समझाने के ठोस प्रयास किए, लेकिन कश्यप समाज के ग्रामीणों ने करनाल पुलिस की एसआईटी की एक नहीं सुनी। बता दें कि शनिवार को करनाल के एसपी सुरेंद्र सिंह भौरिया के आदेश पर डीएसपी जगदीप दूहन व उनकी टीम जांच के लिए पहुंची थी। पानीपत पहुंची टीम ने तथ्य जुटाए थे। शनिवार को भी करनाल के डीएसपी पीड़ित परिवार का पक्ष दर्ज नहीं कर सके थे। वहीं दूसरी तरफ शनिवार को ही मृतक के परिजनों ने गृह मंत्री अनिल विज से अम्बाला में जाकर मुलाकात भी की थी।

राज्यसभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा।

मामला हुआ राजनीतिक- दीपेंद्र हुड्डा आए पीड़ित परिवार के पक्ष में
राज्यसभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा अब पीड़ित परिवार के पक्ष में आ गए हैं। उन्होंने बयान जारी करते हुए कहा है कि पूरी घटना की उच्च स्तरीय जांच कराकर दोषियों को तुरंत पकड़ा जाए और पीड़ित परिवार को अधिकाधिक मदद की जाए। उन्होंने तीनों मृतक बच्चों को अपनी श्रद्धांजलि दी और परिवारजनों के प्रति गहरी संवेदनाएं प्रकट कीं।

दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि दुःख की इस घड़ी में वे पीड़ित परिवार के साथ हैं। उन्होंने इस बात पर हैरानी जताई कि बीती 30 जुलाई को जब न्याय की मांग करते हुए हुए लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया तो सरकार ने उल्टे 14 प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी। दीपेन्द्र हुड्डा ने तुरंत 14 प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि दुर्भाग्य है कि बिंझौल गांव के 3 मासूम बच्चों की हत्या करने वाले अपराधियों पर कार्रवाई करने की बजाय भाजपा सरकार न्याय मांग रहे लोगों पर निर्ममता से लाठियां बरसा रही है।

प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस ने किया था लाठीचार्ज।

ये था पूरा मामला
पानीपत के बिंझौल गांव का 10 साल के वंश, 9 साल के वरुण और 8 साल के लक्ष्य 7 जुलाई को गांव से पतंग के लिए डोर लेने एक डाई हाउस में गए थे। आरोप है कि जब वह पतंग के लिए डोर खोज रहे थे तो डाई हाउस के मैनेजर ने उनको देख लिया। फिर उसने बच्चों की हत्या कर दी और डाई हाउस के पीछे बहने वाली माइनर में फेंक दिया। 8 जुलाई को तीनों के शव माइनर में मिले थे।

पुलिस ने भीड़ खदेड़ने के लिए वाटर कैनन का भी सहारा लिया था।
इसको लेकर गुरुवार 30 जुलाई को पीड़ित अपने कश्यप समाज के लोगों के साथ सुबह ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से लघु सचिवालय के सामने धरना-प्रदर्शन करने आए थे। उनकी मांग थी कि आरोपी गिरफ्तार किए जाएं। गुस्साए लोगों ने जीटी रोड पर दोनों ओर जाम लगा दिया। पहले पुलिस अफसरों और फिर एसडीएम ने समझाया। डीएसपी संदीप की गाड़ी का घेराव किया तो पुलिस ने रोका। धक्का-मुक्की के बाद पुलिस ने लाठियां बरसा दीं। पुलिस समाज के नेताओं को उठाकर गाड़ी में डालकर ले गई। भड़के लोगों ने पुलिस पर पथराव किया। लघु सचिवालय से लाल बत्ती तक पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को बल प्रयोग कर खदेड़ा। राहगीरों पर भी लाठियां बरसाईं। इसमें काफी संख्या में लोग घायल हो गए थे।

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