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फंगस में फंसा सिस्टम:मरीजों को 6-6 दिन बाद भी नहीं मिल रहे इंजेक्शन, रोज औसतन तीन मौतें हो रहीं

हिसार\सोनीपत\रोहतक\करनाल19 दिन पहले
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सोनीपत के खानपुर मेडिकल कॉलेज में ब्लैक फंगस के मरीज लगातार आ रहे हैं। - Dainik Bhaskar
सोनीपत के खानपुर मेडिकल कॉलेज में ब्लैक फंगस के मरीज लगातार आ रहे हैं।
  • प्रदेश में ब्लैक फंगस के मरीजों के लिए इंजेक्शन की भारी कमी
  • 97 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी, कहीं हार्ट तो कहीं न्यूरो सर्जन भी नहीं
  • मेडिकल कॉलेजों में भी पूरी व्यवस्था नहीं होने से रेफर किए जा रहे मरीज

प्रदेश में 7 मई को ब्लैक फंगस का पहला केस मिलने के बाद 29 दिन में ही आंकड़ा 1000 पार पहुंच चुका है। लेकिन सरकार का सिस्टम फंगस की फांस से अभी तक नहीं निकल पाया है। स्वास्थ्य विभाग के पास मरीजों की जरूरत के अनुसार एम्फोटेरिसिन-बी इंजेक्शन नहीं हैं। मरीजों के भर्ती होने के 6-6 दिन बाद तक इंजेक्शन नहीं मिल रहे हैं।

कई मेडिकल कॉलेजों में मरीजों की संख्या के बराबर भी इंजेक्शन नहीं दिए जा रहे। इलाज की पर्याप्त व्यवस्था न होने से वहां से भी मरीजों को दूसरी जगह रेफर किया जा रहा है। कहीं हार्ट तो कहीं न्यूरो सर्जन भी नहीं हैं। इससे सर्जरी में 10 दिन से 1 माह तक का समय लग रहा है।

रोज औसतन 3 मरीजों की जान जा रही है। अब तक प्रदेश में ब्लैक फंगस से 97 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। अब 7 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में ब्लैक फंगस के मरीजों का इलाज किया जा रहा है। इंजेक्शन भी सरकारी कमेटी के जरिए ही मुहैया कराए जा रहे हैं। पढ़िए 4 बड़े मेडिकल काॅलेज से भास्कर की ग्राउंड रिपोर्ट...

ग्राउंड रिपोर्ट

4 मेडिकल कॉलेजों में भर्ती मरीजों की दर्दभरी कहानी पढ़िए...

  • जींद की कमलेश ने बताया, ‘मेरी 50 वर्षीय बहन को नाक में दिक्कत होने पर जांच के लिए हिसार के निजी अस्पताल लाया गया था। जांच में ब्लैक फंगस बताया गया तो उसे अग्रोहा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। 29 मई को भर्ती कराया गया। लेकिन आज तक सर्जरी नहीं हुई है और फंगस लगातार बढ़ रहा हैं। डॉक्टर रोजाना कम से कम 6 इंजेक्शन की सलाह दे रहे हैं, लेकिन अभी तक एक ही लगा है। इंजेक्शन के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। डॉक्टरों ने पर्ची पर इंजेक्शन लिखकर दे दिया और कह रहे हैं कि इंजेक्शन ले आओ सर्जरी हो जाएगी।’
  • गोहाना के जगबीर ने कहा, ‘नाक में दिक्कत होने के चलते मां को 29 मई को सोनीपत में खानपुर कलां के बीपीएस मेडिकल कॉलेज भर्ती कराया था। जांच के बाद डॉक्टरों ने ब्लैक फंगस बताया। साथ ही प्रतिदिन कम से कम 4 इंजेक्शन की जरूरत बताई गई। इस हिसाब से अब तक 32 इंजेक्शन लगने चाहिए थे, लेकिन 8 दिनों में महज 4 इंजेक्शन ही मिल पाए हैं। दवाएं नहीं मिलने के कारण सर्जरी भी नहीं हो पा रही है। मां को हार्ट संबंधी समस्या भी है और यहां हृदय रोग विशेषज्ञ भी नहीं है। अब उन्हें रोहतक रेफर कर दिया है।’
  • अम्बाला के यशवंत का कहना है, ‘मेरी आंखों में अचानक दर्द होने लगा। पहले अम्बाला शहर में ही डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने ब्लैक फंगस के लक्षण बताए। इसके बाद सिविल अस्पताल गया तो उन्होंने मुझे करनाल के कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज में रेफर कर दिया। 31 मई से यहां भर्ती हूं, डॉक्टर कह रहे थे रोजाना कम से कम 5 इंजेक्शन की जरूरत होगी, लेकिन पांच दिन में एक भी इंजेक्शन नहीं मिल पा रहा है। जबकि मेरी आंख में लगातार दर्द बढ़ रहा है और आंख के नीचे कालापन भी आ गया है।’
  • करनाल के संजय शर्मा ने कहा, ‘मेरे भाई को आंख दर्द और देखने में समस्या आने लगी। डॉक्टरों ने ब्लैक फंगस बताते हुए कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज में इलाज कराने को कहा। 16 मई को भाई को यहां भर्ती कराया। डॉक्टरों ने कहा था कि रोजाना 3 टीके लगने चाहिए। यानी डॉक्टर की सलाह के अनुसार अब तक 63 इंजेक्शन लगने चाहिए थे। लेकिन इतने दिनों में सिर्फ 4 ही टीके लगे हैं। भाई की हालत लगातार बिगड़ रही है। कब तक इलाज चलेगा इस बारे में भी कुछ नहीं कहा जा रहा है।’

पीजीआई रोहतक में भी इलाज नहीं मिला

पानीपत के देवेंद्र ने कहा, ‘मेरे पिता 64 वर्षीय रोहतास को ब्लैक फंगस हो गया था। पहले खानपुर मेडिकल कॉलेज ले गए, वहां पर 3 दिन रहे। डॉक्टरों ने ब्रेन में फंगस की बात कही। न्यूरो सर्जन नहीं होने की वजह से सर्जरी करने से मना कर दिया। एक जून को पीजीआई रोहतक ले गए। जहां 3 दिन भर्ती रखा लेकिन सर्जरी नहीं की गई और महज दो इंजेक्शन ही लगाए। डॉक्टर से सर्जरी को कहा तो उन्होंने इंतजार करने को कह दिया। फिर 4 जून को डिस्चार्ज कराकर पानीपत के एक निजी अस्पताल में लाकर सर्जरी कराई।’

सर्जन नहीं था, एक माह बाद हो पाई सर्जरी

हिसार की सीता बोली, ‘मेरी दादी को ब्लैक फंगस की शिकायत के बाद 2 मई को अग्रोहा मेडिकल में भर्ती कराया था। डॉक्टरों ने बताया कि उनके जबड़े में इंफेक्शन है। रोजाना 3 इंजेक्शन की जरूरत होगी। सर्जरी करने की भी सलाह दी। लेकिन रोजाना मुश्किल से एक इंजेक्शन मिल पा रहा था। सर्जरी कब करेंगे, इसके लिए कोई कुछ बताने को तैयार नहीं था। बाद में पता चला कि जबड़े की सर्जरी करने वाले मैग्नोफेशियल सर्जन नहीं हैं। इस वजह से सर्जरी नहीं की जा रही। हाल ही में सर्जन की नियुक्ति हुई तो अब 1 माह बाद 3 जून को सर्जरी हो पाई।’

व्यवस्थाओं का हाल देखिए

फैसला: इलाज के लिए नामित प्राइवेट मेडिकल कॉलेज हटाए

सरकार ने ब्लैक फंगस के इलाज के लिए 11 मेडिकल कॉलेज की लिस्ट जारी की थी, जिसमें प्राइवेट मेडिकल कॉलेज भी शामिल थे। लेकिन अचानक ही सरकार ने प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में इलाज बंद कर दिया। भास्कर पड़ताल में पता चला कि झज्जर के वर्ल्ड मेडिकल कॉलेज, कुरुक्षेत्र के आदेश चिकित्सा विज्ञान संस्थान, अम्बाला के महर्षि मार्कंडेश्वर मेडिकल कॉलेज और पानीपत के एनसी मेडिकल में ब्लैक फंगस के मरीजों का इलाज बंद है।

चिंता: सरकार के स्टॉक में 139 एम्फोटेरिसिन-बी इंजेक्शन ही बचे

शनिवार को जारी सरकारी बुलेटिन के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग के पास सिर्फ 139 इंजेक्शनों का स्टॉक बचा है। वहीं, ब्लैक फंगस से मौतों का आंकड़ा भी बढ़ रहा है। अब तक 97 से अधिक मौतें हो चुकी हैं। शनिवार को रोहतक में 1 व हिसार में 4 मरीज की मौत हुई। वहीं कुल मरीजों की संख्या 1056 हो चुकी है। सरकार ने हाल में एक कंपनी को 15 हजार इंजेक्शन का ऑर्डर दिया है।

आरोप: अग्रोहा मेडिकल से मरीजों को जबरन डिस्चार्ज किया जा रहा

माजरा निवासी मुकेश ने बताया कि वह अपने पति को 20 मई को अग्रोहा मेडिकल में लाई थीं। फंगस के चलते 21 मई को नाक की सर्जरी की गई। उसके बाद से हालत में सुधार है। 7 इंजेक्शन लग चुके हैं। लेकिन अब इंजेक्शन के अभाव में डिस्चार्ज करने के लिए कह रहे हैं। कॉलेज की निदेशक डॉ. गीतिका दुग्गल का कहना है कि सर्जरी के बाद इंफेक्शन न हो। इसलिए 7 दिन की ओरल ड्रग के साथ घर भेजा जाता है।

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