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हरियाणा सरकार के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका:बाबा रामदेव के पतंजलि द्वारा निर्मित एक लाख कोरोनिल किट खरीदने का फैसले को दी गई चुनौती

चंडीगढ़/हरियाणा10 दिन पहले
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याचिका में हरियाणा सरकार व इंडियन मेडिकल एसोसिएशन को भी प्रतिवादी बनाया गया है।  - Dainik Bhaskar
याचिका में हरियाणा सरकार व इंडियन मेडिकल एसोसिएशन को भी प्रतिवादी बनाया गया है। 

हरियाणा सरकार द्वारा बाबा रामदेव के पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेडनिर्मित कोरोनिल की एक लाख दवा किट को खरीदने का फैसला लिया गया था, लेकिन इस फैसले को पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में एक याचिका दायर करके चुनौती दी गई है। याची ने ढाई करोड़ रुपए में होने वाली इस खरीद पर रोक लगाने की मांग की है। याचिका में हरियाणा सरकार व इंडियन मेडिकल एसोसिएशन को भी प्रतिवादी बनाया गया है।

याचिका फरीदाबाद निवासी अभिजीत ने दायर की है। जिसमें कहा गया है कि वर्तमान में प्रदेश की मनोहर लाल सरकार को वैक्सीन, ऑक्सीजन, एंटीबायोटिक्स, विटामिन आदि उपलब्ध कराना चाहिए। लेकिन सरकार एक ऐसी दवा पर करोड़ों रुपए खर्च करने जा रही है, जिसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण ही नहीं है। जबकि सरकार को हर प्रदेशवासी को वैक्सीन लगाने की तरफ ध्यान देना चाहिए।

उन्होंने याचिका में बताया कि पतंजलि ने 23 जून, 2020 को कोरोनिल किट जारी करते हुए इसे कोरोना का 100 प्रतिशत इलाज बताया था। लेकिन आयुष मंत्रालय ने पतंजलि को विज्ञापन बंद करने और पतंजलि द्वारा किए गए ऐसे दावों पर नोटिस भेजकर जवाब मांगा था। 24 जून, 2020 को उत्तराखंड में आयुर्वेद विभाग के लाइसेंस अधिकारी वाईएस रावत ने बताया था कि पतंजलि ने कोरोना की दवा के लिए नहीं, बल्कि खांसी और बुखार के खिलाफ प्रतिरक्षा बूस्टर के लाइसेंस का आवेदन किया था।

30 जून, 2020 को एक वीडियो सामने आया जिसमें पतंजलि के सीईओ बालकृष्ण ने खुद कहा था कि पतंजलि ने कोरोना की दवा नहीं बनाई है। कोरोनिल खांसी और बुखार जैसी एलर्जी के लिए प्रतिरक्षा बूस्टर है। 19 फरवरी, 2021 को रामदेव ने एक विस्तृत चिकित्सा रिपोर्ट जारी की और झूठे दावे किए कि कोरोनिल पहली साक्ष्य-आधारित कोविड -19 दवा है जो डब्ल्यूएचओ प्रमाणित है। जबकि डब्ल्यूएचओ ने ट्विटर पर सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने किसी भी पारंपरिक दवा की न तो समीक्षा की है और न ही प्रमाणित किया है। डब्ल्यूएचओ ने पतंजलि द्वारा जारी बयान को गलत करार दिया।

22 मई को रामदेव एक वीडियो में एलोपैथी को नाटक और बेवकूफ बर्बाद विज्ञान कहते हुए नजर आए थे। उसी दिन IMA ने रामदेव को डॉक्टरों को बदनाम करने और एलोपैथी के बारे में गलत सूचना फैलाने के लिए कानूनी नोटिस भेजा था। 23 मई को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने रामदेव को इस तरह के बयान देने से परहेज करने की सलाह दी थी। इतना सब होने के बाद भी 24 मई को हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री ने एक निर्णय लिया और ट्वीट किया कि हरियाणा सरकार 1 लाख कोरोनिल किट खरीदेगी और इसे मुफ्त में वितरित करेगी।