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किसानों और आढ़तियों की चिंता का नमूना:कैथल जिले की पूंडरी और रसीना मंडी बारदाना मुक्त, 2850 मजदूर परिवारों को पड़े रोटी के लाले

कैथल/पूंडरी8 महीने पहले
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कैथल जिले के कस्बा पूंडरी में मजदूरी मिलने के इंतजार में गेहूं की ढेरी के पास बैठे पल्लेदार। - Dainik Bhaskar
कैथल जिले के कस्बा पूंडरी में मजदूरी मिलने के इंतजार में गेहूं की ढेरी के पास बैठे पल्लेदार।

(जयपाल शर्मा) . कैथल जिले की पूंडरी और रसीना मंडी को बारदाना मुक्त कर दिए जाने से 2850 मजदूरों का रोजगार छिन गया है। इससे इन परिवारों के सामने सवाल मुंह बाए खड़ा है कि अब दो जून की रोटी का जुगाड़ कहां से होगा। असल में इन परिवारों का भरण-पोषण फसली सीजन में मंडी में पल्लेदारी, सफाई आदि के काम से ही चलता था। अब प्रदेश सरकार के आदेश पर स्थानीय जिला प्रशासन ने इन दोनों मंडियों को बारदाना मुक्त कर दिया है, यानि यहां अब लोडिंग-अनलोडिंग का काम नहीं होगा।

आढ़ती पर्ची बनाकर दे देता है और फिर किसान अनाज को सीधे साइलो गोदाम में ले जाते हैं। अगर यही चलता रहा तो पिछले करीब साढ़े 5 महीने से खेती कानूनों के विरोध में दिल्ली की दहलीज पर धरने पर बैठे किसानों की मंडी बंद हो जाने की चिंता सही साबित होने में कोई संदेह नहीं रह जाएगा। साथ ही आढ़तियों की भी आने वाले वक्त में क्या जरूरत रह जाएगी।

पिछले 11 दिन से बड़ी संख्या में मजदूर इस आस के साथ मंडी पहुंचते हैं कि सरकार अपना फैसला वापस लेकर मंडी में ही फसल तुलाई के आदेश जारी करेगी। शाम होते-होते रोज यह आस टूट जाती है। बेचारे खाली जेब लेकर बच्चों के पास लौट आते हैं। इनमें कुछ मजदूर 25-30 बरस से मंडी से ही जुड़े हुए थे। सीजन में ये 10 से 15 हजार रुपए कमा लेते थे। जहां तक इनकी आस टूट जाने के कारण की बात है, जिन किसानों ने सरकार के आदेश के खिलाफ मंडी में गेहूं उतारी थी, अब वो भी परेशान होकर अपना गेहूं साइलो गोदाम लेकर जा रहे हैं।

अब मंडी में खरीद का काम नहीं है और खरीद नहीं तो फिर साफ-सफाई या दूसरे काम भी नहीं हैं। यहां तक कि फसली सीजन में फलों, जूस की रेहड़ी या चाय की टपरी लगाने वालों का रोजगार भी छिन गया है। अनाज सुखाने का थोड़ा-बहुत जो काम मजदूर कर लेते थे, वह मशीनों से किया जा रहा है और इन मशीनों को भी लाने-ले जाने का काम मशीन ही कर रही हैं।

कई दिन तक मंडी में गेहूं न बिकने पर मंडी से साइलो गोदाम ले जाने के लिए ट्रॉली में लोड करवाते किसान। यह काम भी मशीन से ही किया गया।
कई दिन तक मंडी में गेहूं न बिकने पर मंडी से साइलो गोदाम ले जाने के लिए ट्रॉली में लोड करवाते किसान। यह काम भी मशीन से ही किया गया।

किसान की चिंता
गांव ट्योंठा के किसान सुरजीत सिंह का कहना है, 'मैं छोटा किसान हूं। ट्रैक्टर-ट्रॉली नहीं है। मैं किराये की ट्रॉली में अपनी पूंडरी फसल लेकर जाता था। ट्रॉली वाला 500-600 रुपए किराया लेता था। मंडी में जाने के बाद पांच मिनट में फसल उतर जाती थी। अब साइलो गोदाम फसल लेकर गया तो ट्रैक्टर वाले ने 2000 रुपए किराया मांगा, क्योंकि फसल 20 किलोमीटर दूर लेकर जानी पड़ी। इतना ही नहीं ट्रैक्टर वाले को भी वापस आने तक तीन घंटे का समय लग गया। मेरी तरह आसपास के और गांवों के किसानों को भी इसी समस्या से दो-चार होना पड़ेगा।

पल्लेदारी खत्म होने से बढ़ी यह समस्या
पूंडरी के रहने वाले सुरेंद्र ने बताया, 'मेरे परिवार में पत्नी और चार बच्चे हैं। मैं सीजन में काम करके सालभर का अनाज जमा कर लेता था। इस बार प्रशासन कह रहा है कि मंडी बारदाना मुक्त कर दी गई है। ऐसे में मुझे काम नहीं मिल रहा। पहले पता होता तो गेहूं की कटाई आदि का काम ही कर लेता। अब न तो मंडी में काम मिल रहा और न ही बाहर काम है। मेरे ही नहीं, मेरे जैसे हजारों मजदूर परिवारों के लिए यही संकट है कि अब सालभर खाने को अनाज कहां से आएगा'।

सफाईकर्मियों को भी सताने लगी
साहब सिंह के परिवार में भी चार सदस्य हैं, जो गेहूं और धान के सीजन में पूंडरी अनाज मंडी में सफाई का काम करते थे। दोनों सीजन में 70 से 80 हजार रुपए कमा लेते थे। इन्हीं रुपए से सालभर परिवार का पालन-पोषण करते थे। अब मंडी में अनाज नहीं आ रहा है। मंडी में काम करने वाले मजदूर अब घर बैठे हैं।

अफसरों की अपनी मजबूरी है
उधर, पूंडरी के मार्केट कमेटी सचिव दीपक कुमार का कहना है कि उनके पास उच्च अधिकारियों के जो आदेश आएंगे, उसी अनुसार काम करना पड़ता है। इस बार सरकार ने मंडी को बारदानामुक्त रखने का फैसला किया है। जब भी उच्च अधिकारियों से मंडी से गेहूं खरीद करवाने और बारदाना देने के आदेश आएंगे, उनका पालन करेंगे।

साइलो गोदाम की विशेषताएं

  • दो लाख टन गेहूं स्टोर करने की क्षमता
  • एक दिन में 1200 से 1300 ट्राली खाली हो सकती है।
  • गेहूं की ट्रॉली तुलाई, उतरवाई आदि में सिर्फ पांच मिनट का समय लगता है।
  • सीजन होने के कारण ट्रालियों की संख्या ज्यादा है अब एंट्री होने के बाद ट्रॉली खाली होने तक एक घंटा लग जाता है।
  • गोदाम में सिर्फ 40 से 45 कर्मचारी ही गेहूं तुलवाई, उतरवाई का पूरा कार्य संभाल लेते हैं।
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