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स्कूल बंद करने का विरोध:सरकार के खिलाफ एकजुट हुए संचालक, बोले- बच्चों को शिक्षा देना अपराध, तो हम जेल जाने को तैयार

सिरसा8 महीने पहले
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स्कूल बंद करने के आदेशों के खिलाफ सड़कों पर उतरे स्कूल संचालक। - Dainik Bhaskar
स्कूल बंद करने के आदेशों के खिलाफ सड़कों पर उतरे स्कूल संचालक।
  • स्कूल संचालक बोले- स्कूलों का मालिक शिक्षा मंत्री होता है न कि मुख्यमंत्री
  • स्कूल तो हर हाल में खोले जाएंगे, बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ हमें मंजूर नहीं

हरियाणा सरकार द्वारा कोविड-19 के सुरक्षा मानकों के तहत 30 अप्रैल तक स्कूल बंद रखने के मौखिक आदेश जारी किए गए हैं। इसके खिलाफ सोमवार को सिरसा जिला के स्कूल संचालक बिफर गए और उन्होंने फैडरेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन हरियाणा के तत्वावधान में प्रदर्शन किया। इसके लिए सैंकड़ों की संख्या में स्कूल संचालक लघु सचिवालय में एकत्रित हुए और सरकार के आदेशों के खिलाफ निंदा जाहिर की।

एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुलभूषण शर्मा ने कहा कि हरियाणा सरकार का आदेश वर्तमान शिक्षा स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा। लगभग एक साल के बाद अब जाकर कोविड-19 के कारण शिक्षा के नुकसान की भरपाई करने हेतु छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों व स्कूल लीडरों ने बड़ी आशा के साथ फिजिकल कक्षाएं शुरू की हैं, लेकिन बिना किसी चर्चा के प्रदेश के मुख्यमंत्री का स्कूल बंद करने के आदेश देना, लोकतांत्रिक नहीं है।

सरकार जानती है कि हरियाणा अब जोखिम उठाने की स्थिति में नहीं है तो ऐसे में आदेश विचार करके लेने चाहिए। एसोसिएशन निरंतर सरकार से मांग कर रही है कि महामारी के कारण आए वित्तीय संकट से निपटने के लिए स्कूलों को प्लेज मनी वापिस करें, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा। हाल ही में तेलंगाना सरकार ने निजी स्कूल के शिक्षण व गैर शिक्षण कर्मचारियों के लिए 2 हजार रुपए व 25 किलोग्राम चावल के राहत पैकेज की घोषणा की है।

एसोसिएशन चाहती है कि हरियाणा सरकार भी इसी तर्ज पर शिक्षण व गैर शिक्षण कर्मचारियों को सहूलियत दें। लाखों ड्राईवर, सफाई कर्मचारी, बस सहायक बेरोजगार हैं। स्कूल बसें दो साल से नहीं चली हैं। ऐसे में सरकार स्कूल बस कर्मचारियों को उनकी नौकरी वापस मिलने तक 3 हजार रुपए प्रति माह बेरोजगारी भत्ता देने की घोषणा करें। स्कूलों को बंद हुए एक साल से अधिक का समय हो गया है।

लेकिन देश में सरकारी कार्यक्रम, राजनीतिक रैलियां, धार्मिक सभाएं व क्रिकेट मैच बिना किसी रोकटोक के हो रहे हैं, लेकिन शिक्षा जो अत्यंत महत्त्वपूर्ण है, वह लॉकडाउन में है। इसलिए स्कूल हर हाल में खुलेंगे, अगर किसी को पढ़ाना अपराध है तो हम जेल जाने को तैयार हैं। स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत आते हैं, लेकिन प्रदेश के मुख्यमंत्री स्कूलों को बंद करने के आदेश जारी करते हैं, जबकि शिक्षामंत्री कोई टिप्पणी या आदेश जारी नहीं करते।

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