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कोरोना महामारी से बचाव की दिशा में प्रयास:राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों को मिली बहुत बड़ी जम्मेदारी, एंटी वायरल ड्रग तैयार करेंगे

हिसार6 दिन पहलेलेखक: महबूब अली
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वैज्ञानिक पशुओं व मनुष्य में हाेने वाले काेराेना वायरस से बचाव के लिए हर्बल दवा तैयार करेंगे। - Dainik Bhaskar
वैज्ञानिक पशुओं व मनुष्य में हाेने वाले काेराेना वायरस से बचाव के लिए हर्बल दवा तैयार करेंगे।

भारत देश में कोरोना महामारी से बचाव की दिशा में एक प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र (NRCE) के वैज्ञानिकाें काे बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। संस्थान काे नेशनल एग्रीकल्चर साइंस फंड यानी ICAR ने 3.06 कराेड़ का प्राेजेक्ट दिया है। इसके तहत संस्थान के वैज्ञानिक 3 अन्य संस्थान IVRI इज्जतनगर, NIHSAD भोपाल और NIVEDI बेंगलुरु के वैज्ञानिकाें के साथ मिलकर पशुओं व मनुष्य में हाेने वाले काेराेना वायरस से बचाव के लिए हर्बल दवा तैयार करेंगे।

यह पाैधाें की मदद से तैयार की जाएगी। काेराेना के पशुओं से मनुष्य में फैलने की संभावनाओं पर रिसर्च की जाएगी। देखा जाएगा कि पशुओं व मनुष्य में हाेने वाले काेराेना वायरस में क्या डिफरेंस है। राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान संस्थान के निदेशक डाॅ. यशपाल, नाेडल अधिकारी व प्रधान वैज्ञानिक डाॅ. बीआर गुलाटी ने बताया कि रिसर्च में देखा जाएगा कि पशु व मनुष्य में हाेने वाले काेराेना के बीच क्या संबंध है। पता लगाएंगे कि पशुओं में होने वाला काेराेना वायरस मनुष्य काे भी चपेट में ले सकता है या नहीं।

जल्द ही काेराेना से बचाव के लिए एंटी वायरल ड्रग तैयार करने का कार्य शुरू किया जाएगा। संस्थान के वैज्ञानिकाें काे इस संबंध में अावश्यक दिशा निर्देश दिए गए हैं। प्राेजेक्ट का नेतृत्व अश्व अनुसंधान संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डाॅ. बलदेव राज गुलाटी करेंगे।

जानिए.. पशु में काैन से काेराेना के विषाणु पाए जाते हैं

डाॅ. गुलाटी के अनुसार, घाेड़ाें में इक्वाइन, भैंस अाैर गाय में बाेवाइन तथा मुर्गियाें में इन्फेक्शस ब्राेकायटिस, सुअर में कई तरह के काेराेना वायरस के विषाणु पाए जाते हैं। इन सभी को मनुष्यों से जोड़कर अध्ययन किया जाएगा।

भारत में मिले अधिकतर मामलाें में बी.1.617 भी पाया जा रहा है। इस स्ट्रेन का नाम अब डब्ल्यूएचअाे ने डेल्टा रखा है, जाे काफी संक्रामक है। यह स्ट्रेन एक से दूसरे में तेजी से फैलता है। सावधानी ही इस स्ट्रेन से बचाव का उपाय है।

ICAR की तरफ से संस्थान काे शोध और दवा के निर्माण के लिए प्राेजेक्ट मिला है। वैज्ञानिक जल्द ही काम शुरू करेंगे।
- डाॅ. यशपाल, निदेशक, राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान संस्थान, हिसार।