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काेराेना काल:मोबाइल, टीवी व कंप्यूटर स्क्रीन पर ज्यादा टाइम बिताने से ग्लूकोमा के 400 मरीज मिले, इनमें 15% युवा शामिल

रोहतक9 महीने पहलेलेखक: विवेक मिश्र
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  • रोहतक पीजीआई के क्षेत्रीय नेत्र विज्ञान संस्थान ग्लूकोमा स्पेशल क्लीनिक की विशेष रिपोर्ट में खुलासा

40 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को होने वाली काला मोतिया की बीमारी अब 18 से 30 साल के युवाओं में मिल रही है। कोरोना काल में युवाओं का अधिकांश टाइम मोबाइल, कम्प्यूटर, टीवी स्क्रीन पर बीतने की वजह से आंखों में लालिमा, धुंधलापन आना और आंख में व सिर में दर्द बने रहने की शिकायत बढ़ रही है। ये लक्षण काला मोतिया यानी ग्लूकोमा के होते है। पीजीआई के क्षेत्रीय नेत्र विज्ञान संस्थान में संचालित ओपीडी में वर्ष 2020 के जनवरी माह से दिसंबर माह में 400 नए रोगी ग्लूकोमा से पीड़ित पाए गए। ओपीडी में स्क्रीनिंग की तो ग्लूकोमा के पीड़ित मरीज मिलने लगे। अब ऐसे मरीजों का सोमवार व बुधवार को ग्लूकोमा स्पेशल ओपीडी लगाकर जरूरी जांच व इलाज किया जा रहा है।

पीड़ित मरीजों के परिजनों की भी होगी स्क्रीनिंग

क्लीनिक इंचार्ज व यूनिट हेड डॉ. मनीषा राठी व प्रोफेसर डॉ. सुमित सचदेवा ने बताया कि औसतन 400 नए केस में 15 फीसदी केस में युवा और 55 फीसदी 40 से 60 साल उम्र और 30 फीसदी केस में बुजुर्गों को काला मोतिया से पीड़ित पाया गया है। उन्होंने बताया कि काला मोतिया से पीड़ित मिलने वाले मरीजों के परिजनों की भी आंखों की स्क्रीनिंग करने की पहल शुरू करने की तैयारी है।

7 से 13 तक विश्व ग्लूकोमा सप्ताह मनाएंगे

पीजीआईएमएस के क्षेत्रीय नेत्र विज्ञान संस्थान की ओर से 7 से 13 मार्च तक विश्व ग्लूकोमा सप्ताह मनाया जाएगा। पूरे सप्ताह अभियान चलाकर मरीजों व समाज के लोगों को जागरूक किया जाएगा। ग्लूकोमा क्लीनिक की इंचार्ज डॉ. मनीषा राठी व डॉ. सुमित सचदेवा लोगों को अवेयर करेंगे। पीजीआईएमएस में ग्लूकोमा के इलाज की सभी तकनीक उपलब्ध हैं, इसलिए समय पर उपचार के लिए पीजीआईएमएस आएं।

हर साल 1200 मरीज काला मोतिया से पीड़ित

वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ प्रोफेसर डॉ. सुमित सचदेवा ने कहा कि ग्लूकोमा विश्व में अंधेपन का एक कारण है। ग्लूकोमा क्लीनिक की शुरुआत में उनके पास साल में सिर्फ 300 मरीज आते थे और आज धीरे-धीरे जागरूकता बढ़ने से पीजीआई में सालाना करीब 1200 मरीज इनमें पुराने और नए केस काले मोतिया के आने लगे हैं। कुछ मरीज तो आखिरी स्टेज में तब आते हैं, जब उन्हें दिखना बिल्कुल बंद हो जाता है।

ग्लूकोमा के लक्षण

  • रोशनी के चारों ओर आभा दिखाई देना
  • नजर में संकरापन आना
  • बार-बार चश्में का नंबर बदलना
  • आंख में लालिमा
  • आंखों में धुंधलापन आना
  • आंख में व सिर में दर्द होना

ग्लूकोमा होने पर क्या करें
मरीज चिकित्सीय सलाह के अनुसार निरंतर अपनी दवा लें।
एक बार में जितनी दवा बताई है, उसकी मात्रा न बढ़ाएं।

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