किसान आंदोलन के 12 दिन:सिंघु बॉर्डर पर गुजरात, तमिलनाडु और कर्नाटक से भी आ रहे किसानों के दल,रात को सर्दी न लगे इसलिए बंट रही गरम चादरें

हरियाणा/सिंघु बॉर्डरएक वर्ष पहलेलेखक: मनीषा भल्ला
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साेनीपत | किसान आंदाेलन में लंगर में सेवा करतीं दिल्ली से आई महिलाएं। - Dainik Bhaskar
साेनीपत | किसान आंदाेलन में लंगर में सेवा करतीं दिल्ली से आई महिलाएं।
  • किसान बोले- हम यहां से कब जाएंगे, इस बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पता होगा
  • एनआरआई भेज रहे मदद, धरना स्थल पर लगे हैं डेनमार्क, न्यूजीलैंड, कनाडा के बैनर

नए कृषि कानूनों के विरोध में यहां किसान को डटे 11 दिन हो चुके हैं। बॉर्डर पर करीब एक लाख प्रदर्शनकारियों के लिए दिन-रात लंगर बनाया जा रहा है। इसमें जूस, पिज्जा, देसी घी के लड्डू, जलेबियां, गोलगप्पे, बादाम-अखरोट तक बंट रहे हैं। नेशनल हाईवे पर मीलों ट्रैक्टर ट्रॉली की कतारें हैं, इन्हीं को प्रदर्शनकारी किसानों ने घर भी बना लिया है। आंदोलन में आए कई किसान खुद ही कह रहे हैं ऐसा प्रदर्शन जीवन में पहली बार देख रहे हैं।

कई किसान तो विदेश से प्रदर्शन में शामिल होने आए हैं। हर दस कदम पर लंगर है। सब्जियों में मटर-पनीर, आलू-गोभी, छोले पूरी, मूली के पराठे, आलू-प्याज के परांठे भी बन रहे हैं। पंजाब के एक गांव से देसी घी से बनी 15 टन पिन्नियां आई हैं। मलेरकोटला के मुस्लिम समाज ने वेज पुलाव का लंगर लगाया हुआ है। रात को सर्दी न लगे इसलिए गरम चादरें बंट रही हैं। गुरदासपुर से आए सविंदरपाल सिंह मंच संचालक कमेटी के सदस्य हैं। उन्होंने बताया, ‘आंदोलन की तैयारी 65 दिन से चल रही थी। एनआरआई पंजाबी भी भरपूर योगदान दे रहे हैं।’ आंदोलन स्थल पर 15 मेडिकल कैंप लगे हुए हैं।

भूलिंदर पाल सिंह ग्रीस से आए हैं। लंगर में रोटियां बेल रहे हैं, कह रहे हैं छह माह का राशन साथ लाए हैं। दुबई से आए गुरपिंदर सिंह कहते हैं कि हम यहां से कब जाएंगे, इस बारे में मोदीजी को पता होगा। जगराओं के सज्जेवाल गांव से आए विक्रम सिंह बताते हैं आज गुजरात, तमिलनाडु, कर्नाटक और राजस्थान से भी किसान आए हैं। ट्रांसपोर्ट और पैट्रोल पंप एसोसिएशन वाले क्विंटलों दूध बांट रहे हैं। हरियाणा के किसान खाने-पीने का कच्चा सामान, पेट्रोल, डीजल और सिलेंडर बांट रहे हैं।

शेतरनतारन से आए किसान विक्रम सिंह बताते हैं कि हरियाणा डेयरी एसोसिएशन और पंजाब मिल्क एसोसिएशन और स्थानीय दूध वाले रोज कई टन दूध दे रहे हैं। विक्रम सिंह कहते हैं कि मोदी सरकार बोलती है कि ‘बेटी पढ़ाओ’ सरकार यह बिल वापिस ले ले बेटियां हम खुद पढ़ा लेंगे। क्योंकि हमारी जमीन ही हमारे पास नहीं होगी तो बेटियां क्या खाक पढ़ाएंगे।

हम मंच संचालन के प्रबंधक अवतार सिंह कौरजीवाला ने बताया कि इस आंदोलन की खूबसूरती यह है कि हम किसी से कुछ नहीं मांग रहे, फिर भी हर दिन लाखों रुपयों का योगदान आ रहा है। कल ही गायक दिलजीत दोसांझ ने 20 लाख रुपए दिए हैं। किसान तो पहले से ही कर्ज माफी और स्वामीनाथन कमीशन रिपोर्ट लागू करने की मांग कर रहा था, ऊपर से यह नया कानून आने से खेती किसानी पूरी तरह खत्म हो जाएगी। वहीं, मूलभूत सुविधाओं के लिए आसपास के दफ्तरों, फैक्ट्रियों, शोरूम और पेट्रोल पंप वालों ने पूरी व्यवस्था संभाली हुई है। आंदोलन को देश के 500 किसान संगठनों का समर्थन मिल चुका है। पंजाब के खिलाड़ी, ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन, पैट्रोल पंप एसोसिएशन ने भी समर्थन दिया है।

तमिलनाडु के 300 किसानों के ट्रेन टिकट रद्द कर दिए गए

मुख्य धरना स्थल पर पंजाब-तमिलनाडु एकता के नारे लग रहे हैं। क्योंकि, हाल ही में यहां 10 किसान तमिलनाडु से आए हैं। उन्होंने बताया कि 300 किसानों के टिकट रद्द कर दी गई। महाराष्ट्र के किसानों के टिकट भी रद्द कर दिए गए। धरना स्थल पर डेनमार्क, न्यूजीलैंड, कैनेडा, कैलाफोर्निया के बैनर लगे हुए हैं। एनआरआई विदेश से मदद भेज रहे हैं। खुद भी आ रहे हैं।

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